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राजनीतिक दलों को 3 जून को ईवीएम हैक करने की चुनौती

Updated at : 20 May 2017 6:32 PM (IST)
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राजनीतिक दलों को 3 जून को ईवीएम हैक करने की चुनौती

नयी दिल्ली : इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में गडबडी संभव है, इसे साबित करने के लिए चुनौती तीन जून से शुरु होगी. भारत निर्वाचन आयोग ने मशीन में किसी प्रकार की छेडछाड की संभावना को खारिज करते हुए आज यह घोषणा की. निर्वाचन आयोग ने एक सप्ताह पहले ही राजनीतिक दलों को चुनौती दी थी कि […]

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नयी दिल्ली : इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में गडबडी संभव है, इसे साबित करने के लिए चुनौती तीन जून से शुरु होगी. भारत निर्वाचन आयोग ने मशीन में किसी प्रकार की छेडछाड की संभावना को खारिज करते हुए आज यह घोषणा की. निर्वाचन आयोग ने एक सप्ताह पहले ही राजनीतिक दलों को चुनौती दी थी कि वे साबित करें कि हालिया विधानसभा चुनावों में प्रयुक्त ईवीएम में धांधली संभव है. संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने कहा, ‘‘ईवीएम चुनौती तीन जून से शुरु होगी. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ईवीएम के भरोसे पर सवाल उठाया है उन्होंने अभी तक अपने दावों के समर्थन में पुख्ता साक्ष्य नहीं दिये हैं.

जैदी ने कहा, ईवीएम के भीतर लगे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को बदलना संभव नहीं हैंउन्होंने कहा, ‘‘हमारे ईवीएम तकनीकी रुप से सुदृढ हैं और उनमें धांधली संभव नहीं. जैदी ने आम आदमी पार्टी के दावों को खारिज किया कि ईवीएम में धांधली संभव है. उन्होंने कहा मशीन में कोई छेडछाड संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है और निर्वाचन आयोग इस संबंध में सभी जरुरी कदम उठा रहा है.

कई प्रमुख राजनीतिक दलों का दावा है कि ईवीएम से लोगों का विश्वास उठ गया है.राजनीतिक पार्टियां 26 जून तक ऑनलाइन आवेदन भेज सकती हैं. पार्टियां जिस ईवीएम की मांग करेंगी, उसे पोलिंग स्टेशन से उसे लाते वक्त साथ होंगी. मशीनों को खोलकर देखने दिया जाएगा, लेकिन चैलेंज के बाद ऐसा करने पर मनाही होगी . इस मौके पर चुनाव आयुक्त ने ईवीएम से जुड़े अहम सुरक्षा कवच की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने साफ कहा कि इसे हैक करना मुश्किल है. ईवीएम में वन टाइम प्रोग्रामबल चिप लगा है जिसमें सिर्फ एक बार ही कोडिंग की जा सकती है. उसे बदला नहीं जा सकता.

हर मशीन की चिप पर डिजिटल हस्ताक्षर किया गया है जिसे बदलने से भी पकड़ा जायेगा. चुनाव आयोग के इन दावों पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा है कि चुनाव आयोग मशीन को खोलने की इजाजत नहीं दे रहा ऐसे में राजनीतिक पर्टियां कैसे अपनी बात साबित कर पायेंगी.

जैदी ने कहा-मतपत्र से मतदान की ओर लौटने का सवाल ही नहीं

इस बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने ईवीएम के विरोध के बावजूद मतपत्र से मतदान कराने की संभावनओं को सिरे से खारिज कर दिया. उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में सभी चुनाव वीवीपेट युक्त ईवीएम से कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए जैदी ने कहा कि मतपत्र की ओर लौटने का सवाल ही नहीं उठता है. जैदी ने कहा कि ईवीएम में गड़बड़ी की राजनीतिक दलों की शंकाओं को दूर करने के लिए 12 मई को सर्वदलीय बैठक में बहुसंख्यक दलों ने वीवीपेट युक्त ईवीएम का समर्थन किया था. उन्होंने कहा, ‘ऐसे में बैलिट पेपर की ओर जाने का प्रश्न ही नहीं उठता है.’ हालांकि, जैदी ने वीवीपेट मशीन से वोट डालने को सुनिश्चित करने का सबूत देनेवाली पर्ची को देखने का समय बढ़ाये जाने की राजनीतिक दलों की मांग पर आयोग द्वारा विचार करने की बात जरूर कही. उन्होंने बताया कि मौजूदा व्यवस्था मेंं वीवीपेट से निकलनेवाली पर्ची को देखने के लिए मतदाता कोसात सेकेंड का समय मिलता है. राजनीतिक दलों की मांग है कि यह समय बढ़ा कर 15 सेकेंड किया जाये. जिससे मतदाता अपना मत उसकी मर्जी के उम्मीदवार के पक्ष में ही जाने की बात से संतुष्ट हो सके. जैदी ने कहा कि आयोग पहले ही घोषित कर चुका है कि भविष्य में अब प्रत्येक चुनाव वीवीवेट युक्त ईवीएम से होगा. इसकी शुरुआत गुजरात और हिमाचल प्रदेश के इस साल के अंत में संभावित विधानसभा चुनाव से हो जायेगी.

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