अर्धसैनिक बलों के जवानों की शहादत पर परिजनों को मिलेंगे एक करोड़ रुपये!

Updated at : 11 May 2017 8:11 PM (IST)
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अर्धसैनिक बलों के जवानों की शहादत पर परिजनों को मिलेंगे एक करोड़ रुपये!

नयी दिल्ली : गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि अर्धसैनिक बल के जवानों की शहादत पर परिजनों को केंद्रीय सहायता के तौर पर कम से कम एक करोड़ रुपये देने पर विचार किया जा रहा है. सिंह ने गुरुवारको सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा जवानों की समस्याओं के निवारण के लिए विकसित दो […]

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नयी दिल्ली : गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि अर्धसैनिक बल के जवानों की शहादत पर परिजनों को केंद्रीय सहायता के तौर पर कम से कम एक करोड़ रुपये देने पर विचार किया जा रहा है. सिंह ने गुरुवारको सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा जवानों की समस्याओं के निवारण के लिए विकसित दो मोबाइल एप्लीकेशन की शुरुआत करते हुए यह जानकारी दी.

उन्होंने स्वीकार किया कि देश की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों के जीवन में परेशानियां हैं. इन्हें आर्थिक मदद के अलावा तकनीकी इस्तेमाल से भी न्यूनतम करने के प्रयास किये जा रहे हैं. सिंह ने कहा, ‘‘पिछले 20-25 सालों से चल रही व्यवस्था में सिपाहियों की प्रोन्नति नहीं हुई थी, इसका पता चलते ही हमने 34 हजार जवानों को प्रोन्नत कर हेड कॉन्स्टेबल बनाया. इसी तरह हमारा मानना है कि सीएपीएफ के जवानों की शहादत पर परिजनों को कम से कम एक करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता राशि दी जाये, जिससे शहीद के परिवार का भविष्य सुगम बन सके.”

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय सैन्य अभियान में घायल हुए जवानों के अस्पताल में भर्ती रहने तक के इलाज का खर्च सरकार वहन करती है. इस व्यवस्था का दायरा बढ़ा कर अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पूरी तरह से ठीक होने तक इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने पर भी विचार किया जा रहा है. जल्द ही इन दोनों फैसलों की आधिकारिक घोषणा की जायेगी. सिंह ने बीएसएफ द्वारा अर्धसैनिक बल के जवानों की समस्याओं के समाधान के लिए विकसित दो मोबाइल एप को क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि अब वह स्वयं इस एप के जरिये जवानों से महज ‘एक क्लिक’ दूर महसूस कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मोबाइल एप पर मिलनेवाली शिकायतों के नि:स्तारण की हर महीने वह स्वयं समीक्षा करेंगे. साथ ही उन्होंने जवानों से अनुरोध किया कि वे ड्यूटी से जुड़ी समस्याओं के लिए पहले अपने बल में मौजूद व्यवस्था के तहत समाधान कराने का प्रयास करें. समाधान नहीं होने पर फिर मोबाइल एप के जरिये मंत्रालय को सूचित करें.

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