काम वहीं से आगे बढाएंगे, जहां पर्रिकर ने छोड़ा : अरुण जेटली

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Mar 2017 7:28 PM

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नयीदिल्ली : वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मनोहर पर्रिकर की गोवा के मुख्यमंत्री केरूप में वापसी के बाद आज रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला और पर्रिकर के समय की नीतियां जारी रखने का वादा किया. जेटली ने 2014 में भी मई से नवंबर तक रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला था और उन्हें रविवार को […]

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नयीदिल्ली : वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मनोहर पर्रिकर की गोवा के मुख्यमंत्री केरूप में वापसी के बाद आज रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला और पर्रिकर के समय की नीतियां जारी रखने का वादा किया. जेटली ने 2014 में भी मई से नवंबर तक रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला था और उन्हें रविवार को पर्रिकर के पद छोड़ने के बाद फिर से यह जिम्मेदारी सौंपी गयी.

उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा मंत्रालय पर देश की सुरक्षा और सशस्त्र बलों के संबंध में, देश के लिए सुरक्षा उपकरणों की खरीद की विशेष जिम्मेदारी होती है. आज मैंने स्थिति का जायजा लिया.’ जेटली के मुताबिक वह काम को वहीं से आगे बढाएंगे, जहां पर्रिकर ने छोड़ा है.

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी सतत चल रही सरकार है और मैं वहीं से काम शुरूकरूंगा जहां पर्रिकर ने छोड़ा है.’ रक्षा मंत्री केरूप में पर्रिकर के कार्यकाल में रक्षा सौदों में अड़चनें दूर हुईं और खरीद प्रक्रिया सरल हुई. उन्होंने कई रुकी हुई खरीद परियोजनाओं को भी आगे बढाया.

राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में कल कहा गया कि प्रधानमंत्री की सलाह के अनुरूप राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि जेटली अपने वर्तमान मंत्रालय के अतिरिक्त रक्षा मंत्रालय का प्रभार भी संभालेंगे. यह स्पष्ट नहीं है कि जेटली कब तक दोनों महत्वपूर्ण पदों के प्रभारी रहेंगे.

रक्षा मंत्री के रूप में पर्रिकर के कार्यकाल में हुए सौदों में अमेरिकी उड्डयन कंपनी बोइंग और अमेरिका सरकार से 21 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर तथा 15 चिनूक हेवी लिफ्ट हेलीकॉप्टरों की खरीद शामिल है.

पिछले साल, पर्रिकर की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद :डीएसी: ने अमेरिका से करीब पांच हजार करोड़ रुपये की लागत वाली 145 अत्यंत हल्की होवित्जर तोपों की खरीद और 18 धनुष तोपों के व्यापक उत्पादन को मंजूरी दी थी. बोफोर्स घोटाले के बाद तीन दशकों में इस तरह की हथियार प्रणाली की यह पहली खरीद थी और इस सौदे में काफी विलंब हो गया था.

पर्रिकर गत वर्ष मार्च में एकनई रक्षा खरीद नीति लेकर आए थे, जिसका उद्देश्य रक्षा सौदों में पारदर्शिता, त्वरित खरीद प्रक्रिया और रक्षा खरीद का स्वदेशीकरण सुनिश्चित करना था.

भारत ने पिछले साल सितंबर में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम तथा आधुनिकतम मिसाइलों से लैस 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांस के साथ करीब 59 हजार करोड़ रुपये का सौदा किया था.

सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर पर्रिकर नेकड़ा रुख अपनाया और पिछले साल सितंबर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लक्षित हमले कर कई आतंकवादियों को ढेर कर दिया.

गोवा भाजपा ने रविवार को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्रीय नेतृत्व से पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाने का आग्रह किया था. भाजपा के संभावित सहयोगियों ने भी समर्थन देने के लिए पर्रिकर की वापसी की पूर्व शर्त रखी थी.

आईआईटी :बंबई: से पढे पर्रिकर ने कुछ समय पहले कहा था कि वह अब तक राष्ट्रीय राजधानी में खुद को ‘‘ढाल’ नहीं पाए हैं. उन्होंने गोवा के अपनी पसंद होने का संकेत देते हुए कहा था कि वह कभी भी ‘‘दिल्ली के राजनीतिज्ञ’ नहीं हो सकते. पर्रिकर को आज चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री केरूप में शपथ दिलाई गयी.

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