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उत्तराखंड में मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों सीटों से हारे, कांग्रेस की नैया भी डूबी

Updated at : 11 Mar 2017 3:29 PM (IST)
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उत्तराखंड में मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों सीटों से हारे, कांग्रेस की नैया भी डूबी

देहरादून : उत्तराखंड में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी अपनी सीट नहीं बचा सके हैं. वे इस बार हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा, इन दो सीटों से चुनाव लड रहे थे और दोनों सीटों से हार गये हें. भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद और राजेश शुक्ल ने हरीश रावत को […]

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देहरादून : उत्तराखंड में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी अपनी सीट नहीं बचा सके हैं. वे इस बार हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा, इन दो सीटों से चुनाव लड रहे थे और दोनों सीटों से हार गये हें. भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद और राजेश शुक्ल ने हरीश रावत को वोटों के बड़े अंतर से हराया. हरिद्वार रूरल में हरीश राउत को 32686 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी यतीश्वरानंद को 40363 वोट मिले. किच्छ सीट पर राउत को 38236 मत मिले, जबकि राजेश शुल्क ने 40363 वोट हासिल किये.

हरीश रावत के नेतृत्व में ही कांग्रेस उत्तराखंड में चुनाव लड़ रही थी. भाजपा ने प्रदेश में सीटों की जबरस्त बढ़त ली है. उसने 70 विधानसभा सीटों में से 56 सीटों पर या तो बढ़त ली है या जीत दर्ज की है. हालांकि भाजपा ने मुख्यमंत्री के तौर पर किसी नेता का नाम आगे नहीं किया था. अभी अंतिम चुनाव परिधाम आना बाकी है. अब तक 16 सीटों के नतीजे आये हैं. इनमें से 12 सीटें भाजपा को मिली हैं. कांग्रेस की झोली में केवल 3 सीटें गयी हैं और एक सीट पर निर्दलीय ने जीत दर्ज की है. 44 सीटों पर भाजपा आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 9 और अन्य 2 सीटों पर बढ़त बनाये हुए हैं.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट भी चुनाव हारे हैं. उन्हें रानीखेत सीट से कांग्रेस उम्मीदवार करन माहरा ने शिकस्त दी है, जबकि भाजपा के संजीव आर्य और भीमताल से कांग्रेस से बगावत कर चुनावी मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी राम सिंह कैड़ा चुनाव जीत चुके हैं.

उत्तराखंड में भी मोदी की प्रचंड लगी के आगे सत्तारूढ़ कांग्रेस पूरी तरह से ध्वस्त हो गयी है. मतगणना शुरू होने के और शुरुआती रूझान आने के बाद से ही कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में सन्नाटा पसर गया. सबसे ज्यादा निराशा मुख्यमंत्री हरीश रावत की हार से है. दोनों में से एक भी सीट उनके नहीं जीतने से कांग्रेसियों में ज्यादा निराशा है.

भाजपा के लिए बड़ी जीत, कांग्रेस सदमे में
भाजपा की प्रदेश में बहुत बड़ी जीत है. 2007 के चुनाव में उसे 35 सीटें मिली थीं, जबकि 2012 में उसने केवल 31 सीटें हासिल की थीं. उसका 56 सीटों पर बढ़त लेना कांग्रेेस के लिए बड़ा सदमा है.

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