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नीतीश कटारा हत्याकांड : विकास व विशाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सुनायी 25 साल की सजा

Updated at : 03 Oct 2016 8:59 AM (IST)
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नीतीश कटारा हत्याकांड : विकास व विशाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सुनायी 25 साल की सजा

नयी दिल्ली : नीतीश कटारा हत्याकांड में आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए विकास यादव एवं विशाल यादव के लिए 25 साल की सजा का एलान किया. शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाइकोर्ट द्वारापूर्व घोषित 30 साल की सजा में संशोधन कर 25 साल की सजा आज सुनायी. साथ ही अदालत ने सुखदेव पहलवान […]

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नयी दिल्ली : नीतीश कटारा हत्याकांड में आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए विकास यादव एवं विशाल यादव के लिए 25 साल की सजा का एलान किया. शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाइकोर्ट द्वारापूर्व घोषित 30 साल की सजा में संशोधन कर 25 साल की सजा आज सुनायी. साथ ही अदालत ने सुखदेव पहलवान को 20 साल कारावास की सजा सुनायी.

सुप्रीम कोर्ट में नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में विकास यादव, उसके चचेरे भाई विशाल व उनके सहयोगी सुखदेव पहलवान की सजा की अवधि का आज संशोधित एलान किया. कटारा की वर्ष 2002 में हत्या कर दी गयी थी. इन तीनों को सनसनीखेज मामले में दोषी ठहराया गया था. जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस सी नागप्पन की पीठने विकास और विशाल द्वारा दिल्ली हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गयी अपीलों पर यह फैसला सुनाया.

आपको बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा किसी छूट के बिना 25 साल तक के लिए बढा दी थी और सबूत नष्ट करने के लिए पांच साल की अतिरिक्त सजा दी थी. हाई कोर्ट ने कटारा की हत्या को ‘‘झूठी शान के लिए’ हत्या करार दिया था. विकास और विशाल के सहयोगी सुखदेव यादव उर्फ पहलवान की उम्रकैद की सजा भी किसी छूट के बिना 25 साल तक के लिए बढा दी गई थी. अदालत ने उनके द्वारा किए गए अपराध को ‘‘दुर्लभ में भी दुर्लभतम श्रेणी’ का करार दिया था, लेकिन यह कहते हुए फांसी की सजा नहीं सुनाई थी कि उनके सुधार और पुनर्वास की संभावना ‘‘से इंकार नहीं किया जा सकता.’

सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त 2015 को विकास, विशाल और सुखदेव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था तथा कहा था कि इस देश में ‘‘केवल अपराधी ही न्याय के लिए चिल्ला रहे हैं.’ शीर्ष अदालत ने दोषसिद्धि को कायम रखते हुए कहा था कि वह हाई कोर्ट द्वारा बढाई गई तीनों दोषियों की सजा की अवधि के संबंध में सीमित पहलू पर याचिकाओं पर अलग-अलग विचार करेगी. इसने सजा की अवधि की गुंजाइश पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था और छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था.

पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कटारा की हत्या ‘‘झूठी शान’ के नाम पर की गई हत्या है, जो ‘‘चरम प्रतिशोध’ की भावना से ‘‘बहुत ही योजनाबद्ध और नियोजित तरीके से की गई.’ कटारा के विकास की बहन से प्रेम संबंध थे. अदालत ने विकास और विशाल पर लगाए गए जुर्माने की राशि भी बढा दी थी और उन्हें छह सप्ताह में 54-54 लाख रुपये निचली अदालत में जमा करने का निर्देश दिया था.

कटारा के अपहरण और हत्या के मामले में निचली अदालत ने मई 2008 में विकास (39) और विशाल (37) को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. बिजनेस एक्जीक्यूटिव कटारा एक रेलवे अधिकारी का पुत्र था. वर्ष 2002 में 16-17 फरवरी की रात उसकी हत्या कर दी गई थी. विकास और विशाल उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता डीपी यादव की पुत्री भारती से कटारा के प्रेम संबंधों के खिलाफ थे. सुप्रीम कोर्ट ने दो अप्रैल 2014 को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था. अदालत ने कहा था कि विकास, विशाल और सुखदेव ने कटारा की इसलिए हत्या कर दी क्योंकि भारती और कटारा अलग-अलग जातियों से थे और इस वजह से दोषी उनके प्रेम संबंध के खिलाफ थे.

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