अशोक कुमार लाहिड़ी बने नीति आयोग के उपाध्यक्ष, राजीव गौबा को पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 25 Apr 2026 5:20 PM
नीति आयोग के अध्यक्ष बने अशोक कुमार लाहिड़ी, राजीव गौबा को पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया
NITI Aayog : अशोक कुमार लाहिड़ी देश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और बंगाल के बालुरघाट विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं. वे 15वें वित्त आयोग के सदस्य के रूप में भी कार्यरत थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनाने की घोषणा की है. साथ ही झारखंड कैडर के आईएएस राजीव गौबा को नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य बनाये जाने की भी घोषणा की गई है.
NITI Aayog : सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है. देश के प्रमुख अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी को आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने नीति आयोग के नए वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिड़ी और गोबर्धन दास सहित सभी पूर्णकालिक सदस्यों को शुभकामनाएं दीं.
अशोक कुमार लाहिड़ी का अनुभव विकसित भारत के सपने को साकार करेगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि मैं अशोक कुमार लाहिड़ी से मिला और उन्हें नीति आयोग के वाइस चेयरमैन के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बधाई दी. इकोनॉमिक्स और पब्लिक पॉलिसी में उनका अनुभव भारत में सुधारों के रास्ते खोलेगा और विकसित भारत बनने की यात्रा को और मजबूत करेगा. पीएम मोदी ने लिखा कि मुझे विश्वास है कि उनकी कोशिशें हमारे देश के नीति निर्माण की प्रक्रिया को और बेहतर बनाएगी.प्रधानमंत्री ने अशोक कुमार लाहिड़ी को शुभकामनाएं भी दीं.
राजीव गौबा, के वी राजू, अभय करंदीकर और एम श्रीनिवास पूर्णकालिक सदस्य बने
पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में यह जानकारी भी दी है कि नीति आयोग भारत के नीति निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है और. उन्होंने लिखा कि नीति आयोग ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा दे रहा है. पीएम मोदी ने राजीव गौबा, प्रो केवी राजू , प्रो गोवर्धन दास, प्रो अभय करंदीकर और डॉ एम श्रीनिवास को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य बनने पर बधाई दी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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