कसाब को वकील दे सकते हैं, तो इन संदिग्ध आतंकवादियों को क्यों नहीं : ओवैसी
Author Prabhat khabar digital desk
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हैदराबाद : एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आज अपने उस फैसले का जोरदार बचाव किया जिसमें उन्होंने एनआईए द्वारा गिरफ्तार शहर के पांच युवकों को कानूनी सहायता मुहैया कराने की बात कही थी. उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. इन युवकों को कथित आईएसआईएस आतंकवादी मोड्यूल में शामिल होने के आरोप में […]
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हैदराबाद : एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आज अपने उस फैसले का जोरदार बचाव किया जिसमें उन्होंने एनआईए द्वारा गिरफ्तार शहर के पांच युवकों को कानूनी सहायता मुहैया कराने की बात कही थी. उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. इन युवकों को कथित आईएसआईएस आतंकवादी मोड्यूल में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार गिरफ्तार किया गया था.
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘अगर कानूनी सहायता मौलिक अधिकार है तो क्यों इन लोगों को परेशान होना चाहिए या वे इतनी परेशानी में क्यों हैं.” उन्होंने अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया, जिन्होंने उनके इस कदम की आलोचना की थी.
ओेवैसी ने कहा, ‘‘अगर हम एक देश के तौर पर पाकिस्तान के खूंखार आतंकवादी (अजमल कसाब) को वकील प्रदान कर सकते हैं, तो इन भारतीय नागरिकों को क्यों नहीं, जिनपर निश्चित तौर पर आरोप लगाया गया है, लेकिन अब एनआआईए को बिना किसी संदेह के इनकी संलिप्तता को साबित करना है. मैं यह नहीं जानता कि क्यों उन्हें (आलोचकों को) इतना दर्द हो रहा है, जब मैं मौलिक अधिकारों के बारे में बात कर रहा हूं. ” उन्होंने कहा, ‘‘क्यों इन दलीलों का इस्तेमाल उन वकीलों के खिलाफ नहीं किया जा रहा है जो असीमानंद (मक्का मस्जिद विस्फोट मामला), प्रज्ञा ठाकुर (मालेगांव विस्फोट मामला) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. क्या आप यह कहने का प्रयास कर रहे हैं कि (असीमानंद और प्रज्ञा का प्रतिनिधित्व) कर रहे वकील राष्ट्रवादी हैं.
और मैं जो कर रहा हूं वह राष्ट्रविरोधी है.” ओवैसी ने आरोप लगाया कि 2007 में मक्का मस्जिद विस्फोट के बाद 80 से अधिक मुस्लिम लडकों को पकडा गया, यातना दी गई और एक सप्ताह के लिए अवैध हिरासत में रखा गया। बाद में यह बात उभर कर सामने आई कि वे शामिल ही नहीं थे और तब तत्कालीन राज्य सरकार को उनमें से प्रत्येक को एक-एक लाख रपये का मुआवजा देने को मजबूर किया गया.
ओवैसी ने पूछा कि क्यों एनआईए ने असीमानंद की जमानत के खिलाफ अपील नहीं की, जबकि वह मामले में अब भी आरोपी हैं. उन्होंने जानना चाहा, ‘‘क्यों उसने (एनआईए) सुविधाजनक तरीके से 90 दिन की अवधि बीत जाने दी। क्यों कोई यह नहीं पूछ रहा है कि एनआईए ने साध्वी (प्रज्ञा ठाकुर) को क्लीन चिट दी, जबकि एनआईए अदालत ने बाद में उसे निरस्त कर दिया और एनआईए अदालत को कहना पडा कि प्रथम दृष्टया उन्हें मालेगांव (विस्फोट) की साजिश के लिए जवाब देना है और मोटरसाइकिल भी उनके नाम पर है. इसलिए, एनआईए ने क्यों आरोप मुक्त किया।” ओवैसी ने पिछले सप्ताह कहा था कि उनकी पार्टी कथित आईएसआईएस मोड्यूल में संलिप्त रहने के आरोप में गिरफ्तार पांच युवकों को कानूनी सहायता प्रदान करेगी, लेकिन साथ ही कहा था कि उनकी पार्टी आतंकवाद का समर्थन नहीं करती है.
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