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केरल में देरी से पहुंचने के बावजूद देश के विभिन्न क्षेत्रों में समय पर पहुंच सकता है मानसून

Updated at : 29 May 2016 12:25 PM (IST)
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केरल में देरी से पहुंचने के बावजूद देश के विभिन्न क्षेत्रों में समय पर पहुंच सकता है मानसून

नयी दिल्ली : पिछले दो सालों की कम बारिश की वजह से तंगहाल खेती को अच्छे मानसून के पूर्वानुमान से नई उर्जा मिलने के बाद केरल तट पर इसके कुछ देर से पहुंचने की खबर से किसानों में मायूसी छा गई. उनकी इस मायूसी को दूर करने का प्रयास करते हुए मौसम विभाग ने कहा […]

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नयी दिल्ली : पिछले दो सालों की कम बारिश की वजह से तंगहाल खेती को अच्छे मानसून के पूर्वानुमान से नई उर्जा मिलने के बाद केरल तट पर इसके कुछ देर से पहुंचने की खबर से किसानों में मायूसी छा गई. उनकी इस मायूसी को दूर करने का प्रयास करते हुए मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून के केरल तट पर देर से पहुंचने का अर्थ यह नहीं है कि यह देश के दूसरे हिस्सों में भी देर से पहुंचेगा, यह अन्य क्षेत्रों में समय पर भी पहुंच सकता है.

भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौर ने कहा, ‘‘ मानसून के कुछ दिन देर से आने का खेती किसानी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पडने की आशंका नहीं है. ” उन्होंने कहा कि विभाग मानसून का पूर्वानुमान केरल तट पर इसके आने के आधार पर व्यक्त करता है और केरल तट पर मानसून के आने में कुछ देरी का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया. लेकिन केरल तट पर मानसून के देर से आने का अर्थ यह नहीं कि मध्य महाराष्ट्र, मराठवाडा, विदर्भ जैसे क्षेत्रों में, जहां पानी की किल्लत है, भी मानसून देर से ही आए. ‘‘ ऐसा कोई नियम नहीं है. मानसून दूसरे क्षेत्रों में समय पर भी पहुंच सकता है .” यह पूछे जाने पर कि मौसम विभाग ने पूर्व में अच्छे मानसून का पूर्वानुमान व्यक्त किया है, इसमें क्या कुछ बदलाव आ सकता है, राठौर ने कहा कि अभी तक अच्छा मानसून ही होने के संकेत है और इस विषय पर एक जून को संशोधित अनुमान पेश किये जायेंगे.

बहारहाल, जल्द ही मौसम विभाग मानसून एवं मौसम के मिजाज का ‘डायनेमिक पूर्वानुमान’ व्यक्त करेगा और इसके आधार पर ब्लाक स्तर पर भी बताया जा सकेगा कि कितनी बारिश होगी. देश के करीब 70 प्रतिशत लोग खेती पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से निर्भर है. पर कई इलाकों में खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है और मानसून पर अत्यधिक निर्भरता है. ऐसे में मानसून के सटीक अनुमान से एक ओर बुआई समय पर करने में सहायता मिलती है तो दूसरी ओर सूखे या अतिवृष्टि से निपटने में भी मदद मिलती है.

मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मानसून मिशन के मौसम के पूर्वानुमानों से जुडे विभिन्न आयामों पर काम चल रहा है. जल्द ही मौसम विभाग मानसून का डायनेमिक पूर्वानुमान जारी करने की स्थिति में होगा. इससे पल पल बदलते मौसम के मिजाज के अनुरुप आंकडों का विश्लेषण करने और अनुमानों में संशोधन करने की गुंजाइश होगी. उन्होंने कहा कि इस बार अल नीनो का असर कम हो रहा है और मानसून की शुरुआत के साथ यह समाप्त हो जायेगा. मानसून पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पडने की आशंका नहीं है. उल्लेखनीय है कि अल नीनो उस प्रभाव को कहते हैं जो पूर्वी एवं मध्य प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में समुद्र क्षेत्र के तापमान में अत्यधिक शीतलन के कारण उत्पन्न होता है. पिछले दो वर्षो में मानसून की बेरुखी के कारण बारिश कम हुई थी.

2015-16 में बारिश सामान्य से 14 प्रतिशत कम हुई थी. इस वर्ष 26.4 करोड टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य था जबकि कुल पैदावार 25.22 करोड टन रहा. 2016..17 में 27.1 करोड टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया गया. 2014..15 में भी बारिश सामान्य से कम ही रही थी। हालांकि 2013-14 में अच्छी बारिश के कारण 26.5 करोड टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ था. मौसम की जानकारी देने वाली एक निजी एजेंसी स्काईनेट के अनुमान में भी कहा गया है कि इस साल अच्छी बारिश होगी. मध्य और पश्चिम भारत में इस बार अच्छी वर्षा होगी.

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