हेडली का खुलासा : बाला साहब ठाकरे को मारना चाहता था लश्कर, शिवसेना भवन था निशाने पर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Feb 2016 10:31 AM

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मुंबई : पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमन की गवाही का चौथा दिन है हेडली ने यहां आज भी कई बडे खुलासे किये हैं. कल गुरुवार की गवाही में इशरत जहां मामले में हेडली के खुलासे बाद सियासी पारा काफी चढ़ गया है. सतापक्ष विपक्ष से इस मामले में मांफी की मांग कर रही […]

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मुंबई : पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमन की गवाही का चौथा दिन है हेडली ने यहां आज भी कई बडे खुलासे किये हैं. कल गुरुवार की गवाही में इशरत जहां मामले में हेडली के खुलासे बाद सियासी पारा काफी चढ़ गया है. सतापक्ष विपक्ष से इस मामले में मांफी की मांग कर रही है, जबकि विपक्ष अभी भी मामले को फर्जी इनकाउंटर करार दे रहा है. आज चौथे दिन पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली ने एक विशेष अदालत को बताया कि लश्कर इस बात को लेकर नाखुश था कि 26/11 आतंकवादी हमलों के निशाने के तौर पर मुंबई हवाईअड्डे का चयन नहीं किया गया.हेडली ने अदालत को बताया कि वह शिवसेना के एक सदस्य के साथ निकट संबंध विकसित करना चाहता था क्योंकि उसे लगा था कि लश्कर की भविष्य में या तो शिवसेना भवन पर हमला करने या इसके प्रमुख बाला साहब ठाकरे की हत्या करने में रुचि होगी.

हेडली ने अदालत को बताया कि लश्कर ए तैयबा के नेता जकी उर रहमान लखवी ने इस बात पर जोर दिया कि 26/11 हमलों की निगरानी उचित तरीके से की जानी चाहिए क्‍योंकि यह ‘उन सभी बम विस्फोटों का बदला लेने का मौका है’ जो अतीत में पाकिस्तान में किये गये हैं. हेडली ने अदालत को बताया कि लश्कर ने चबाड हाउस का चयन इसलिए किया क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्थल था जहां यहूदी और इस्राइली लोग रह रहे थे.

हेडली ने बताया कि उसने 10 हमलावरों की पहचान छुपाने के लिए सिद्धिविनायक मंदिर से लाल और पीले रंग के पवित्र धागे खरीदे थे ताकि लोग उन्हें हिंदू ही समझें. हेडली ने अदालत को बताया कि उसने जुलाई 2008 में बीएआरसी की यात्रा की और उसकी वीडियोग्राफी की. हेडली ने बताया कि लश्कर के मेजर इकबाल ने उससे भविष्य में बीएआरसी के कुछ कर्मियों को भर्ती करने को कहा था जो आईएसआई के लिए काम करें. हेडली ने बताया कि उसने हमले के लिए सिद्धिविनायक मंदिर और नौसेना स्टेशन का चयन करने के लिए लश्कर को हतोत्साहित किया क्योंकि तब 10 हमलावरों को केवल उन्हीं लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना पडेगा.

तीसरे दिन का खुलासा, लश्कर-ए-तैयबा की आत्मघाती हमलावार थी इशरत जहां

डेविड हेडली ने आज मुंबई की एक विशेष अदालत को बताया कि 2004 में गुजरात में कथित फर्जी मुठभेड में मारी गई कॉलेज छात्रा इशरत जहां आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की सदस्य थी. अमेरिका से वीडियो-कांफ्रेंसिंग के जरिए दी गई गवाही में हेडली ने मुंबई के मुंब्रा इलाके की रहने वाली 19 साल की इशरत का नाम उस वक्त लिया जब विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने हेडली से उस ‘चौपट हो चुके अभियान’ के बारे में पूछा जिसका जिक्र लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी ने हेडली से किया था. हेडली ने अदालत को बताया कि लखवी ने उसे भारत में एक ‘चौपट हो चुके अभियान’ के बारे में बताया था. इस अभियान का संचालन लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य मुजम्मिल बट्ट कर रहा था और इसमें आतंकवादी संगठन की एक महिला सदस्य मारी गयी थी.

अभियान के बारे में विस्तार से पूछे जाने पर हेडली ने कहा, ‘लश्कर-ए-तैयबा में एक महिला शाखा थी जिसकी अगुवाई अबु आयमान की मां कर रही थी. जकी साहब (जकी-उर-रहमान) ने मुझे भारत में बट्ट के चौपट हो चुके अभियान के बारे में बताया था. यह पुलिस के साथ किसी मुठभेड की बात थी.’ हेडली ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि भारत के कौन से हिस्से में यह हुआ था. पर इस मुठभेड में एक महिला मारी गयी थी. मेरा मानना है कि वह एक भारतीय थी, पाकिस्तानी नहीं थी. लेकिन वह लश्कर-ए-तैयबा की सदस्य थी.’ आज की सुनवाई के बाद निकम ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि हेडली ने गवाही के दौरान कहा था कि उसने लखवी को बट से यह कहते हुए सुना था कि महिला फिदायीं बम हमलावर की वजह से गुजरात में ‘अभियान’ नाकाम हो गया.

बहरहाल, हेडली ने कहा था कि उसे किसी महिला फिदायीं बम हमलावर का नाम याद नहीं है. सरकारी वकील की ओर से फिदायीं बम हमलावरों के बारे में पूछे जाने पर हेडली ने अदालत को बताया, ‘मुझे लश्कर-ए-तैयबा में किसी महिला फिदायीं बम हमलावर के बारे में नहीं पता. मैं लश्कर-ए-तैयबा की किसी महिला फिदायीं बम हमलावर का नाम नहीं बता सकता.’

इशरत जहां की वकील वृंदा ने हेडली की गवाही पर उठाये सवाल

पत्रकारों से बातचीत में निकम ने कहा कि इसके बाद उन्होंने हेडली को तीन ‘महिला फिदायीं बम हमलावर’ के नाम गिनाए ताकि वह उनमें से चुन सके. उन्होंने कहा, ‘मैंने लश्कर-ए-तैयबा से जुडी तीन महिला फिदायीं बम हमलावरों – नूर जहां बेगम, इशरत जहां, मुमताज बेगम का नाम लिया. जब उसने तीनों नाम सुने तो उसने कहा कि उसने इशरत जहां का नाम सुना था और वह पुलिस मुठभेड में मारी गयी थी.’

इशरत के परिवार की वकील वृंदा ग्रोवर ने निकम के दावे पर सवाल उठाए. वृंदा ने कहा कि हेडली ने अपनी गवाही में कहा था कि उसने सिर्फ एक ‘चौपट कर दिये गये अभियान’ के बारे में सुना था और वह ‘किसी महिला फिदायीं बम हमलावर को नहीं जानता.‘इशरत के कोई आतंकी रिश्ते न होने पर जोर देते हुए वृंदा ने कहा कि निकम की ओर से ‘बहुविकल्पीय प्रश्न’ दिए जाने के बाद हेडली की ओर से बाद में दिए गए इस बयान को सबूत नहीं माना जा सकता कि उसने इशरत जहां का नाम सुना था.

वृंदा ने कहा, ‘यह सबूत नहीं है. यह सब मजाक है जिससे किसी साजिश का अंदाजा लग रहा है. इसमें राजनीति हो सकती है.’ उन्होंने कहा कि सरकारी वकील ने हेडली से कई ऐसे सवाल किए जिनका 26/11 मामले से कोई लेना-देना नहीं है. इशरत के परिवार के सदस्यों ने भी हेडली के दावों पर सवाल उठाए. इशरत के चाचा रउफ लाला ने कहा, ‘हेडली की गवाही से इशरत का नाम आतंकवादियों के साथ जोडने की कोशिशें की जा रही हैं.’

क्या है इशरत मुठभेड़ मामला

गौरतलब है कि 15 जून 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके में गुजरात पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड में इशरत जहां, जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लई, अमजदअली अकबरअली राणा और जीशान जोहा नाम के चार लोग मारे गए थे. मुठभेड के बाद अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा ने दावा किया था कि मुठभेड में मारे गये लोग लश्कर के आतंकवादी थे और वे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की मंशा से गुजरात आये थे.

पक्ष-विपक्ष में तनातनी

इशरत जहां को लेकर हेडली के दावों के बाद नयी दिल्ली में भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा. भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि वह ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर उसके (इशरत) मारे जाने के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी को निशाना बनाए जाने’ पर माफी मांगे. भाजपा ने आरोप लगाया कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी के खिलाफ अपनी ‘नफरत की राजनीति’ के तहत कांग्रेस ने मुठभेड का राजनीतिकरण कर दिया था. पार्टी ने कहा कि यदि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी में कोई ‘शर्म’ बची है तो उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए.

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकवादियों से मुकाबला करने वाले पुलिसकर्मियों को जेल में डाल दिया था और सीबीआई एवं खुफिया ब्यूरो जैसी सुरक्षा एजेंसियों का राजनीतिकरण कर दिया गया था. शर्मा ने कहा कि यह मोदी को ‘बदनाम करने और ठिकाने लगाने’ के लिए किया गया था और यह सब एक ‘राजनीतिक साजिश’ का हिस्सा था. भाजपा की इस मांग को खारिज करते हुए कांग्रेस ने कहा कि ‘बुनियादी सवाल’ यह है कि क्या इशरत और उसके साथी ‘फर्जी’ मुठभेड में मारे गये थे.

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने पत्रकारों से कहा, ‘यदि भाजपा ऐसे लोगों के साथ खडा होना चाहती है जिन्हें गुजरात उच्च न्यायालय की निगरानी में चली सीबीआई जांच में फर्जी मुठभेड में शामिल होने का आरोपी बनाया गया है. तो वे अदालत में जाकर उनका साथ दे सकते हैं.’ तिवारी ने कहा, ‘भाजपा को ऐसा करने से किसी ने नहीं रोका है. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस, वामपंथी दलों और अन्य विपक्षी पार्टियों से पूछा कि क्या वे 2004 में गुजरात में एक मुठभेड में इशरत जहां के मारे जाने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपने ‘दुर्भावनापूर्ण प्रचार’ के लिए राष्ट्र से माफी मांगने को तैयार हैं.

राजनाथ ने यहां एक बडी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तानी अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली ने आज अपनी गवाही में साफ स्वीकार किया कि इशरत जहां के लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध थे. उन्होंने कहा, ‘आपने सुना होगा कि हेडली ने अपनी गवाही में क्या कहा. इशरत जहां का नाम लेकर हमारी पार्टी के नेताओं के खिलाफ कई आरोप लगाये गये. मामले में हेडली ने साफ कहा कि उसके लश्कर के साथ संबंध थे.’ राजनाथ ने कहा, ‘मैं इस मुद्दे पर लगातार दुर्भावना पूर्ण अभियान चलाकर लोगों को गुमराह करने वाले कांग्रेस, कम्युनिस्टों तथा अन्य दलों से पूछना चाहता हूं कि क्या वे देश की जनता से माफी मांगने के लिए तैयार हैं.’

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