प्रधानमंत्री ने मन की बात में किया सुभाष चंद्र बोस का जिक्र

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Sep 2015 7:57 AM

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नयी दिल्ली : विपक्ष के रोक की मांग के बावजूद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता के साथ ‘मन की बात’ शुरू की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,मन की बात’ के लिए मैं लोगों से सुझाव माँगता था और लाखों की तादाद में लोग सक्रिय हो करके मुझे सुझाव देते रहते थे. ‘मन की […]

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नयी दिल्ली : विपक्ष के रोक की मांग के बावजूद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता के साथ ‘मन की बात’ शुरू की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,मन की बात’ के लिए मैं लोगों से सुझाव माँगता था और लाखों की तादाद में लोग सक्रिय हो करके मुझे सुझाव देते रहते थे. ‘मन की बात’ ने मुझे जो सिखाया, समझाया उससे मैं कह सकता हूँ कि हम सोचते हैं, उससे भी ज्यादा जन-शक्ति अपरम्पार होती है.

मैं आकाशवाणी का भी अभिनन्दन करता हूँ कि उन्होंने इन सुझावों को सिर्फ एक कागज़ नहीं माना, एक जन-सामान्य की आकांक्षा माना . आकाशवाणी ने इसके बाद कार्यक्रम किये . सरकार के भिन्न-भिन्न विभागों को आकाशवाणी में बुलाया और जनता की बातें उनके सामने रखीं . सरकार के भिन्न-भिन्न विभागों ने इन पत्रों का एनालिसिस किया। ‘मन की बात’ ये जानकारियों का स्रोत, बन जाएगा, ये कहाँ सोचा था किसी ने. ‘मन की बात’ ने समाज- शक्ति की अभिव्यक्ति का एक अवसर बना दिया . जब कोई #selfie with daughter करता था, तब अपनी बेटी का तो हौसला बुलंद करता था, लेकिन अपने भीतर भी एक कमिटमेंट पैदा करता था .

पिछली गाँधी जयंती को मैंने प्रार्थना की थी #KhadiforNation. और लोगों को मैंने आग्रह किया था कि आप खादी खरीदिये #KhadiForFashion. पिछले एक वर्ष में खादी की बिक्री डबल हुई है Iअब ये कोई सरकारी एडवरटाईज़मेंट से नहीं हुआ है I जन-शक्ति का एक एहसास, , एक अनुभूति .

ये अमीर लोग नहीं हैं .एक रिटायर्ड टीचर, विधवा महिला, वो क़तार में खड़ी थी सब्सिडी छोड़ने के लिए क्या ये साइलेंट रिवोल्यूशन नहीं है. सरकारों को भी सबक सीखना होगा कि हमारी सरकारी चौखट में जो काम होता है,उस के बाद एक बहुत बड़ी जन-शक्ति का एक सामर्थ्यवान, ऊर्जावान समाज है.

मैंने देश के नागरिकों से प्रार्थना की थी कि आप टेलीफोन करके अपने सवाल, अपने सुझाव दर्ज करवाइए, मैं ‘मन की बात’ में उस पर ध्यान दूँगा . मुझे ख़ुशी है कि देश में से करीब 55,000 से ज़्यादा फ़ोन कॉल्स आये . सियाचिन से लेकर कन्याकुमारी तक. ये अपने-आप में एक सुखद अनुभव है . सभी उम्र के लोगों ने सन्देश दिए हैं .

कुछ तो सन्देश मैंने खुद ने सुनना भी पसंद किया, मुझे अच्छा लगा .आपका सन्देश बहुत महत्वपूर्ण है . पूरी सरकार आपके सुझावों पर ज़रूर काम करेगी.देश का सामान्य नागरिक सकारात्मक सोच ले करके चल रहा है, ये कितनी बड़ी पूंजी है देश की . अलवर के पवन आचार्य ने दिवाली पर मिट्टी के दियों का प्रयोग करने का अनुरोध किया, इससे पर्यावरण को लाभ होगा, कुम्हार भाइयों को रोज़गार मिलेगा.दिल्ली में इंडिया गेट के पास ‘शौर्यांजलि’ प्रदर्शनी ने 1965 के युद्ध का पूरा इतिहास ज़िंदा कर दिया. प्रदर्शनी के हाजीपीर पास के जीत के दृश्यों को देखें तो रोमांच होता है और अपने सेना के जवानों के प्रति गर्व होता है.अगर आप इतिहास बनाना चाहते हैं, तो इतिहास की बारीकियों को जानना-समझना ज़रूरी होता है.

इतिहास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है . इतिहास से अगर नाता छूट जाता है, तो इतिहास बनाने की संभावनाओं को भी पूर्ण विराम लग जाता है. अगर आप दिल्ली के आस-पास हैं, दिल्ली में इंडिया गेट के पास ‘शौर्यांजलि’ प्रदर्शनी आप ज़रूर देखें.एक छोटे बच्चे ने देश में हर जगह, हर गली में डस्टबिन लगाने का सुझाव दिया हैं.

हमें स्वच्छता एक स्वभाव भी बनाना चाहिये और स्वच्छता के लिए व्यवस्थायें भी बनानी चाहियें. मुझे भी बहुत-कुछ सुनना पड़ता है कि मोदी जी बड़ी-बड़ी बातें करते थे स्वच्छता की, लेकिन क्या हुआ ? मैं इसे बुरा नहीं मानता हूँ. स्वच्छता की तरफ एक जागरूकता आयी है – ये सरकारों को भी काम करने के लिए मजबूर करेगी. स्वच्छता आन्दोलन को हमें आगे बढ़ाना है, कमियों के रहते हुए भी आगे बढ़ाना है. 2019 में जब महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती हम मनायेंगे, महात्मा गांधी के सपनों को पूरा करने की दिशा में हम काम करें.

प्रदर्शनी के हाजीपीर पास के जीत के दृश्यों को देखें तो रोमांच होता है और अपने सेना के जवानों के प्रति गर्व होता हैगांधी के लिए आजादी से भी ज्यादा स्वच्छता का महत्त्व था.हम सब महात्मा गांधी की बात को मानें और उनकी इच्छा को पूरी करने के लिए कुछ कदम हम भी चलें. 2 अक्टूबर से लेकर के एक महीने भर खादी में रियायत होती है, उसका फायदा उठाया जाए, और खादी के साथ-साथ हैंडलूम को भी उतना ही महत्व दिया जाये. इस दीवाली में हम खादी को ज़रुर अपने घर में जगह दें. मुझे कन्फर्मेशन मिला कि 50 से अधिक सुभाष बाबू के परिवारजन प्रधानमंत्री निवास-स्थान पर आने वाले हैं . मेरे लिए बड़ी खुशी का पल होगा. शायद नेताजी के परिवारजनो को जीवन में पहली बार एक साथ प्रधानमंत्री निवास जाने का अवसर आया होगा. मैं उनके स्वागत के लिए बहुत खुश हूँ,

भार्गवी कानड़े: मैं प्रधानमंत्री जी से ये निवेदन करना चाहती हूँ कि आप युवा पीढ़ी को वोटर्स रजिस्ट्रेशन के बारे में जागृत करें. भार्गवी की बात सही है . लोकतंत्र में हर मतदाता देश का भाग्यविधाता होता है और ये जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है . आज हमारा इलेक्शन कमीशन सिर्फ़ रेगुलेटर नहीं रहा है, फैसिलिटेटर बन गया है, वोटर-फ्रेंडली बन गया है . ये बहुत अच्छा बदलाव आया है. मतदान का परसेंटेज और जागरूकता बढ़ने के लिए मैं चुनाव आयोग को विशेष रूप से बधाई देना चाहता हूँ . लेकिन सिर्फ़ चुनाव आयोग काम करता रहे, इससे चलने वाला नहीं है .मतदाता सूची अपग्रेड होती रहनी चाहिये, हमें भी देखते रहना चाहिये . मैं आशा करता हूँ, देश के नौजवान अगर मतदाता सूची में रजिस्टर नहीं हुए हैं, तो उन्हें होना चाहिये और मतदान भी अवश्य करना चाहिये . मैं तो चुनावों के दिनों में पब्लिकली कहा करता हूँ कि पहले मतदान, फिर जलपान . इतना पवित्र काम है, हर किसी ने करना चाहिये .

परसों मैं काशी का भ्रमण करके आया . बहुत लोगों से मिला… लेकिन दो बालक, जिनकी बात मैं आपसे करना चाहता हूँ . एक मुझे क्षितिज पाण्डेय करके 7वीं कक्षा का छात्र मिला . उसका कांफिडेंस लेवल भी बड़ा गज़ब है. मैं चाहता हूँ कि हमारे देश के बालकों की विज्ञान के प्रति रुचि बढ़नी चाहिये .बालक के मन में लगातार सवाल उठने चाहिये – क्यों ? कैसे ? कब ? वैसे ही मुझे सोनम पटेल, 9 साल की छोटी बालिका मिली. बहुत ही गरीब परिवार की बेटी है . और मैं हैरान था कि बच्ची, पूरी गीता उसको कंठस्थ है. जब मैंने उसको पूछा, तो वो श्लोक भी बताती थी, अंग्रेजी में इन्टरप्रेटेशन करती थी, उसकी हिन्दी में परिभाषा करती थी.

संदीप, हरियाणा से : सर, मैं चाहता हूँ कि आप ‘मन की बात’ आपको वीकली करनी चाहिए, क्योंकि आपकी बात से बहुत प्रेरणा मिलती है .” संदीप जी, महीने में एक बार करने के लिए भी मुझे इतनी मशक्कत करनी पड़ती है. लेकिन मैं आपकी भावना का आदर करता हूँ . आप जानते हैं, सुभाष बाबू रेडियो का कितना उपयोग करते थे ? जर्मनी से उन्होंने अपना रेडियो शुरू किया था . हिन्दुस्तान के नागरिकों को आज़ादी के आन्दोलन के सम्बन्ध में सुभाष बाबू लगातार रेडियो के माध्यम से बताते रहते थे. आज़ाद हिन्द रेडियो की शुरुआत एक वीकली न्यूज़ बुलेटिन से नेताजी ने की थी. मन की बात’ करते-करते अब एक साल हो गया है . मेरे मन की बात आपके कारण सच्चे अर्थ में आपके मन की बात बन गयी है. अगले महीने ‘मन की बात’ के लिए फिर से मिलेंगे . आपके सुझावों से सरकार को भी लाभ होता है . आपका योगदान मेरे लिए बहुमूल्य है, अनमोल है . फिर एक बार आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनायें. धन्यवाद .

यह बारहवीं बार है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम के द्वारा देश की जनता के साथ रु-ब-रु हो रहे हैं. आपको बता दें कि बिहार चुनावों के ऐलान के बाद कांग्रेस, जेडीयू ने पीएम की मन की बात कार्यक्रम पर चुनाव आयोग से रोक लगाने की मांग की थी जिसे आयोग ने खारिज कर दिया.

वहीं आज प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को चुनाव आयोग की मंजूरी मिलने के एक दिन बाद कांग्रेस ने इस बात पर हैरत जताई कि सरकार की ओर से मांगे गए एक स्पष्टीकरण के आधार यह इजाजत दी गई. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) में विधि प्रकोष्ठ के प्रभारी सचिव के सी मित्तल ने यहां कहा कि हमें यह जानकर हैरत हुई कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से 15 सितंबर को किए गए किसी अनुरोध के आधार पर चुनाव आयोग ने ‘मन की बात’ को इजाजत दी है.’ मित्तल ने कहा कि हमारे प्रतिनिधिमंडल ने 16 सितंबर को दोपहर 2:40 बजे आयोग से मुलाकात की और करीब 3:00 बजे तक चर्चा हुई. लेकिन न तो आयोग ने और न ही किसी अन्य ने आयोग द्वारा प्राप्त किसी अनुरोध के बारे में बताया, जिसका साफ मतलब है कि उस वक्त तक कोई अनुरोध नहीं किया गया था और यदि यह प्राप्त किया गया था तो प्रतिनिधिमंडल को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई.

उन्होंने कहा कि मीडिया को इन घटनाक्रमों के बारे में पता था लेकिन किसी भी चैनल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से चुनाव आयोग को भेजे गए किसी अनुरोध की खबर नहीं दी. मित्तल ने कहा कि उन्होंने 15 सितंबर को महागठबंधन के प्रतिनिधियों की चुनाव आयोग से मुलाकात के लिए वक्त मांगा था लेकिन बात नहीं बन सकी थी. बैठक की तारीख 16 सितंबर तय की गई लेकिन उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के किसी संवाद के बारे में नहीं बताया गया. मित्तल ने कहा, ‘‘यह बहुत गंभीर मामला है. यह भी गौर करने वाली बात है कि ‘मन की बात’ पहले से चालू कोई कल्याणकारी योजना नहीं बल्कि महज एक भाषण है. यह पूरा मामला कामकाज पर सवाल उठाता है और माननीय चुनाव आयोग की ओर से इसकी गहन जांच की जरुरत है ताकि इस पर विश्वास एवं इसकी संवैधानिक स्वतंत्रता बरकरार रहे.’

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