शीना बोरा मर्डर मिस्‍ट्री : सरकार ने सीबीआई को सौंपी जांच की जिम्‍मेदारी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Sep 2015 6:24 PM

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मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने आज अचानक शीना बोरा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लेने की घोषणा की. कुछ दिन पहले मामले की जांच में मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त राकेश मारिया की निगरानी की भूमिका को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गयी थी जिनका अचानक से जांच के बीच में तबादला कर […]

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मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने आज अचानक शीना बोरा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लेने की घोषणा की. कुछ दिन पहले मामले की जांच में मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त राकेश मारिया की निगरानी की भूमिका को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गयी थी जिनका अचानक से जांच के बीच में तबादला कर दिया गया.

पूर्वाग्रहों से मुक्त जांच के लिहाज से सरकार के इस फैसले को मुंबई के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी घोषणा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के पी बख्शी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में की. उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी को मामले की तफ्तीश सौंपने में मामले के आर्थिक कोणों को भी संज्ञान में लिया गया है.

उन्होंने कहा कि सरकार मारिया के स्थानांतरण को मामले की जांच से जोड़ने वाली मीडिया की खबरों से भी परेशान थी. बख्शी ने कहा कि सरकार लोगों को भरोसा दिलाना चाहती है कि उसकी मामले में हस्तक्षेप करने में कोई रचि नहीं है. दूसरी तरफ वह पूर्वाग्रहों से मुक्त जांच भी चाहती है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से परामर्श करने के बाद यह फैसला किया गया.

बख्शी ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों में मुंबई के पिछले पुलिस आयुक्त (मारिया) को पदोन्नत कर स्थानांतरित कर दिया गया और एक नये अधिकारी (अहमद जावेद) को कमान सौंपी गयी. इन सबके साथ शीना बोरा मामले में जांच चल रही थी. मीडिया के एक वर्ग ने इन सारी चीजों को एक साथ रखकर यह राय पेश की कि तबादले मामले की वजह से हुए हैं.”

बख्शी ने कहा, ‘‘सरकार इस मामले को तबादलों से जोड़ने वाली खबरों से परेशान थी. मुख्यमंत्री जापान में थे और उस समय हम नागपुर में राष्ट्रपति के कार्यक्रम तथा सीसीटीएनएस प्रणाली के उद्घाटन में व्यस्त थे. इसलिए मुझे मामले में मुख्यमंत्री से बात करने का पर्याप्त समय नहीं मिला. लेकिन अब मैंने मुख्यमंत्री से विस्तार से बात की है. यह दिखाने के लिए कि मामले में हस्तक्षेप करने का हमारा कोई इरादा नहीं है, हमने मामले की जांच सीबीआई को देने का फैसला किया है.” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कुछ दिन पहले पुलिस महानिदेशक से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी और रिपोर्ट की विषयवस्तु के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया कि मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक मामलों पर भी अनेक सवाल अनुत्तरित हैं.

बख्शी ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सच सामने आये और इसलिए मैंने केंद्र सरकार के अधिकारियों तथा सीबीआई से बात की और फिर मामला उन्हें सौंप दिया. अब हमारे अनुरोध को स्वीकार करना और सीबीआई को मामले की जांच संभालने का निर्देश देना केंद्र सरकार के हाथ में है.” उन्होंने कहा कि सरकार हरसंभव तरीकों से सीबीआई की मदद करने के लिए तैयार है. शीना की 24 अप्रैल, 2012 को हत्या कर दी गयी थी और उसके शव को जलाकर अगले दिन रायगढ जिले के एक जंगल में फेंक दिया गया था.

मामले में शीना की मां इंद्राणी के अलावा, इंद्राणी के पूर्व पति संजीव खन्ना और कार चालक श्यामवर राय को गिरफ्तार किया गया था और वे न्यायिक हिरासत में हैं. पुलिस ने उनसे 14 दिन तक पूछताछ की थी. बख्शी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार शीना बोरा मामले को ‘हाई प्रोफाइल’ हत्याकांड के तौर पर नहीं देखती. इस तरह की कोई बात नहीं है. हत्या केवल हत्या है.डीजीपी संजीव दयाल की स्टेटस रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस जांच लगभग पूरी कर चुकी है और चूंकि सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, इसलिए उनसे आगे कोई पूछताछ मुमकिन नहीं होगी.

इंद्राणी ने कहा, ‘‘फिलहाल हमें नहीं लगता कि किसी नई गिरफ्तारी की जरुरत है. सीबीआई अब गहराई में जाएगी और आर्थिक कोण के साथ-साथ बिखरी हुई कडियों की तफ्तीश करेगी. अगर एजेंसी को लगता है कि प्रारंभिक जांच पर और लोगों से पूछताछ की जरुरत है तो वे जिसे जरुरी समझेंगे तलब करेंगे.” बख्शी के मुताबिक डीजीपी की रिपोर्ट में शीना बोरा हत्याकांड के किसी जांच अधिकारी द्वारा गड़बड़ी की बात नहीं कही गयी है और मुंबई के पिछले तथा वर्तमान पुलिस आयुक्त से बात करने के बाद ही यह फैसला किया गया है.

रायगढ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के 2012 में कथित तौर पर मामले को बिगाड देने में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर बख्शी ने कहा, ‘‘हो सकता है कि अधिकारी शामिल रहे हों, लेकिन पुलिस महानिदेशक इस बारे में भी पडताल कर रहे हैं. जब वह अपनी रिपोर्ट देंगे तो हम निश्चित रुप से कुछ कह पाएंगे कि कोई निहित स्वार्थ थे या नहीं.” कांग्रेस समेत राजनीतिक दलों ने सावधानी बरतते हुए इस घटनाक्रम पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की. हालांकि उन्होंने फैसले पर हैरानी जताई.

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