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जब तक मुख्यमंत्री आकर हमारा ज्ञापन स्वीकार नहीं करतीं, हम भूख हड़ताल करेंगे : हार्दिक पटेल

Updated at : 25 Aug 2015 10:27 AM (IST)
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जब तक मुख्यमंत्री आकर हमारा ज्ञापन स्वीकार नहीं करतीं, हम भूख हड़ताल करेंगे : हार्दिक पटेल

अहमदाबाद : आरक्षण की मांग को लेकर आयोजित विशाल रैली के बाद पत्रकारों से बाद करते हुए हार्दिक पटेल ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री आकर हमारा ज्ञापन स्वीकार नहीं करतीं हैं, तब तक हम भूख हड़ताल करेंगे. अपने ओबीसी कोटा की मांग को लेकर आज पटेल समुदाय के लोगों की विशाल जनसभा का आयोजन […]

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अहमदाबाद : आरक्षण की मांग को लेकर आयोजित विशाल रैली के बाद पत्रकारों से बाद करते हुए हार्दिक पटेल ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री आकर हमारा ज्ञापन स्वीकार नहीं करतीं हैं, तब तक हम भूख हड़ताल करेंगे.

अपने ओबीसी कोटा की मांग को लेकर आज पटेल समुदाय के लोगों की विशाल जनसभा का आयोजन किया है जिसमें शामिल होने हजारों की संख्‍या में लोग सुबह से ही जुटने लगे हैं. इस जनसभा का आयोजन अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में किया गया है. इस विशाल जनसभा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गये हैं.इस रैली में आंदोलन के कन्वेनर हार्दिक पटेल ने भाजपा को मांगे मानने की चेतावनी दी जबकि नीतीश कुमार को अपना बताया.

इस जनसभा को संबोधित करते हुए आंदोलन के कन्वेनर हार्दिक पटेल ने कहा कि पटेल समाज को हक और न्याय मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में 27 करोड़ हैं. कुछ लोगों ने कहा गुजरात में तुम्हारा पोल पावर बहुत है. उन्होंने गुजरात में तो देख लिया बिहार में नहीं देखा क्या? नीतीश कुमार हमारा है.आंध्रप्रदेश नहीं देखा चंद्रबाबू नायडू हमारा है.सरकार ने यदि हमारी मांगे नहीं मानी तो हम सरकार को उखाड़ फेकेंगे. हम सरदार के वंशज हैं. हम जहां निकलते हैं क्रांति शुरू हो जाती है. यदि हमे न्याय नहीं मिला तो हम छिनना भी जानते हैं.

हार्दिक पटेल ने कहा जिस स्तर का अरविंद केजरीवाल ने किया है हम भी कुछ ऐसा ही करेंगे. अब कोई रावण लंका में नहीं बचेगा.हमारी मांग 100 मीटर की दौड़ नहीं मैराथन है. जवान किसान और मजदूर से देश चलता है. यदि हमारी मांगे नहीं मानी गयी तो 2017 में हम कमल नहीं खिलने देंगे. हम खुद हैं हमें किसी की जरुरत नहीं है. अब किसान ने आत्म हत्या की तो पूरे देश में आक्रोश होगा. हमारी मांगे मानी जाये तब होगा सबका साथ सबका विकास. पिछले 10 साल में गुजरात में 6 हजार किसानों ने आत्महत्या की. सरदार प‍हले पीएम होते तो हम बाहर नहीं निकलते.ये केवल सरदार पटेल की प्रतिमा लगा रहे हैं. पहले अंदर झांक ले कि मन में पटेल है या नहीं.सरदार के संस्कार आज भी हमारे अंदर है.

उन्होंने कहा कि कुछ लोग आंदोलन को दबाने की कोशिश में हैं. हम उन्हें बता दें कि हम किसी पार्टी विशेष के नहीं हैं. हम पार्टी नहीं पटीदार हैं. हम उन्हें बता दें कि देश युवा है और युवाओं को उनका हक मिलना चाहिए. आतंकवादियों के लिए रात में सुप्रीम कोर्ट खुल सकती है तो हमें न्याय भी मिल सकता है. पटेल हित की बात करने वाला ही यहां टिक सकता है. जब हमारे हक की बात आती है तो लोग मुंह मोड़ लेते हैं. हमने नेताओं को अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए चुना है. हम 50 लाख पटेल यहां हैं.

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