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अक्षय सिंह की मौत स्वाभाविक नहीं, व्यापमं गिरोह में की हत्या: भूरिया

Updated at : 05 Jul 2015 10:59 PM (IST)
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अक्षय सिंह की मौत स्वाभाविक नहीं, व्यापमं गिरोह में की हत्या: भूरिया

झाबुआ (मप्र) : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग करते हुए दावा किया है कि टीवी के खोजी पत्रकार अक्षय सिंह की मौत स्वाभाविक नहीं थी और व्यापमं घोटाले में शामिल गिरोह ने उसकी […]

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झाबुआ (मप्र) : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग करते हुए दावा किया है कि टीवी के खोजी पत्रकार अक्षय सिंह की मौत स्वाभाविक नहीं थी और व्यापमं घोटाले में शामिल गिरोह ने उसकी हत्या की है.

रतलाम-झाबुआ लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद भूरिया ने रविवार को यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अक्षय सिंह (38) की मौत कोई स्वाभाविक मृत्यु नहीं थी. उसे व्यापमं घोटाले से संबंधित गिरोह ने मारा है. इस गिरोह ने कुछ ऐसा किया, जिससे अक्षय सिंह की मृत्यु हो गई। इसलिए इस समूचे प्रकरण की सीबीआई जांच होना चाहिए.’’ गौरतलब है कि सिंह की कल जिले के मेघनगर में अचानक मौत हो गई थी. उस समय वह व्यापमं घोटाले में नाम आने के बाद एक छात्र नम्रता डामोर के माता-पिता का इंटरव्यू करने के बाद किन्हीं संबंधित दस्तावेजों की फोटोकॉपी की अपने दो सहयोगियों सहित प्रतीक्षा कर रहे थे, जिसका शव बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में उज्जैन में रेलवे पटरियों के निकट पाया गया था.

अचानक सिंह ने बेचैनी की शिकायत की और उनके मुंह से झाग आने लगा. उन्हें तत्काल मेघनगर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें झाबुआ के एक निजी अस्पताल लाया गया, लेकिन वहां भी चिकित्सकों के प्रयास विफल रहे. उनके सहयोगी उन्हें (सिंह) निकटवर्ती गुजरात के दाहोद स्थित अस्पताल ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. नम्रता डामोर का शव 7 जनवरी 2012 को उज्जैन में रेलवे पटरियों के निकट संदिग्ध अवस्था में पाया गया था. टीवी पत्रकार अक्षय सिंह की मौत पर सवाल उठाते हुए भूरिया ने कहा कि उन्हें झाबुआ जिला अस्पताल में लाने की बजाए गुजरात के दाहोद के अस्पताल में क्यों ले जाया गया था.

उन्होंने कहा कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन डीन डॉ. डीके साकल्ले एवं वर्तमान डीन डॉ. अरुण शर्मा की व्यापमं घोटाले की कतिपय रिपोर्ट एसटीएफ को देने के बाद हुई संदिग्ध मौतों को लेकर कहा कि इस प्रकरण के गवाह एवं जांचकर्ता मर रहे हैं और राज्य सरकार इन मौतों से जुडे लोगों को बचाने में जुटी है. भूरिया ने आरोप लगाया कि व्यापमं घोटाले से जुडा गिरोह अपने आपको बचाने के लिए लोगों को मार रहा है और राज्य सरकार उसे (गिरोह) बचा रही है.

घोटाले की सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए उन्होंने कहा कि इसकी जांच कर रही मध्यप्रदेश पुलिस की एसटीएफ कभी सरकार के खिलाफ नहीं जाएगी, इसलिए उन्हें (भूरिया) इस जांच पर भरोसा नहीं है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि घोटाले की सच्चाई सामने लाने और सभी दोषियों को कानून के शिकंजे में कसने के लिए इसकी सीबीआई जांच ही होना चाहिए और चूंकि राज्य सरकार इससे इसलिए बचना चाहती है, क्योंकि वह उसमें संलिप्त है. उन्होंने दावा किया कि उन्हें आशंका है कि व्यापमं घोटाले में अभी मौतों का सिलसिला थमने वाला नहीं है. उन्होंने सिंह एवं जबलपुर मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. शर्मा की मौत पर संवदेना भी व्यक्त की है. डॉ. शर्मा आज दिल्ली की एक होटल के अपने कमरे में मरे हुए पाए गए थे.

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