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व्यापम घोटाला बना मौत का घोटाला, अबतक घोटाले से जुड़े 42 लोगों की मौत, कांग्रेस-भाजपा में जुबानी जंग

Updated at : 29 Jun 2015 12:15 PM (IST)
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व्यापम घोटाला बना मौत का घोटाला, अबतक घोटाले से जुड़े 42 लोगों की मौत,  कांग्रेस-भाजपा में जुबानी जंग

इंदौर : मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान पर व्यापम घोटाला एक दाग की तरह है. इस घोटाले का दाग अब और भी गहरा होता जा रहा है. व्यापम घोटाले से किसी न किसी स्तर पर जुड़े 24 लोगों की मौत अबतक हो चुकी है. पिछले 24 घंटों में अबतक 2 लोगों की जान जा चुकी […]

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इंदौर : मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान पर व्यापम घोटाला एक दाग की तरह है. इस घोटाले का दाग अब और भी गहरा होता जा रहा है. व्यापम घोटाले से किसी न किसी स्तर पर जुड़े 24 लोगों की मौत अबतक हो चुकी है. पिछले 24 घंटों में अबतक 2 लोगों की जान जा चुकी है. इन लोगों की मौत अलग- अलग तरीके से हुई, किसी ने आत्महत्या कर ली, किसी की मौत बीमारी से हुई, तो किसी की हत्या कर दी गयी. इतनी बड़ी संख्या में एक घोटाले से जुड़े लोगों की मौत के बाद अब नये सवाल खड़े हो रहे हैं. इस मामले में लगभग 2530 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 1980 लोगों को अबतक गिरफ्तार किया जा चुका है.

कांग्रेस कर रही है निष्पक्ष जांच की मांग
व्यापम घोटाले से जुड़े लोगों की एक के बाद एक हो रही मौत को लेकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच करने की मांग की है. दिग्विजय ने कहा, इसमें ऐसे लोगों को शामिल करना चाहिए जो लोग निष्पक्ष होकर इस पूरे मामले की जांच कर सके. उन पर किसी का दबाव नहीं होना चाहिए. कांग्रेस ने व्यापम घोटाले को लेकर कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शिवराज सिंह चौहान पर गंभीर आरोप लगाये हैं. शिवराज सिंह की पत्नी भी इन आरोपों के घेरे में आयी, लेकिन शिवराज सिंह इसे विपक्ष का निराधार आरोप बताते रहे हैं.दिग्विजयने कहा, शासन और प्रशासन इसे पूरी तरह से दबाने में लगा है. हमें एसआईटी पर भी भरोसा नहीं है. उन्होंने( एसआईटी ने) अपनी असमर्थता व्यक्त की है कि उनके पास इस पूरे मामले की जांच के लिए उचित अधिकार नहीं है.
क्या कहती है सरकार
मध्यप्रदेश सरकार के गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि व्यापाम घोटाले से जुड़े लोग अगर मर रहे हैं तो उसमें सरकार क्या कर सकती है. मौत पर ना राजा न फकीर, किसी का नियंत्रण नहीं होता. यह तो प्रकृति का नियम है कोई आया है तो आयेगा. इसे किसी से जोड़कर नहीं देख सकते. व्यक्ति बीमार होता है तो उसका ईलाज कराया जाता है. अगर किसी की मौत संदिग्ध परिस्थिति में होती है तो उसकी जांच की जायेगी. इस पूरे मामले की जांच ठीक से हो रही है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग को ठुकरा दिया है. अगर कोर्ट इजाजत दे तो उससे भी जांच हो जाए. ज्यादातर मौत स्वभाविक है. भाजपा नेता उमाशंकर गुप्ता ने भी कहा, कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वह इसे तुल दे रही है. इस पर अफवाह नहीं फैलाने चाहिए.
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क्या कहते हैं मृतकों के परिजन
एसआईटी ने हाल में ही अदालत में 42 लोगों की सूची दी जो इस मामले से जुड़े थे जिनकी अचानक मौत हो गयी. इस पूरे घोटाले में मारे गये लोगों में सबसे बड़ा नाम मध्यप्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव के बटे शैलेश का था. जिसकी मौत पर खूब हंगामा हुआ था, हालांकि बाद में यह बात सामने आयी की शैलेश दिमागी रूप से परेशान था. शैलेश पर 10 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए करोडों रूपये लेने का आरोप था.
हालांकि इस मौत पर कई लोगों का कहना था कि व्यापम घोटाले के बाद उस पर इतना दबाव था कि उसकी दिमागी हालत खराब हो गयी जो उसकी मौत का कारण बनी. इसके अलावा इस मामले से जुड़े कई लोगों की अचानक मौत हुई जिनमें नरेंद्र तोमर का भी नाम शामिल है. नरेंद्र के भाई विक्रम ने आरोप लगाया कि उनके भाई के साथ जेल में ही पहेल मारपीट की गयी उसके बाद उसे साजिश के तहत उसकी हत्या कर दी गयी.
इसके अलावा 30 वर्षीय पशु चिकित्सक की शनिवार को जेल में हुई मौत पर भी परिजन सवाल खड़े कर रहे हैं कि उसके साथ जेल में मारपीट हुई है. व्यापम घोटाला का खुलासा करने वाले व्यक्ति ने भी आशंका जतायी की ये हत्या इस घोटाले को दबाने के उद्देश्य से की जा रही है. अचानक इस तरह से हो रही मौत इस पूरे मामले में नये सवाल खड़े करर रही है.
क्या है व्यापमघोटाला
व्यापम (मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मण्डल) भरती में नेताओं की मिलीभगत और साठगांठ से पैसे लेकर छात्रों की मेडिकल और इंजीनियरिंग में दाखिला कराने की कोशिश की गयी. इसके तहत सरकारी नौकरियों को भी पैसे लेकर बांट दिया गया. इस घोटाले में कई लोगों के नाम सामने आये. व्यापम का काम पीएमटी, मेडिकल, इंजीनियरिंग की परीक्षा लेकर योग्यता के आधार पर दाखिला देना है, इसके अलावा शिक्षित और बेरोजगार युवकों की नियुक्ति का काम भी यह करता है.
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