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वसुंधरा राजे की कुर्सी पर से खतरा टला, सफाई से संतुष्ट हुई पार्टी

Updated at : 27 Jun 2015 8:13 AM (IST)
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वसुंधरा राजे की कुर्सी पर से खतरा टला, सफाई से संतुष्ट हुई पार्टी

नयी दिल्ली :राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने पद पर बनी रहेंगी, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने ललित मोदी मामले में वसुंधरा राजे की सफाई को स्वीकार कर लिया है. वसुंधरा ने भारतीय जनता पार्टी को दी गयी सफाई में कहा है कि उन्होंने ललित मोदी के ब्रिटेन में रहने की अनुमति को लेकर तैयार […]

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नयी दिल्ली :राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने पद पर बनी रहेंगी, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने ललित मोदी मामले में वसुंधरा राजे की सफाई को स्वीकार कर लिया है. वसुंधरा ने भारतीय जनता पार्टी को दी गयी सफाई में कहा है कि उन्होंने ललित मोदी के ब्रिटेन में रहने की अनुमति को लेकर तैयार किये गये दस्तावेज में हस्ताक्षर नहीं किया. वसुंधरा द्वारा दी गयी सफाई के बाद पार्टी नेतृत्व भी उनके साथ खड़ा है.

हालांकि उन्होंने माना की 2011 में उन्होंने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया था लेकिन 2013 में ललित मोदी के विवादों में आने के बाद उन्होंने ईमेल भेजकर खुद को इससे अलग कर लिया था. वसुंधरा ने यह भी कहा कि उन्होंने ललित मोदी की मदद इसलिए की थी उनकी पत्नी मीनल उनकी पुरानी दोस्त है. भाजपा के प्रमुख नेताओं ने वसुंधरा की सफाई पर गौर करते हुए यह निर्णय लिया की वह राज्स्थान के सीएम पद पर बनी रहेंगी और भाजपा इसके लिए उनका पूरा समर्थन करेगी. पार्टी का पक्ष है कि उन्होंने एक दोस्त होने के नाते उनकी मदद की थी. राजे ने कोई कानून नहीं तोड़ा.

वसुंधरा राजे की सफाई के बाद भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इसके अलावा वित्त मंत्री अरूण जेटली ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की. वसुंधरा राजे ने बेटे दुष्यंत की कंपनी में ललित मोदी के निवेश पर भी सफाई दी है और भाजपा वसुंधरा की सफाई पर भरोसा कर रही है. पार्टी ने कहा, ललित मोदी द्वारा दुष्यंत की कंपनी में निवेश करने में कुछ भी गलत नही है क्योंकि प्रोजेक्ट का बाजार महत्व 350 करोड़ से ज्यादा का है क्योंकि यह कंपनी बड़ी है और इसके पास काफी जमीन है. वसुंधरा ने भारतीय जनता पार्टी को जो चिट्ठी लिखी है उसमें साफ कर दिया है कि उन्होंने ब्रिटेन के किसी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किया.

ब्रिटेन के सिविल कोर्ट के कानून 1998 के अनुसार कोई भी लिखित दस्तावेज तभी वैद्य माना जायेगा जब उसे एफिडेफिट के रूप में जमा किया जाये. तब नहीं जब एक सादे पेपर में हस्ताक्षर के साथ जमा किया जाये. ब्रिटेन सरकार की इस शर्त को वसुंधरा राजे ने पूरा नहीं किया था. इसके अलावा उन्हें कोर्ट में उपस्थित होना भी अनिवार्य था लेकिन उन्होंने वहां भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करायी. इसके अलावा गवाह को हरएक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना होता है जिस पर भी राजे ने दस्तखत नहीं किये.

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