केंद्र ने इ-रिक्शा के पंजीकरण की तारीख 31 दिसंबर तक के लिए बढाई

Updated at : 20 Jun 2015 12:08 AM (IST)
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केंद्र ने इ-रिक्शा के पंजीकरण की तारीख 31 दिसंबर तक के लिए बढाई

नयी दिल्ली : केंद्र ने पुराने इ रिक्शे के पंजीकरण की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तक बढाने का दिल्ली सरकार का अनुरोध स्वीकार कर लिया है. पंजीकरण प्रक्रिया का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में इ-रिक्शे की वापसी का रास्ता साफ करना है. दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने आज कहा कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन […]

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नयी दिल्ली : केंद्र ने पुराने इ रिक्शे के पंजीकरण की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तक बढाने का दिल्ली सरकार का अनुरोध स्वीकार कर लिया है. पंजीकरण प्रक्रिया का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में इ-रिक्शे की वापसी का रास्ता साफ करना है. दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने आज कहा कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तारीख आगे बढाने पर सहमत हो गये हैं और इसे लेकर जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी.

उन्होंने कहा, ‘पहले इ-रिक्शा के लिए मई तक ही पंजीकरण किया जा सकता था. इसलिए आज हमने नितिन गडकरी के साथ मामले पर चर्चा की और वह पुराने वाहनों के पंजीकरण की तारीख 31 दिसंबर तक बढाने के लिए सहमत हो गये.’ राय ने स्पष्ट किया कि अब तक फॉर्म जारी करने और इ-रिक्शे को प्रमाणपत्र देने के लिए आइसीएटी (इंटरनेशनल सेंटर फोर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी) ने केवल एक संघ को मंजूरी दी है.

उन्होंने कहा, ‘हमने उनसे (गडकरी) इन वाहनों के पंजीकरण के लिए और संघों को मंजूरी देने के लिए कहा. इस कदम से पंजीकरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी.’ राय ने कहा, ‘केवल 24,000 ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया था. जिनमें से 24-25 ने पंजीकरण कराया.’ परिवहन विभाग ने साथ ही घोषणा की कि फैसले की अधिसूचना जारी करने के साथ ही वह कई इ रिक्शा पंजीकरण केंद्र खोलेंगे और अधिकतम पंजीकरण के लिए विशेष शिविर लगाएगा.

दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के एक आदेश का पालन करते दिल्ली सरकार ने इस्ट-वेस्ट ऐलीवेटेड कॉरिडोर का काम तेज करने का प्रस्ताव आगे किया है. राय ने कहा कि केंद्र सरकार इसपर सहमत हो गयी है और जल्द ही परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा. उन्होंने क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों पर लगाम लगाने के लिए वे-इन-मोशन तकनीक की जरुरत पर भी जोर दिया.

राय ने कहा, ‘अब तक शहर में घुसने वाले ओवरलोडेड वाहनों का पता लगाने की कोई प्रणाली नहीं थी. इसलिए हमने दिल्ली में सभी प्रवेश बिंदुओं पर छह किलोमीटर आगे वे-इन-मोशन मशीन लगाने पर चर्चा की है.’ उन्होंने कहा, ‘इस तकनीक से हमें चलते वाहनों का पता लगाने में मदद मिलेगी जिससे वाहनों की जांच के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम से बचा जा सकेगा.’

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