सत्ता में रहने वालों को मुझसे कालेधन पर सवाल करने का नैतिक हक नहीं : नरेंद्र मोदी
Updated at : 30 May 2015 11:20 AM (IST)
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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंगरेजी अखबार द ट्रिब्यून को दिये साक्षात्कार में अच्छे दिन, काला धन, सैनिकों व वन रैंक वन पेंशन देने, भूमि अधिग्रहण, किसानों के मुद्दे सहित विभिन्न मुद्दों पर खुल कर अपनी बात रखी. प्रधानमंत्री ने अपने साक्षात्कार में कहा है कि काला धन के मुद्दे पर सत्ता में […]
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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंगरेजी अखबार द ट्रिब्यून को दिये साक्षात्कार में अच्छे दिन, काला धन, सैनिकों व वन रैंक वन पेंशन देने, भूमि अधिग्रहण, किसानों के मुद्दे सहित विभिन्न मुद्दों पर खुल कर अपनी बात रखी. प्रधानमंत्री ने अपने साक्षात्कार में कहा है कि काला धन के मुद्दे पर सत्ता में रहे लोगों को उनसे सवाल पूछने का नैतिक हक नहीं है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया भूमि अधिग्रहण विधेयक उनकी प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है और वे इसके लिए मिलने वालों सुझावों का स्वागत करते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन देने के अपने पुराने संकल्प को भी दोहराया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछली सरकारों को काला धन बोलने का हक इसलिए नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल में इस विषय में कुछ नहीं किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि पुराने कानून का इस्तेमाल करने वालों और तीन लाख किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वालों को इस बारे में बातचीत करने का एक प्रतिशत भी नैतिक अधिकार नहीं है. प्रधानमंत्री ने सूट बूट की सरकार संबंधी राहुल गांधी के बयान को विपक्ष के वैचारिक दिवालियेपन का संकेत बताया. उन्होंने कहा कि विपक्ष को एक साल के दौरान सरकार की आलोचना का कोई ठोस मुद्दा नहीं मिला और यह हमारी सबसे महत्वपूर्ण सफलता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द ट्रिब्यून समूह के प्रधान संपादक राज चेंगप्पा को 45 दिये साक्षात्कार में कहा कि कोयला व स्पैक्ट्रम घोटालों में उनकी खामोशी पर सवाल उठते रहे हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ प्रधानमंत्री का ईमानदार होना काफी नहीं है. प्रधानमंत्री को अपनी बात, अर्थनीति व व्यवहार के जरिये हर समय भ्रष्टाचार को बिल्कुल बरदाश्त नहीं करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि देश में काला धन विरोधी कानून कडाई से लागू किया जायेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छे दिन लाने से उनका मतलब बुरे दिन खत्म करना था.
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