प्रधानमंत्री ने मुस्लिमों को पूरा समर्थन देने का वादा किया

Updated at : 06 Apr 2015 6:48 PM (IST)
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प्रधानमंत्री ने मुस्लिमों को पूरा समर्थन देने का वादा किया

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम समाज के सभी तबकों की शिकायतों का निवारण करने में अपनी तरफ से पूरा समर्थन देने का आज वादा किया. इसके तहत खासतौर पर उनकी सामाजिक दशाओं में सुधार करने और उनकी शिक्षा जरुरतों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. प्रधानमंत्री ने अपनी राय तब जाहिर […]

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नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम समाज के सभी तबकों की शिकायतों का निवारण करने में अपनी तरफ से पूरा समर्थन देने का आज वादा किया. इसके तहत खासतौर पर उनकी सामाजिक दशाओं में सुधार करने और उनकी शिक्षा जरुरतों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने अपनी राय तब जाहिर की जब मुस्लिम नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की और समुदाय से जुडे मुद्दों और अपनी चिंताओं के बारे में उनसे चर्चा की.प्रतिनिधिमंडल ने सामुदायिक सौहार्द और देश की एकता को मजबूत बनाने के लिए काम करने का वादा किया.

पीएमओ ने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गौर से सुना और उन्हें मुस्लिम समाज के सभी वर्गों की शिकायतों को दूर करने में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया.’ वक्तव्य में कहा गया है कि उन्होंने मुस्लिम युवाओं को अधिकार सम्पन्न बनाने पर जोर दिया ताकि वे राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सकें. उन्होंने उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार लाने और उनकी शिक्षा संबंधी जरुरतों को पूरा करने के लिए पूरी सहायता देने का वादा किया.

मोदी ने विशेषतौर पर इन नेताओं की मुस्लिम धर्म स्थलों, मस्जिदों और मदरसों की संपत्तियों से जुडी शिकायतों पर गौर करने का आश्वासन दिया.यह आश्वासन तब दिया गया जब इन नेताओं ने मुस्लिम धर्म स्थलों, मस्जिदों और मदरसों की संपत्तियों से जुडे मुद्दों की तरफ मोदी का ध्यान आकर्षित किया.मुस्लिम नेताओं ने मुस्लिम युवाओं को खासतौर से शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार से सहायता देने को कहा.

वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘प्रधानमंत्री ने उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार लाने और उनकी शिक्षा संबंधी जरुरतों को पूरा करने के लिए पूरी सहायता देने का वादा किया.’’ मुस्लिम नेताओं ने तेज आर्थिक विकास, सामुदायिक सौहार्द और शांति को प्रोत्साहन देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उनके उद्देश्यों को पूरा करने में अपने समुदाय का पूरा समर्थन देने का वादा किया.

कट्टरपंथ को बढावा देने की प्रवृत्ति और आतंकवाद के बढते खतरे के बारे में आशंकाएं व्यक्त करते हुए इन नेताओं ने चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक एकजुटता दिखाने और सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया.

प्रतिनिधिमंडल में सैयद सुल्तान उल हसन चिश्ती मिसबाही (सजदा नशीं, अजमेर शरीफ), हजरत गुलाम यासीन साहिब (शहर काजी, वाराणसी), शेख वसीम अशरफी (इमाम तन्जीम, मुंबई), मोहम्मद हामिद (राष्ट्रीय अध्यक्ष, इमाम तन्जीम, नागपुर), अल्लामा तस्लीम राजा साहिब (दरगाह बरेलवी शरीफ, उत्तर प्रदेश), सैयद अब्दुल राशिद अली (सैयद शाहिद दरगाह, शहडौल, मध्यप्रदेश), मौलाना अबु बक्र बसानी (नागौरी शरीफ दरगाह, राजस्थान), सैयद अली अकबर (ताजपुरा शरीफ, चेन्नई), हाजी अब्दुल हफीज खान (इमाम, तन्जीम बालाघाट, मध्य प्रदेश) शामिल थे.

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