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सपने बेचने वाली मोदी सरकार के पास ना कोई नीति ना कोई कार्यक्रमः शरद

Updated at : 04 Apr 2015 4:22 PM (IST)
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सपने बेचने वाली मोदी सरकार के पास ना कोई नीति ना कोई कार्यक्रमः शरद

नयी दिल्ली: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष शरद यादव ने किसानों की परेशानियों को दूर करने संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर आज राजग सरकार पर हमला किया और आरोप लगाया कि वे बस सपने बेच रहे हैं तथा उनके पास न तो कोई नीति है, न ही कोई कार्यक्रम. यादव ने […]

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नयी दिल्ली: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष शरद यादव ने किसानों की परेशानियों को दूर करने संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर आज राजग सरकार पर हमला किया और आरोप लगाया कि वे बस सपने बेच रहे हैं तथा उनके पास न तो कोई नीति है, न ही कोई कार्यक्रम.

यादव ने कहा, ‘‘नीति इरादे से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है. सभी सरकारों की लोगों का भला करने की मंशा होती है. लेकिन मुद्दा यह है कि क्या सरकार के पास उसे पूरा करने के लिए कोई नीति एवं कार्यक्रम है या नहीं. इस सरकार के पास कोई रोडमैप, कोई नीति या कोई कार्यक्रम नहीं है. महज मंशा से किसानों का कोई भला नहीं होगा.’’ वह प्रधानमंत्री के कल के इस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि विपक्ष यह झूठ फैला रहा है कि सरकार किसानों के हितों के खिलाफ काम कर रही है.
नये जमीन अधिग्रहण विधेयक पर आलोचनाओं का सामना कर रहे मोदी ने दलील दी थी कि वह किसानों के बीच रहे हैं इसलिए वह उनके दुखदर्द को समझ सकते हैं और उनकी परेशानियों को दूर करने के नेक इरादे से काम कर रहे हैं.प्रधानमंत्री मोदी ने कल बेंगलुरु में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही थी. उनके इस बयान पर यादव ने कहा, ‘‘इरादे का क्या मतलब है जब उसके साथ कोई ठोस नीति या कार्यक्रम न हों.
जब नीति और इरादे आपस में मिलते हैं केवल तभी नतीजे सामने आते हैं. यह सरकार नीति के मोर्चे पर पूरी तरह अभावग्रस्त है. इस सरकार ने दो करोड़ रोजगार पैदा करने का वादा किया है. उसने कई ऐसे सपने बेचे. लेकिन उनमें से कोई भी पूरा नहीं हुआ.’’उन्होंने कहा कि बस इरादे की चर्चा करने के बजाय सरकार को गरीबी हटाने, रोजगार पैदा करने, किसानों को राहत प्रदान करने के लिए स्पष्ट रोडमैप के साथ आगे आना चाहिए और अपनी नीति बतानी चाहिए.
पिछले महीने यादव ने नये जमीन कानून के खिलाफ संसंद से राष्ट्रपति भवन तक दर्जनभर विपक्षीदलों का मार्च आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई थी और आरोप लगाया था कि राजग सरकार का यह कदम किसान विरोधी एवं उद्योपगतियों के हित में है.जब जदयू जून, 2013 में अलग होने से पहले भाजपा के साथ था तब यादव राजग के संयोजक थे. जदयू लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने पर राजग से अलग हो गया था.
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