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15 August Independence Day 2020: कोरोना काल में अलग होगा लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस का नजारा , खास लोगों को ही मिलेगा प्रवेश

Updated at : 14 Aug 2020 9:07 AM (IST)
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15 August Independence Day 2020: कोरोना काल में अलग होगा लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस का नजारा , खास लोगों को ही मिलेगा प्रवेश

15 August Independence Day 2020, Independence Day: देश में गहराए कोरोना संकट के बीच हर तरफ स्वतंत्रता दिवस की धूम है. हर जगह बस इसी की तैयारी चल रही है. इस बार 15 अगस्त को देश 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. हर बार की तरह इस बार भी दिल्ली में लाल किले पर ध्वजारोहण होगा लेकिन इस बार लाल किले का नजारा कुछ अलग होगा. वजह है कोविड19 महामारी का दौर. कोरोना से खौफ और उससे सतर्कता का आलम ये है कि छोटी छोटी बातों का भी ख़्याल रखा जा रहा है.

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15 August Independence Day 2020, Independence Day: देश में गहराए कोरोना संकट के बीच हर तरफ स्वतंत्रता दिवस की धूम है. हर जगह बस इसी की तैयारी चल रही है. इस बार 15 अगस्त को देश 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. हर बार की तरह इस बार भी दिल्ली में लाल किले पर ध्वजारोहण होगा लेकिन इस बार लाल किले का नजारा कुछ अलग होगा. वजह है कोविड19 महामारी का दौर. कोरोना से खौफ और उससे सतर्कता का आलम ये है कि छोटी छोटी बातों का भी ख़्याल रखा जा रहा है.

गुरुवार को ही लाल किले पर फ़ुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित हुई. इस रिहर्सल में थल सेना, वायु सेना और नोसैना के जवानों ने हिस्सा लिया. कोरोना के ख़तरे को देखते हुए जवानों ने चेहरे पर मास्क पहने रखा. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया गया. स्वतंत्रता दिवस से पहले राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

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कोरोनावायरस के चलते इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर कुछ खास दिशा निर्देश हैं ताकि समारोह पूरी एहतियात के साथ हो सके. गृह मंत्रालय और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी दिशानिर्देशों के तहत अगर स्वतंत्रता दिवस से 20 दिन पहले तक समारोह में शामिल होने वाले किसी अतिथि को किसी भी तरह के कोरोना के लक्षण थे और उसकी जांच नहीं हुई या फिर जांच की रिपोर्ट सकारात्मक या अपुष्ट हो तो वे समारोह में भाग न लेने से परहेज कर सकते हैं.

मास्क, पीपीई और सोशल डिस्टेंसिंग

इस साल प्रधानमंत्री समेत लाल किले पर मौजूद सभी अतिथि और अन्य लोग मास्क लगाए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नजर आएंगे. गृह मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस में कहा गया कि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए मास्क लगाना, सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा. समारोह स्थल पर निर्धारित क्षेत्र में बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए की जा रही है. समारोह में मौजूद स्टाफ पीपीई किट पहने हुए होगा. लाल किले पर सुरक्षा में तैनात पुलिस पीपीई किट पहनकर रहेगी.

हाथ मिलाकर अभिवादन नहीं

लाल किले पर होने वाले औपचारिक समारोह की शुरुआत से पहले हर साल की तरह पीएम राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे. पीएम सुबह 7.06 बजे राजघाट पहुंचेंगे. राजघाट से निकलकर सुबह 7.18 बजे पीएम मोदी लालकिला पहुंचेंगे. प्रधानमंत्री के लाल किला पहुंचने के बाद उनकी अगुवाई रक्षा मंत्री , रक्षा राज्य मंत्री , रक्षा सचिव और सेना के जनरल ऑफिसर कमांडिंग ( दिल्ली एरिया ) करते हैं. स्वागत करते वक्त चारों गणमान्य प्रधानमंत्री का नमस्कार और हाथ मिलाकर अभिवादन करते हैं. इसके बाद पीएम लालकिले की प्राचीर पर जाते वक़्त तीनों सेनाओं के प्रमुखों की भी सलामी लेने के अलावा हाथ मिलाते हैं लेकिन इसबार ऐसा नहीं हो पाएगा. इस बार हाथ मिलाने की पूरी तरह मनाही रहेगी.

पीएम मोदी का भाषण होगा मगर…

प्रधानमंत्री ठीक 7.30 बजे क़िले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे जिसके बाद उनका भाषण शुरू होगा. लालक़िले की प्राचीर पर जहां ध्वजारोहण करने के बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र को सम्बोधित करते हैं उसके दोनों तरफ़ हर साल क़रीब 800 विशिष्ट मेहमानों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई जाती हैं. इनमें केंद्र सरकार के मंत्री , मुख्य न्यायाधीश और सभी देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के अलावा केंद्र और दिल्ली सरकार के चुनिंदा अधिकारी शामिल होते हैं. कोरोना से जुड़े प्रतिबंधों के चलते इस बार भाषण मंच के दोनों तरफ़ केवल 100 – 125 लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी.

ज़ाहिर है इस कटौती के चलते कई गणमान्य लोगों को आमंत्रित नहीं किया जाएगा. इसके अलावा लालकिला मैदान में हर साल दिल्ली के अलग अलग स्कूलों के 4200 बच्चों को तिरंगा के तीनों रंगों के कपड़ों में बिठाया जाता है. कार्यक्रम का समापन होने के बाद हर साल उन बच्चों से मुलाक़ात करते प्रधानमंत्री की तस्वीर हम सबने देखी है. इस साल शायद वो नज़ारा देखने को न मिले. अव्वल तो , इस साल 4200 बच्चों की जगह केवल 500 एनसीसी कैडेटों को ही बैठाया जाएगा.

Posted By: Utpal kant

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