उन्नाव दुष्कर्म मामला : फैसला सुनकर कोर्ट में ही रोने लगा सेंगर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Dec 2019 5:27 PM
नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत द्वारा सोमवार को उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराये जाने के फौरन बाद भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर अदालत में ही रोने लगा. वह अपनी बहन के बगल में रोता दिखायी दिया. अदालत ने मुख्य आरोपी सेंगर को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत […]
नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत द्वारा सोमवार को उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराये जाने के फौरन बाद भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर अदालत में ही रोने लगा. वह अपनी बहन के बगल में रोता दिखायी दिया.
अदालत ने मुख्य आरोपी सेंगर को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी करार दिया. जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने हालांकि सह-आरोपी शशि सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया. अदालत सजा पर बुधवार को दलीलें सुनेगी. पॉक्सो अधिनियम के तहत इस आरोप के लिए अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है. सेंगर ने 2017 में एक युवती का कथित तौर पर अपहरण करने के बाद उससे बलात्कार किया था. उस समय युवती नाबालिग थी. उप्र की बांगरमऊ विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने सेंगर को इस मामले के बाद अगस्त 2019 में भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था.
अदालत ने नौ अगस्त को विधायक और सिंह के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, बलात्कार और पोक्सो कानून से संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किये थे. सेंगर पर आरोप लगाने वाली युवती की कार को 28 जुलाई में एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से जख्मी हो गयी थी. दुर्घटना में युवती की दो रिश्तेदार मारी गयीं और उसके परिवार ने इसमें षड्यंत्र होने के आरोप लगाये थे. उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव बलात्कार मामले में दर्ज सभी पांच मामलों को एक अगस्त को उत्तरप्रदेश में लखनऊ की अदालत से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करते हुए निर्देश दिया कि रोजाना आधार पर सुनवाई की जाये और इसे 45 दिनों के अंदर पूरा किया जाये. न्यायालय ने यह व्यवस्था पीड़िता द्वारा भारत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए दी थी.
बलात्कार मामले में बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के नौ गवाहों से जिरह हुई. बलात्कार पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिए यहां स्थित एम्स अस्पताल में एक विशेष अदालत भी बनायी गयीझ. पीड़िता को लखनऊ के एक अस्पताल से हवाई एंबुलेंस के जरिये दिल्ली ला कर यहां भर्ती कराया गया था. उच्चतम न्यायालय के आदेशों पर युवती और उसके परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा दी गयी है.
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