यौन उत्पीड़न का आरोप:जज ने कहा,दोषी पाया जाऊं,तो फांसी दे दो

Published at :04 Aug 2014 11:07 AM (IST)
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यौन उत्पीड़न का आरोप:जज ने कहा,दोषी पाया जाऊं,तो फांसी दे दो

ग्वालियर : ग्वालियर की अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज ने मध्यप्रदेश हाइकोर्ट के एक जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. जूनियर जज ने कहा है कि उन्हें अपनी गरिमा, स्त्रीत्व को बचाने के लिए न्यायिक सेवा से इस्तीफा देना पड़ा. वहीं, हाइकोर्ट के जज ने कहा कि अगर वे दोषी पाये जाते हैं, […]

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ग्वालियर : ग्वालियर की अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज ने मध्यप्रदेश हाइकोर्ट के एक जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. जूनियर जज ने कहा है कि उन्हें अपनी गरिमा, स्त्रीत्व को बचाने के लिए न्यायिक सेवा से इस्तीफा देना पड़ा. वहीं, हाइकोर्ट के जज ने कहा कि अगर वे दोषी पाये जाते हैं, तो उन्हें फांसी की सजा दे दी जाये. वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं. जज ने कहा, उन्होंने हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस को इस संबंध में पत्र लिखा है.

इधर, सोमवार को मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर महिला जज की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और इसकी न्यायिक जांच कराने का अनुरोध कर किया है. साथ ही आरोपी जज के निलंबन का भी अनुरोध है. महिला जज ने आरोप लगाया है कि हाइकोर्ट के जज ने उन्हें आइटम सांग पर डांस करने के लिए कहा. साथ ही सुदूर इलाके में ट्रांसफर कर प्रभावित करने की कोशिश की.

पीडि़त जज ने 15 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. पीडि़त जज यौन उत्पीड़न के खिलाफ गठित विशाखा समिति की अध्यक्षता कर रही थीं. दिल्ली की अदालतों में 15 साल तक वकालत करने के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश की उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा पास की. एक अगस्त, 2011 को उन्हें ग्वालियर में तैनात किया गया. जस्टिस डीके पालीवाल के मातहत ट्रेनिंग के बाद अक्तूबर, 2012 में उन्हें ग्वालियर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया. अप्रैल, 2013 में वह जिला विशाखा समिति का चेयरपर्सन बनीं.

– महिला जज के आरोप

* महिला न्यायाधीश ने आरोप लगाया है कि मध्यप्रदेश हाइकोर्ट की ग्वालियर पीठ के न्यायाधीश उन्हें अकेले उनके घर आने के लिए परेशान कर रहे थे. आरोप है कि प्रशासनिक न्यायाधीश ने डिस्ट्रक्टि रजिस्ट्रार के जरिये उसे संदेश भिजवाया, जिसमें न्यायाधीश ने अपने घर पर आयोजित कार्यक्र म के दौरान आइटम सांग पर डांस करने के लिए कहा. अपनी बेटी का जन्मदिन होने के कारण महिला जज कार्यक्रम में नहीं गयीं.

* अगले दिन प्रशासनिक जज ने महिला जज से कहा, मैंने डांस प्लोर पर सेक्सी और ब्यूटीफुल फिगर देखने का अवसर गंवा दिया. मैं दोबारा वही चीज देखने के लिए बेताब हूं. महिला जज के मुताबिक प्रशासनिक न्यायाधीश उस वक्त गुस्से में आ गये, जब उन्होंने गंदी आकांक्षाओं के आगे झुकने से इनकार कर दिया.

* 15 दिन बाद प्रशासनिक न्यायाधीश ने महिला जज को अपने पति के साथ मिलने के लिए आने को कहा. 22 जून को महिला जज पति के साथ प्रशासनिक न्यायाधीश से मिलने पहुंची. लेकिन, इससे पहले ही उन्हें ट्रांसफर का आदेश थमा दिया गया.

– उचित कार्रवाई होगी : लोढ़ा

पीडि़त न्यायाधीश ने भारत के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा, सुप्रीम कोर्ट के जज एचएल दत्तू, टीएस ठाकुर, अनिल आर दवे, दीपक मिश्रा और अरुण मिश्रा के साथ-साथ मध्यप्रदेश के चीफ जस्टिस से शिकायत की है. पीडि़त जज की शिकायत पर भारत के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा ने कहा कि हमारे प्रोफेशन में साथियों को भाई और बहन समझते हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. मेरे पास शिकायत आयी है और मैं उचित कार्रवाई करूंगा.

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