अयोध्या के फैसले को कैसे देखता है विदेशी मीडिया?
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Nov 2019 10:56 PM
अयोध्या मामले में शीर्ष न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट की स्थापना करने के लिए योजना तैयार करना होगा. वहीं, दूसरी ओर सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं और 5 […]
अयोध्या मामले में शीर्ष न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट की स्थापना करने के लिए योजना तैयार करना होगा. वहीं, दूसरी ओर सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं और 5 एकड़ की जमीन देने को कहा गया है.
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये फैसले पर भारत के अलावा दूसरे देशों की भी निगाहें टिकी थीं. इसऐतिहासिक फैसले को लेकर विदेशी मीडिया से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
संयुक्त अरब अमीरात कामीडियाहाउस ‘गल्फ न्यूज’ लिखता है, 134 साल का विवाद 30 मिनट में सुलझा लिया गया. हिंदुओं को अयोध्या की जमीन मिलेगी. मुस्लिमों को मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन दी जाएगी.
दूसरी तरफ, अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी जीत बताया है. अखबार ने कहा कि भगवान राम के लिए विवादित स्थल पर मंदिर बनाना लंबे समय से भाजपा का उद्देश्य था. अखबार ने आगे लिखा, भारत की सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे विवादित धार्मिक स्थल को ट्रस्ट को देने का आदेश दिया और जिस जगह कभी मस्जिद हुआ करती थी, उस जगह हिंदू मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया.
पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ ने लिखा, भारत की सुप्रीम कोर्ट ने उस विवादित स्थल पर, जहां हिंदुओं ने 1992 में मस्जिद गिरायी थी, हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुना दिया और कहा कि अयोध्या की जमीन पर मंदिर बनाया जाएगा. हालांकि कोर्ट ने यह मान लिया कि 460 साल पुरानी बाबरी मस्जिद को गिराना कानून का उल्लंघन था. कोर्ट के फैसले से भारत के हिंदू-मुस्लिमों के बीच भारी हुए संबंधोंं पर बड़ा असर पड़ सकता है.
ब्रिटिश अखबार ‘गार्जियन’ ने भी अयोध्या मामले पर आये ताजा फैसले को प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत बतातेहुए लिखा कि अयोध्या में राम मंदिर बनाना उनके राष्ट्रवादी एजेंडे का हिस्सा रहा है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के 20 करोड़ मुस्लिम सरकार से डर महसूस कर रहे हैं. अखबार ने कहा कि 1992 में मस्जिद ढहाया जाना भारत में धर्मनिरपेक्षता के नाकाम होने का बड़ा क्षण था.
अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ लिखता है, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिंदुओं को उस जगह मंदिर बनाने की अनुमति मिली, जहां पहले मस्जिद हुआ करती थी. हिंदुओं ने इसकी योजना 1992 के बाद तैयार कर ली थी, जब बाबरी मस्जिद गिरायी गई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा हिंदू राष्ट्रवाद और अयोध्या में मंदिर बनाने की लहर में ही सत्ता में आये और यही उनका मुख्य मुद्दा था.
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