ब्रेकथ्रू के यूथ कनक्लेव ''द फ्लिप'' में जुटे युवा, उठाया महिला सुरक्षा व लैंगिक असमानता का मुद्दा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Sep 2019 10:20 PM
नयी दिल्ली : कला, मनोरंजन के साथ बदलाव का भी माध्यम है, यह देखने को मिला द फ्लिप कार्यक्रम में, जिसका आयोजन महिला अधिकारों पर काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था ब्रेकथ्रू द्वारा बाल भवन में किया गया था. इस अवसर पर विभिन्न कॉलेजों के युवाओं ने सेफर स्पेस और लैंगिक भेदभाव के मुद्दे पर नुक्कड़ […]
नयी दिल्ली : कला, मनोरंजन के साथ बदलाव का भी माध्यम है, यह देखने को मिला द फ्लिप कार्यक्रम में, जिसका आयोजन महिला अधिकारों पर काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था ब्रेकथ्रू द्वारा बाल भवन में किया गया था. इस अवसर पर विभिन्न कॉलेजों के युवाओं ने सेफर स्पेस और लैंगिक भेदभाव के मुद्दे पर नुक्कड़ नाटक, कविता, लघु फिल्म और कहानियों के माध्यम से अपनी बात रखी.
कार्यक्रम में ज्यूरी द्वारा चुनी गयी तीन विशिष्ट प्रविष्टियों में से प्रथम पुरस्कार रियलिटी चेक, दूसरा सोशल रिसर्च लघु फिल्म को और तीसरा फोरम थिएटर प्रस्तुति सुपर वूमेन को दिया गया.
पॉपुलर कल्चर ने दिया नया नजरिया
इस अवसर पर ब्रेकथ्रू की सीईओ व प्रेसीडेंट सोहिनी भट्टाचार्य ने कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए कला एक बेहतरीन माध्यम है. हमारा शुरू से ही मानना है कि पॉपुलर कल्चर खास तौर से महिलाओं से जुड़े सुरक्षा और लैंगिक भेदभाव जैसे मुद्दों को उठाने का एक प्रभावी माध्यम है. जो लोगों को सीधे मुद्दे से जोड़ता तो है ही साथ ही उनको इसको रोकने के लिए कदम उठाने के लिए प्रेरित भी करता है.
मन के मंजीरे, बेल बजाओ, ऑस्किंग फॉर इट, शेयर योर स्टोरी, मिशन हजार जैसे हमारे अभियानों की सफलता इस बात की तस्दीक करती हैं. महिला अधिकारों के लिए हमारी लड़ाई को बीस साल हो रहे हैं ऐसे में हमारा दायित्व और भी बढ़ जाता है कि हम ऐसे चेंज मेकर बनाएं जो इस लड़ाई को आगे लेकर जाएं और उसको असल मुकाम पर पहुंचाएं. उम्मीद है कि हम इनके साथ मिलकर महिलाओं व लड़कियों के लिए एक ऐसा समाज बना पायेंगे जहां महिलाओं के साथ होने वाली किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार ना की जाए.
आर्टिकल 19 ने की अभिव्यक्ति की आजादी की बात तो इनफ ने कहा अब और नहीं
इस अवसर पर अभिव्यक्ति के मुद्दे पर आर्टिकल 19, सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले यौनिक हिंसा पर आधारित फिल्म सोशल रिसर्च, कार्यस्थल पर यौनिक हिंसा पर आधारित इनफ, नशे की वजह से होने वाली हिंसा पर आधारित बिहाइंड द पर्दा, मानसिक हिंसा पर आधारित द ब्रूड व बदलाव पर आधारित रियलिटी चेक लघु फिल्मों की स्क्रीनिंग भी की गयी. यह लघु फिल्में ब्रेकथ्रू से जुड़े युवाओं और कॉलेज स्टूडेंट द्वारा बनायी गयी है.
बदली जिदंगी जब ब्रेकथ्रू का मिला साथ
दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेसी ने घरेलू हिंसा से किस तरह से अपनी मां को बाहर निकाला और अंबेडकर विश्वविद्यालय की हर्षिता ने राइट टू च्वाइस के मुद्दे पर अपने बदलाव के सफर से दर्शकों को रू-ब-रू कराया. उन्होंने कहा कि ब्रेकथ्रू की ट्रेनिंग की वजह से ही यह बदलाव आ पाया. उत्तर प्रदेश से आयी अंजली ने अपने गावं कूड़ा मऊ के नाम बदलने के सफर और उसके सुंदर नगर बनाने की जद्दोजहद को बयां किया. उसने बताया कि इस मुहिम को शुरू करने और जारी रखने का हौसला ब्रेकथ्रू से ही मिला.
ज्यूरी में शामिल रहे फिल्म अभिनेत्री-अभिनेता, लेखिका-लेखक और निर्माता-निर्देशक
ज्यूरी के सदस्यों में कवयित्री व लेखिका पूर्वा भारद्वाज, फाउंडर- पुरानी दिल्ली वालों की बातें- अबु सुफियान, फिलम अभिनेता- पंकज गुप्ता, डायरेक्टर, स्क्रिप्ट राइटर कुलदीप कुमार, अभिनेत्री व थियेटर आर्टिस्ट शिल्पी मारवाह और निर्देशक व लेखक वीरेंद्र कुमार शामिल थे.
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