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आजादी के 72 साल बाद पूरी हुई लद्दाखवासियों की मुराद पर करगिल के लोग आज भी अलग होना चाहते हैं लेह से

Updated at : 06 Aug 2019 7:26 AM (IST)
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आजादी के 72 साल बाद पूरी हुई लद्दाखवासियों की मुराद पर करगिल के लोग आज भी अलग होना चाहते हैं लेह से

जम्मू : लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने के केंद्र के फैसले से लद्दाख के लोगों में खुशी है. उनके मुराद पूरी हुई है, पर यह खुशी सिर्फ लेह के लोगों को है, जिन्होंने इसे पाने की खातिर कई सालों तक आंदोलन किया. करगिल के लोग लेह से मुक्ति चाहते हैं. लद्दाख के दो […]

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जम्मू : लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने के केंद्र के फैसले से लद्दाख के लोगों में खुशी है. उनके मुराद पूरी हुई है, पर यह खुशी सिर्फ लेह के लोगों को है, जिन्होंने इसे पाने की खातिर कई सालों तक आंदोलन किया. करगिल के लोग लेह से मुक्ति चाहते हैं. लद्दाख के दो जिले हैं- लेह और करगिल. प्राचीनकाल में लद्दाख कई अहम व्यापारिक रास्तों का प्रमुख केंद्र था.
वर्ष 1947 से क्षेत्र में यह मांग बुलंद हो रही थी कि लद्दाख को कश्मीर से अलग कर इस केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए. अब भाजपा ने यह मांग पूरी कर अपना वायदा निभाया है. वर्ष 1989 में लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन का गठन हुआ, तो उसने भी गठन के साथ ही इस मांग को लेकर आंदोलन छेड़ा. केंद्र शासित प्रदेश की मांग को लेकर लेह व कारगिल जिलों में राजनीतिक पार्टियों के साथ लोग भी एकजुट थे.
वर्ष 2002 में लद्दाख यूनियन टेरेटरी फ्रंट के गठन के साथ इस मांग को लेकर सियासत तेज हो गयी थी. वर्ष 2005 में फ्रंट ने लेह हिल डेवेलपमेंट काउंसिल की 26 में से 24 सीटें जीत ली थीं. इसके बाद से लद्दाख ने इस मांग को लेकर पीछे मुड़ कर नहीं देख. इसी मुद्दे पर 2004, 2014 व 2019 में लद्दाख ने सांसद जीता कर दिल्ली भेजे थे.
2002 में लद्दाख यूनियन टेरेटरी फ्रंट के गठन के बाद लद्दाख को अलग करने की मांग हुई थी तेज
लद्दाख की जीत के बड़े हीरो थुप्स्तन
लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के मुद्दे पर दो बार सांसद चुने गये थुप्स्तन छेवांग लद्दाख की जीत के असली हीरो हैं. चालीस सालों से केंद्र शासित प्रदेश की मांग को लेकर जद्दोजहद करने वाले छेवांग ने 1989 में लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन की कमान संभाली थी.
2002 में लद्दाख यूनियन टेरेटरी फ्रंट बनाने में भी मुख्य भूमिका निभायी. 2010 केंद्र शासित प्रदेश की मांग को पूरा करने के लिए फ्रंट ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया. हालांकि, मांग पूरी होती नहीं दिख उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया और मनाने के बाद भी 2019 में उम्मीदवार बनना स्वीकार नहीं किया.
लद्दाख में बसने लायक जगह बेहद कम
लद्दाख एक ऊंचा पठार है, जिसका अधिकतर हिस्सा 9,800 फीट से ऊंचा है. करीब 33,554 वर्गमील में फैले लद्दाख में बसने लायक जगह बेहद कम है.
हर ओर विशालकाय पहाड़ हैं. यहां के सभी धर्मों के लोगों की जनसंख्या 2,36,539 है. लद्दाख मूल रूप से किसी बड़ी झील का एक डूब हिस्सा था है, जो कई वर्षों के भौगोलिक परिवर्तन के कारण लद्दाख की घाटी बन गया. 18वीं शताब्दी में लद्दाख और बाल्टिस्तान को जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में शामिल किया गया. यहीं से निकलती है सिंधु नदी, कभी था मध्य एशिया का कारोबारी गढ़
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