Karnataka Crisis: नहीं हो सका फ्लोर टेस्ट, विधानसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित

Updated at : 19 Jul 2019 8:23 PM (IST)
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Karnataka Crisis: नहीं हो सका फ्लोर टेस्ट, विधानसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित

बेंगलुरु : मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी के विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के बिना ही कनार्टक विधानसभा सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गयी. अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस-जदएस सरकार के राज्यपाल वजु भाई वाला द्वारा तय की गयी दो समय सीमाओं को पूरा ना कर पाने पर सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित […]

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बेंगलुरु : मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी के विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के बिना ही कनार्टक विधानसभा सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गयी. अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस-जदएस सरकार के राज्यपाल वजु भाई वाला द्वारा तय की गयी दो समय सीमाओं को पूरा ना कर पाने पर सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया. सदन को स्थगित करने से पहले अध्यक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया कि सोमवार को विश्वास प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा और इसे अन्य किसी भी परिस्थिति में आगे नहीं बढ़ाया जायेगा.

हालांकि, इससे पहले स्पीकर ने कहा था बहुत चर्चा हो चुकी है. मैं इसे आज ही समाप्त करना चाहता हूं. मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी ने कहा, मैंने पहले ही बात रख दी है. हम प्रक्रिया सोमवार को समाप्त कर सकते हैं. भाजपा नेता सुरेश कुमार ने कहा कि अगर प्रक्रिया को और खींचा गया तो विश्वास मत की शुचिता समाप्त हो जायेगी. उन्होंने आज ही प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह कुछ समय बाद व्यवस्था देंगे. कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने कहा कि किसी विधायक ने उनसे सुरक्षा की मांग नहीं की है. उन्होंने कांग्रेस के इन आरोपों के बीच यह बात कही कि सरकार को गिराने के लिए बागी विधायकों को बंधक बनाया गया है.

विधानसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एचके पाटिल ने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि शहर के बाहर रोककर रखे गये विधायक सत्र में भाग ले सकें, इसके लिए सुगम माहौल बनाया जाये. कुमार ने कहा, किसी ने सुरक्षा की मांग नहीं की है. ना ही उनके परिवार वाले आये हैं. इसलिए मुद्दा यहीं समाप्त होता है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी के शिवकुमार ने कहा कि वह मुंबई गये थे जहां बागी विधायकों को रखा गया है और उनकी सूचना के मुताबिक उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है.

इससेपहले कर्नाटक के राज्यपाल वजु भाई वाला ने विधानसभा में विश्वास मत प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो समय-सीमा तय की, जिस पर मुख्यमंत्री कुमारास्वामी ने कहा कि उन्हें राज्यपाल की ओर से इस संबंध में एक ‘प्रेम पत्र’ मिला है. विधानसभा के आज दोपहर डेढ़ बजे तक विश्वास मत प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहने के बाद राज्यपाल ने कुमारास्वामी को दूसरा पत्र लिखा. उन्होंने विधानसभा में जारी विचार-विमर्श से विश्वास मत पारित होने में देरी की ओर इशारा किया. वाला ने विधायकों की खरीद-फरोख्त्त के व्यापक आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि विश्वास मत प्रक्रिया बिना किसी विलंब के शुक्रवार को ही पूरी हो. कुमारास्वामी ने वाला के विधायकों की खरीद-फरोख्त्त के मुद्दे को इस समय उठाने की आलोचना की, जबकि यह पिछले कई दिनों से जारी है.

राज्यपाल ने अपने दूसरे सरकारी संदेश में प्रथम दृष्टया इस बात को लेकर संतुष्टि व्यक्त की कि सरकार ने विधानसभा में अपना बहुमत खो दिया है. वाला ने कुमारास्वामी को दूसरे पत्र में कहा, जब विधायकों की खरीद-फरोख्त्त के व्यापक स्तर पर आरोप लग रहे हैं और मुझे इसकी कई शिकायतें मिल रही हैं, यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि विश्वास मत बिना किसी विलंब के आज ही पूरा हो. उन्होंने कहा, इसलिए आप बहुमत को साबित करने और विश्वास मत की प्रक्रिया को आज ही पूरा और समाप्त करें. कुमारास्वामी ने दिन में उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि राज्यपाल विधायिका के लोकपाल की तरह काम नहीं कर सकते.

राज्यपाल ने कहा कि उन्हें विधायकों के खरीद-फरोख्त्त की कोशिश की काफी शिकायतें मिल रही हैं. उन्होंने कहा, इसे केवल तभी रोका जा सकता है जब विश्वास मत प्रक्रिया को जल्द से जल्द और बिना किसी विलंब के किया जाये. वाला ने मुख्यमंत्री से कहा कि अगर अन्य सदस्य अपनी राय रखना चाहेंगे तो विधानसभा की कार्यवाही को बढ़ाया जा सकता है. इस बीच कुमारास्वामी ने कहा, आज मुझे राज्यपाल का दूसरा ‘प्रेम पत्र’ मिला है. अब उनके ज्ञानचक्षु खुल गये हैं. पत्र में राज्यपाल ने खरीद-फरोख्त्त की बात की है. क्या उन्हें अब तक इसके बारे में नहीं पता था.

इससेे पहले मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर कहा कि राज्यपाल वजूभाई वाला विधानसभा को निर्देशित नहीं कर सकते कि विश्वास मत प्रस्ताव किस तरह लिया जाये. मुख्यमंत्री कुमारास्वामी ने विश्वास मत प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी करने के लिए राज्यपाल द्वारा एक के बाद एक समय सीमा निर्धारित करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करने के तरीके के बारे में निर्देश नहीं दे सकते. मुख्यमंत्री ने न्यायालय से उसके 17 जुलाई के आदेश पर स्पष्टीकरण देने का अनुरोध किया है जिसमें कहा गया था कि 15 बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता है. कुमारास्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्यपाल द्वारा बृहस्पतिवार को भेजे गये संदेश में विश्वास प्रस्ताव और मतदान शुक्रवार को डेढ़ बजे तक करने का निर्देश दिया था. मुख्यमंत्री ने कहा, जब पहले ही विश्वास प्रस्ताव पर कार्यवाही शुरू हो गयी है तो राज्यपाल द्वारा इस तरह का कोई भी निर्देश नहीं दिया जा सकता है.

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