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डीम्ड यूनिवर्सिटी और प्राइवेट कॉलेजों में पीजी मेडिकल सीट पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट करने का निर्देश

Updated at : 17 Jun 2019 8:50 PM (IST)
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डीम्ड यूनिवर्सिटी और प्राइवेट कॉलेजों में पीजी मेडिकल सीट पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट करने का निर्देश

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह स्पष्ट करे कि डीम्ड विश्वविद्यालयों और निजी कॉलेजों में 400- 500 सीटों के लिए परास्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन की काउंसिलिंग की तारीख बढ़ा सकती है अथवा नहीं. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसे कोई आसान हल नहीं […]

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह स्पष्ट करे कि डीम्ड विश्वविद्यालयों और निजी कॉलेजों में 400- 500 सीटों के लिए परास्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन की काउंसिलिंग की तारीख बढ़ा सकती है अथवा नहीं. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसे कोई आसान हल नहीं मिल पाया है. न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से पूछा कि वह हलफनामा दायर कर रुख स्पष्ट करें. बनर्जी स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय (डीजीएचएस)की तरफ से पेश हुए.

पीठ देश के 1300 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के पंजीकृत समूह एजुकेशन प्रमोशन सोसायटी ऑफ इंडिया की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. सोसायटी ने काउंसिलिंग आगे बढ़ाने की मांग की है, ताकि 500 से अधिक सीटों पर नामांकन हो सके. याचिकाकर्ता सोसायटी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि कुछ तकनीकी एवं अन्य मुद्दों पर डीम्ड विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में मेडिकल सीट खाली रह गयी थीं. इससे शिक्षण संस्थानों को काफी नुकसान हो रहा है. उन्हें गुणवत्तापूर्ण ढांचागत निर्माण पर काफी निवेश करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि जो सीट व्यर्थ चली जाती है, उससे छात्र और शैक्षणिक संस्थान दोनों प्रभावित होते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून को केंद्र सरकार से कहा था कि समस्या का आसान हल ढूंढने का प्रयास करें. अदालत ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग को एक हफ्ते या उससे कम समय के लिए बढ़ाया जा सकता है. सोसायटी ने याचिका में कहा कि मेडिकल कॉलेज एवं डीम्ड विश्वविद्यालय न तो सीटों की संख्या बढ़ाने या न ही छात्रों को समायोजित करने के लिए किसी मानदंड को कम करने का आग्रह कर रहे हैं. वे तो बस इतना अनुरोध कर रहे हैं कि खाली सीटों के लिए काउंसलिंग का समय बढ़ा दिया जाये, ताकि प्रतीक्षा सूची वाले नीट उत्तीर्ण मेधावी छात्रों को पीजी पाठ्यक्रम में नामांकन का अवसर मिल सके.

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