बंगाल में पिटाई के विरोध में उतरे देशभर के डॉक्टर, 17 को हड़ताल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jun 2019 2:27 AM

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कोलकाता/नयी दिल्ली : कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में दो जूनियर डॉक्टरों की सोमवार को बेरहमी से पिटाई मामले को लेेकर डॉक्टरों के आंदोलन की आंच अब देशव्यापी होने लगी है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने आंदोलनरत डॉक्टरों के प्रति एकजुटता जताते हुए शुक्रवार से तीन दिन के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के साथ सोमवार, 17 […]

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कोलकाता/नयी दिल्ली : कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में दो जूनियर डॉक्टरों की सोमवार को बेरहमी से पिटाई मामले को लेेकर डॉक्टरों के आंदोलन की आंच अब देशव्यापी होने लगी है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने आंदोलनरत डॉक्टरों के प्रति एकजुटता जताते हुए शुक्रवार से तीन दिन के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के साथ सोमवार, 17 जून को हड़ताल का आह्वान किया है.

इस दौरान आपात सेवाएं बहाल रहेंगी. वहीं, शुक्रवार को दिल्ली में सरकारी एवं निजी अस्पतालों के चिकित्सकों ने कोलकाता में आंदोलनरत अपने साथियों के प्रति एकजुटता जताने के लिए मार्च निकाला.
महाराष्ट्र, उप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में भी डॉक्टरों ने जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया. दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में बड़ी संख्या में डॉक्टर हड़ताल पर रहे. डॉक्टरों की हड़ताल से मुंबई, कोलकाता, नागपुर, पटना, हैदराबाद, वाराणसी समेत कई शहरों में चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ा. उधर, पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रही.
कोलकाता में जुलूस निकाला गया, जिसमें राज्य के प्रसिद्ध डॉक्टरों, फिल्म अभिनेत्री अपर्णा सेन, मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन, सुजात भद्र सहित बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टरों ने हिस्सा लिया.
वहीं, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बीच अब विभिन्न मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉक्टरों ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया है. चार मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल ने इस्तीफे की पेशकश की है, जबकि शुक्रवार की शाम तक राज्य के विभिन्न अस्पतालों के 513 डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया. दिल्ली में चिकित्सकों के एक समूह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से मुलाकात की और अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की. हर्षवर्धन ने चिकित्सकों को भरोसा दिलाया कि वह उनकी मांग पर विचार करेंगे.
केंद्रीय मंत्री ने कहा, बुरी तरह से पीटे जाने के बावजूद डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री से केवल यही कहा कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करायी जाए और हिंसा में शामिल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन ऐसा करने की जगह उन्होंने डॉक्टरों को चेतावनी और अल्टीमेटम दे दिया, जिससे देशभर के चिकित्सकों में नाराजगी फैल गयी और वे हड़ताल पर चले गये. डॉ हर्षवर्धन शनिवार को देश के सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर अस्पतालों में डॉक्टरों को सुरक्षित माहौल मुहैया कराने को कहेंगे.
उधर, पश्चिम बंगाल में इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों के इस्तीफे की बाबत अस्पताल प्रबंधनों ने कहा कि सीनियर डॉक्टरों पर हाल के दिनों में काफी दबाव बढ़ रहा था. इनडोर विभाग के अलावा उन्हें आपातकालीन विभाग और ऑपरेशन सब कुछ संभालना पड़ रहा था. जूनियर डॉक्टरों के न रहने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. सीनियर डॉक्टरों के इस्तीफे से रोगियों को पहले से हो रही परेशानी में और इजाफा हो गया है.
चार प्रिंसिपल समेत बंगाल के 513 चिकित्सकों ने दिया इस्तीफा
हड़ताल वापस लेने के लिए रखीं छह शर्तें
इंडियन मेडिकल कॉलेज ने गृह मंत्री को लिखा पत्र, डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए बने कानून.
ममता बनर्जी के भतीजे डॉ आवेश व टीएमसी सांसद कोकोली के बेटे भी विरोध प्रदर्शन में शामिल
डॉक्टरों ने वार्ता की पेशकश ठुकरायी, रखी शर्त- सीएम मांगें माफी
शुक्रवार की देर रात ममता बनर्जी ने आंदोलनकारी चिकित्सकों को गतिरोध सुलझाने के लिए राज्य सचिवालय में बैठक के लिए बुलाया, पर चिकित्सकों ने निमंत्रण ठुकरा दिया. नाराज डॉक्टरों अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. उन्होंने ममता बनर्जी से बिना शर्त माफी की मांग की है. डॉक्टरों ने काम पर लौटने के लिए छह शर्तें रखी हैं, जिनमें ममता बनर्जी की माफी भी शामिल है.
राज्य में सोमवार से हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि हम सीएम ममता बनर्जी से उनके गुरुवार के भाषण के लिए बिना शर्त माफी चाहते हैं. वहीं इंडियन मेडिकल कॉलेज ने भी गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग की है. डॉक्टरों की शर्तों में एक मांग यह भी है कि सीएम को हॉस्पिटल आकर घायल डॉक्टरों से मिलना होगा. डॉक्टरों ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की भावुक अपील को भी ठुकरा दिया है.
रिम्स ओपीडी : 1200 से ज्यादा मरीज लौटे
रांची : कोलकाता मेेें डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के विरोध में राष्ट्रीय आह्वान पर शुक्रवार को रिम्स मेें ओपीडी पूरी तरह ठप रहा. यहां ओपीडी बंद होने से करीब 1200 मरीजों को निराशा हाथ लगी. सभी ओपीडी में सुबह 9:15 बजे से मरीजों की कतार लगी हुई थी, लेकिन डॉक्टर चेेंबर मेें नहीं थे.
करीब 9:45 बजे ओपीडी में सीनियर डॉक्टरों के अाने का सिलसिला शुरू हुआ. लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने उनको बाहर कर दिया. आंदोलनकारी डाॅक्टर अपने सीनियर से आग्रह कर रहे थे कि वह उनके विराेध का समर्थन करेें. जूनियर के आग्रह पर सीनियर डॉक्टर कुछ देर परामर्श देने बाद चेंबर से बाहर आ गये.
ओपीडी ठप रहने से सबसे ज्यादा परेशानी मेडिसिन विभाग और बच्चा वार्ड के ओपीडी में हुई. बीमार बच्चाें को लेकर पहुंचे परिजनों को बैरंग लौटना पड़ा. आर्थिक रूप से कमजोर मरीज सदर अस्पताल मेें इलाज कराने गये. कुछ मरीज इलाज के लिए इमरजेंसी भी पहुंचे, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगने पर निजी अस्पताल व क्लिनिक चले गये. रिम्स में प्रतिदिन 1500 से ज्यादा मरीज अोपीडी में परामर्श लेने के लिए आते हैं.
हर्षवर्धन बोले : डॉक्टरों को धमका रहीं ममता हड़ताल को प्रतिष्ठा न बनाएं
ममता बोली : बंगाल में रहना है, तो बांग्ला सीखनी होगी
हाइकोर्ट ने कहा, हड़ताल खत्म कराएं
राज्यपाल बोले, मेरा फोन नहीं उठा रहीं ममता
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