लोकसभा चुनाव: दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं पर जीत का है सारा दारोमदार, जानें सीटों का गणित

अंजनी कुमार सिंहनयी दिल्ली::दिल्ली के सात लोकसभा क्षेत्रों में से दो, पूर्वी और उत्तर पूर्वी दिल्ली, संसदीय क्षेत्रों में जीत-हार की चाबी पूर्वांचली के हाथों में है. यही कारण है कि यहां की मुख्य पार्टियां भाजपा, कांग्रेस और आप पूर्वांचली को अपने पाले में करने के लिए दिन-रात एक किये हुए हैं, लेकिन पूर्वांचली मतदाता […]
अंजनी कुमार सिंह
नयी दिल्ली::दिल्ली के सात लोकसभा क्षेत्रों में से दो, पूर्वी और उत्तर पूर्वी दिल्ली, संसदीय क्षेत्रों में जीत-हार की चाबी पूर्वांचली के हाथों में है. यही कारण है कि यहां की मुख्य पार्टियां भाजपा, कांग्रेस और आप पूर्वांचली को अपने पाले में करने के लिए दिन-रात एक किये हुए हैं, लेकिन पूर्वांचली मतदाता अब भी खुल कर कुछ बोलने को तैयार नहीं है.
इसका एक कारण यह भी है कि पूर्वांचलियों ने दिल्ली को संवारने में अपना सब कुछ लगा दिया, लेकिन राजनीतिक दलों ने उनको अब तक छलने का ही काम किया है.बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड से यहां आकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों की स्थिति में आज भी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. उनकी कॉलोनियों में आज भी शुद्ध पेयजल, सीवर, रोड, लाइट की व्यवस्था नहीं हो पायी है.
फिर नहीं बन सकी यमुना की सफाई बड़ा मुद्दाचुनाव आते हैं, राजनीतिक दलों की ओर से तमाम तरह की घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन बाद में भुला दिया जाता है. इन क्षेत्रों से गुजरने वाली यमुना नदी को देख कर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. पूर्वांचली के सबसे महत्वपूर्ण पर्व छठ के अवसर पर यमुना की सफाई की जाती है. सभी दल के बड़े नेता घाटों का दौरा करते हैं, लेकिन पर्व के समाप्त होते ही यमुना को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है.
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