लोकसभा चुनाव 1952 में संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को एक मक्खन वाले ने हरा दिया था. किस्सा कुछ ऐसा है कि कई मामलों में कांग्रेस के अड़ियल रुख के चलते आंबेडकर ने सितंबर 1951 में विधि एवं न्याय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था.
इसी दौरान चुनाव आ गए तो आजादी के दौरान 1942 में बनायी शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन को सक्रिय कर आंबेडकर चुनाव में उतर पड़े. कुल 35 उम्मीदवार खड़े किये. खुद बॉम्बे उत्तर की सीट से चुनाव लड़े. कांग्रेस ने उनके मुकाबले दूध कारोबारी सदोबा नारायण काजोलकर को उतारा. जवाहरलाल नेहरू ने उनके लिए सभाएं करवायीं.
काजरोलकर ने मराठी में ‘कुथे तोघटनाकर आंबेडकर, आनी कुथे हा लोनिविक्या काजरोलकर’ यानी ‘कहां संविधान निर्माता आंबेडकर और कहां ये मक्खन बेचने वाला काजरोलकर’ जैसे जुमले चलाये. इस चुनाव में आंबेडकर 15 हजार वोट से हारे. काजरोलकर को 1,38,137 तथा आंबडेकर को 1,23,576 वोट. इसे तब की सबसे अप्रत्याशित हार मानी गयी.
