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पढ़ें खास रिपोर्ट: राजनीतिक फायदे के लिए यूपी-बिहार के लोग बनते रहे हैं टारगेट

Updated at : 19 Dec 2018 7:06 AM (IST)
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पढ़ें खास रिपोर्ट: राजनीतिक फायदे के लिए यूपी-बिहार के लोग बनते रहे हैं टारगेट

नेशनल कंटेंट सेल मध्यप्रदेश के नये सीएम कमलनाथ द्वारा बिहार और यूपी के लोगों के खिलाफ विवादित बयान देने पर बिहार में राजनीति तेज हो गयी है. भाजपा समेत सभी पार्टियों ने कमलनाथ के बयान का विरोध करना शुरू कर दिया है. भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि कांग्रेस, बिहार और यूपी में कमजोर […]

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नेशनल कंटेंट सेल

मध्यप्रदेश के नये सीएम कमलनाथ द्वारा बिहार और यूपी के लोगों के खिलाफ विवादित बयान देने पर बिहार में राजनीति तेज हो गयी है. भाजपा समेत सभी पार्टियों ने कमलनाथ के बयान का विरोध करना शुरू कर दिया है. भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि कांग्रेस, बिहार और यूपी में कमजोर हुई है. लगता है कि इसका बदला वह वहां के लोगों के लेना चाह रही है. वहीं, राजद ने कमलनाथ के बयान से किनारा कर लिया है. राजद के एक नेता ने कहा कि बिहार देश का एक अंग है.

बिहार के लोग अपने टैलेंट की बदौलत किसी भी परीक्षा में अव्वल आते हैं. ऐसे में किसी भी नेता को इस तरह का बयान देने से बचना चाहिए. हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब यूपी-बिहार के लोगों को अपने राजनीतिक फायदे के लिए टारगेट किया गया हो. महाराष्ट्र और असम जैसे राज्यों से उत्तर भारतीयों पर हमले की खबरें लगातार आती रहती हैं.

2003 में असम में बिहार के परीक्षार्थी बने निशाना
असम में 2003 में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा देने गये बिहार के परीक्षार्थियों के साथ मारपीट की गयी. हमले में 38 से ज्यादा लोगों के मरने की खबरें आयी थीं. बाद में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों को भी निशाना बनाया गया. इसे रोकने के लिए शांति मार्च निकाले गये जिसमें ‘असमिया-बिहारी भाई-भाई’ के नारे लगाये गये थे.

मुंबई में आतंकवादी घटनाओं का जिम्मेदार भी यूपी-बिहार!
शिवसेना की क्षेत्रवादी घृणा को मनसे बनाकर राज ठाकरे ने आगे बढ़ाया. बिहार के विरुद्ध हिंसा को भड़काया. बयान दिया कि बिहार तक यह संदेश पहुंचना चाहिए कि मुंबई में उनके लिए जगह नहीं बची है. राज ठाकरे मुंबई में आतंकवादी घटनाओं का जिम्मेदार भी यूपी-बिहार वालों को ठहरा चुके हैं.

कोटा में बिहार के छात्रों का विरोध
कोटा में बिहार के लोगों को लेकर काफी विरोध हुआ था. कोटा में बड़ी संख्या में बिहार-यूपी के छात्र पढ़ते हैं. छात्रों के बीच लड़ाई से पैदा हुए विवाद में राजनेता भी कूद पड़े थे. उस समय के भाजपा विधायक भवानी सिंह राजावत ने पूरी गैर जिम्मेदारी के साथ कह दिया कि बिहार के छात्र शहर का माहौल खराब कर रहे हैं, उन्हें शहर से निकाला जाना चाहिए.

‘एक बिहारी सौ बीमारी’ कहा था बाल ठाकरे ने
शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने कहा था कि बिहारी अपने साथ बीमारी और लड़ाई लेकर आते हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि एक बिहारी सौ बीमारी, दो बिहारी लड़ाई की तैयारी, तीन बिहारी ट्रेन हमारी, पांच बिहारी तो सरकार हमारी.

शीला दीक्षित ने यूपी-बिहार के लोगों को अपराध का कारण बताया
शीला दीक्षित तब दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं, उन्होंने पूरी लापरवाही के साथ कहा था, यूपी-बिहार से होने वाले पलायन के कारण नयी दिल्ली के मूलभूत ढांचे पर अतिरिक्त दबाव है. इतना ही नहीं, शीला ने दिल्ली में बढ़ते अपराध में यूपी-बिहार के लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया था.

गुजरात में बिहारी कह कर पीटा, भूखे-प्यासे बंधक बनाया
इसी साल गुजरात में एक बच्ची से रेप के बाद बिहार के लोगों को निशाना बनाया गया. मजदूरों का बंधक बनाकर कई दिनों तक भूखे-प्यासे रखा गया. मजदूरी नहीं दी गयी, बिहारी कह कर मारा-पीटा गया.

2008 में यूपी-बिहार के छात्रों को मनसे ने पीटा
2008 में राज ठाकरे की पार्टी मनसे के कार्यकर्ताओं ने मुंबई में यूपी-बिहार के लोगों को निशाना बनाया था. मुंबई में रेलवे की परीक्षा में शामिल होने आये छात्रों के साथ मारपीट की गयी. उनके एडमिट कार्ड तक फाड़ डाले गये थे.

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