राफेल मुद्दा : कांग्रेस ने राहुल की माफी मांगने की संभावना नकारी, जेपीसी के गठन की मांग दोहरायी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Dec 2018 4:53 PM
नयी दिल्ली : राफेल मुद्दे पर कांग्रेस ने जेपीसी गठित करने की अपनी मांग को दोहराते हुए इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के माफी मांगने की संभावना को शुक्रवार को साफ नकार दिया. इसके साथ ही पार्टी ने भाजपा को चुनौती दी कि यदि उन्हें लगता है […]
नयी दिल्ली : राफेल मुद्दे पर कांग्रेस ने जेपीसी गठित करने की अपनी मांग को दोहराते हुए इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के माफी मांगने की संभावना को शुक्रवार को साफ नकार दिया. इसके साथ ही पार्टी ने भाजपा को चुनौती दी कि यदि उन्हें लगता है कि इस मुद्दे पर गांधी ने कुछ गलत कहा है तो सत्ता पक्ष को उनके विरुद्ध विशेषाधिकार हनन नोटिस देना चाहिए.
उच्चतम न्यायालय ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी. इसी फैसले का उल्लेख करते हुए लोकसभा में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष से देश और संसद से माफी मांगने को कहा. सत्ता पक्ष की इस मांग के बारे में पूछे जाने पर लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद भवन परिसर में कहा, ‘‘माफी क्यों मांगें? हमने तो सदन में कहा है कि यदि उन्होंने झूठ बोला है तो आप (सत्ता पक्ष) विशेषाधिकार हनन नोटिस लाइये. खड़गे ने कहा कि उन्होंने (उच्चतम न्यायालय) राफेल विमान सौदे में मूल्य निर्धारण के बारे में कुछ नहीं बोला. यह तो एक जनहित याचिका थी. इसका हमसे कोई संबंध नहीं है. कांग्रेस नेता ने कहा कि हम इसे संसद में उठा रहे हैं जो देश की सर्वोच्च संस्था है.
उन्होंने ने कहा कि सरकार को संसद को यह बताना चाहिए कि वह इस मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) क्यों नहीं बनाना चाहते हैं? जेपीसी तो दोनों सदनों की होती है. पीआईएल के फैसले से यह नहीं कहा जा सकता कि कोई आरोपों से बरी हो गया. उच्चतम न्यायालय तो केवल उन्हीं मुद्दों की जांच करेगा जो याचिका में उठाये गये हैं. वहीं जेपीसी मुद्दे की व्यापक जांच करेगी. सारी फाइलों पर गौर किया जायेगा. लोकसभा में शुक्रवार को राफेल मुद्दे पर खड़गे कुछ बोलने के लिए खड़े हुए थे. किंतु अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें यह कहते हुए अनुमति नहीं दी कि पहले वह सदन में हंगामा और नारेबाजी कर रहे अपने दलों के सदस्यों को चुप करवायें.
इससे पहले पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेपीसी की जांच से क्यों डर रहे हैं? उन्होंने संवाददाताओं से कहा, हमने पहले ही कहा था कि उच्चतम न्यायालय राफेल के भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर सकता क्योंकि नियमों के तहत उसका दायरा सीमित है. इसलिए हमने न्यायालय का रुख नहीं किया था. सुरजेवाला ने कहा कि इस मामले में भ्रष्टाचार की कई परते हैं. इसकी छानबीन सिर्फ जेपीसी जांच से हो सकती है. इसमें तथ्य और साक्ष्य दोनों की छानबीन होनी है. उन्होंने कहा, हम प्रधानमंत्री को चुनौती देते हैं कि आप जेपीसी से जांच करायें. आप जेपीसी की जांच से क्यों डर रहे हैं? उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब मिलना चाहिए कि 42 हजार करोड़ रुपये का चूना कैसे लगा? 30 हजार करोड़ रुपये का ठेका रिलायंस को कैसे दिया गया? सुरक्षा मामले की कैबिनेट समिति की अवहेलना क्यों की गयी?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय को आधी-अधूरी और एकतरफा जानकारी दी है. सुरजेवाला ने दावा किया कि कहा, यहां दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है. गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदी के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी. साथ ही शीर्ष अदालत ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करनेवाली सभी याचिकाओं को खारिज किया. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है.
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