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भीमा-कोरेगांव हिंसा: पुलिस ने छापेमारी करके पांच को दबोचा, जानें पूरा मामला

Updated at : 07 Jun 2018 1:00 PM (IST)
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भीमा-कोरेगांव हिंसा: पुलिस ने छापेमारी करके पांच को दबोचा, जानें पूरा मामला

मुंबई : महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में पिछले साल दिसंबर में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ पर आयोजित सभा के दौरान हुई जातीय हिंसा के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस गिरफ्तारी को लेकर गुरुवार को पुणे के जॉइंट पुलिस कमिश्नर रवींद्र कदम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और बताया कि मामले में […]

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मुंबई : महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में पिछले साल दिसंबर में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ पर आयोजित सभा के दौरान हुई जातीय हिंसा के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस गिरफ्तारी को लेकर गुरुवार को पुणे के जॉइंट पुलिस कमिश्नर रवींद्र कदम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और बताया कि मामले में 8 जनवरी की एफआइआर में कई आरोपी ऐसे भी हैं, जिनका नाम पहले नक्सलियों के साथ संबंधों को लेकर आ चुका है. हम इस मामले में जांच कर रहे हैं, इनमें से कुछ के घरों पर हमने छापे भी मारे हैं.

कदम ने बताया कि रोना विल्सन के घर से हमें पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और कुछ अन्य कागजात प्राप्त हुए हैं जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. जांच में हमे रोना विल्सन और सुरेंद्र गाडलिंग के नक्सलियों से संबंध होने का पता चला है. हमें इनके नक्सलियों के संबंध होने की बात पता चली और इनके तीन अन्य लोगों से भी लिंक के बारे में पता चला. हमने उन तीनों को गिरफ्तार किया है.

उन्होंने बताया कि हमने सुरेंद्र गाडलिंग को कल सुबह कोर्ट में पेश किया और वह अभी आठ दिन की पुलिस कस्टडी में है. अन्य आरोपियों को आज दोपहर कोर्ट के सक्षम पेश किया जाएगा. आपको बता दें कि दिल्ली से रोना विल्सन, मुंबई से सुधीर धवाले और नागपुर से शोमा सेन, महेश राउत तथा सुरेंद्र गाडलिंग को गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है.

क्या है पूरा मामला

गौर हो कि 31 दिसंबर 2017 और 1 जनवरी 2018 को पुणे के पास शनिवारवाड़ा में दलित कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने पेशवाओं और अंग्रेजों के बीच हुए भीमा-कोरेगांव युद्ध के 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक जनसभा का आयोजन किया था. इस सभा को मराठी मैगजीन “विद्रोही’ के संपादक सुधीर धवाले ने ही आयोजित किया था जिसमें हजारों दलित शामिल हुए थे. नागपुर के वकील और दलित, आदिवासियों के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र गाडगिल पर माओवादी हिंसा में गिरफ्तार लोगों को कानूनी मदद मुहैया कराने का भी आरोप है. नागपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शोमा सेन और उनके पति तुषार क्रांति भट्‌टाचार्य को नक्सलियों से संपर्क के आरोप में 2010 में नागपुर स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था. वहीं महेश राउत पूर्व मंत्री के करीबी है और उन पर माओवादियों से संबंध रखने का भी आरोप है. पुलिस के मुताबिक कबीर कला मंच के कार्यकर्ताओं ने भड़काऊ भाषण दिये, जिससे कोरेगांव में हिंसा के हालात बने और इसी साल 3 जनवरी को आसपास के गांवों में पथराव और हिंसक झड़प हो गयी थी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी और कई लोग घायल हुए थे.

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