जे डे हत्याकांड केस में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन व आठ अन्य को उम्रकैद की सजा

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पत्रकार ज्योतिर्मय डे हत्याकांड में छोटा राजन एवंआठअन्य को मकोका कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनायी.

मुंबई : कारोबारी नगरी मुंबई में सात साल पुराने पत्रकार जेडे हत्याकांड में विशेष मकोका अदालत ने बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए अंडरवर्लड डॉनछोटा राजन को दोषी ठहराया है जबकि पत्रकार जिगना वोरा और जोसेफ पॉलसेन को बरी किया है.अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर अडकर ने इस मामले में 11 आरोपियों से 9 को दोषी करार दिया है और दो को बरी कर दिया है.छोटा राजन सहित सभी नौ आरोपियों को मकोका अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनायी. फिलहाल छोटा राजन नयी दिल्ली के तिहाड़ सेंट्रल जेल में बंद है. आपको बता दें कि 2011 में मुंबई के पवई इलाके में अंग्रेजी अखबार मिड डे के लिये काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार ज्योति डे की अंडरवर्ल्ड के शूटरों ने 5 गोलियां मारकर हत्या कर दी गयी थी.


क्या है जेडे हत्याकांड?

11 जून 2011 की बात है. इस दिन दोपहर मुंबई के पवई इलाके में अंग्रेजी अखबार मिड डे के लिये काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार ज्योति डे की 5 गोलियां मारकर अंडरवर्ल्ड के शूटरों ने हत्या कर दी थी. हत्या के समय जेडे अपनी मोटरसाईकिल पर सवार थे. शूटर उनका पीछा काफी देर से कर रहे थे. जेडे पर हत्यारों ने पीछे से गोलियां दागी. गोली लगने के बाद उन्हें पास ही के हीरानंदानी अस्पताल ले जाया गया लेकिन तबतक देर हो चुकी थी. मुंबई पुलिस ने इस मामले की तहकीकात शुरू की और जल्द ही जेडे पर गोलियां बरसाने वाले शूटरों को गिरफ्तार किया.

शक में हुई हत्या

मामले की छानबीन आगे बढने पर मुंबई पुलिस ने पाया कि अंडरवर्लड डॉन छोटा राजन ने शक की बिनाह पर जेडे की हत्या करवा दी थी. राजन को शक था कि जेडे उसके दुश्मन दाऊद इब्राहिम से मिल चुके हैं. इस वजह से वे अपने अखबार में छोटा राजन के खिलाफ खबरें लिखने का काम कर रहे थे. राजन को ये भी शक था कि उसे मरवाने के लिये जेडे डी कंपनी की मदद कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि जेडे को लंदन और फिलीपिंस में मिलने के लिए कॉल किया गया था.

जेडे की कलम उगल रही थी मुंबई अंडरवर्ल्ड की बात

यहां आपको बता दें कि जीरो डायल जेडे की लिखी हुई किताब है. इसे मिलाकर जेडे मुंबई अंडरवर्ल्ड पर 2 किताबें लिख चुके थे. जेडे अपनी तीसरी किताब की तैयारी में जुटे थे जो छोटाराजन पर थी. किताब में वे छोटा राजन की जिंदगी के हर पक्ष को पेश करना चाहते थे. छोटा राजन पर रिसर्च के लिए वे कई लोगों से मिल भी चुके थे जिनमें छोटा राजन के दुश्मन डी कंपनी के लोग भी शामिल थे. बस इसी बात ने राजन के मन में शक पैदा कर दिया और उसे लगने लगा डे दाऊद गिरोह के लिए काम करने लगे हैं.

चिंदी- फ्राम रेग्स टू रिचेस

जो किताब जेडे उस वक्त लिख रहे थे उसका नाम था 'चिंदी- फ्राम रेग्स टू रिचेस'. इस किताब में छोटा राजन की एक मामूली डॉन से बडे अंडरवर्लड डॉन बनने तक की कहानी थी. पुलिस की मानें तो छोटा राजन के मन में जेडे के प्रति नफरत पैदा करने के लिये एक अन्य पत्रकार जिगना वोरा ने भी अहम भूमिका निभाने का काम किया. जिगना ने ही राजन को जेडे से जुडी जानकारी उपलब्ध करायी. पुलिस का कहना है कि जिगना को जेडे की हत्या की साजिश की जानकारी थी और इसीलिये उसको भी इस मामले में आरोपी बनाया गया.

मामले में ये थेआरोपी
हमले के बाद खुद को छोटा राजन बतानेवाले शख्स ने मुम्बई के कुछ पत्रकारों को फोन किया और जेडे की हत्या की जिम्मेदारी ली. उसका कहना था कि जेडे को मारकर उसने गलती की है लेकिन जेडे के खिलाफ उसके कान भरे गये थे. वहीं जिगना वोरा की दलील है कि वो बेगुनाह थी. जेडे हत्याकांड में उसकी कोई भूमिका नहीं थी. पुलिस ने जांच में अपनी कमजोरी छिपाने के लिये उसे आरोपी बना दिया. मामले में छोटा राजन, शूटर सतीश थंगप्पन, पत्रकार जिगना वोरा सहित कुल 13 आरोपी थे, जिनमें एक आरोपी विनोद असरानी की मुकदमे के दौरान मौत हो गयी जबकि नयन सिंह भिष्ट नाम का एक आरोपी अब भी फरार चल रहा है.

छोटा राजन से नहीं हो पायी
थीपूछताछ
जेडे हत्याकांड की शुरुआती जांच मुंबई पुलिस ने की और शूटरों सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन जब छोटा राजन को इंडोनेशिया से पकड़ कर भारत लाया गया तब मुंबई पुलिस को उससे पूछताछ का मौका नहीं मिला. उस वक्त महाराष्ट्र सरकार ने जेडे मर्डर केस सहित छोटा राजन के खिलाफ दर्ज करीब 70 मामले सीबीआई को सौंपे.

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