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WORLD TB DAY : टीबी बीमारी से जुड़े दस अहम तथ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोशिशों से वर्ष 2000 से लेकर 2018 तक दुनियाभर में पांच करोड़ तीस लाख मरीजों की जिंदगी बचायी जा चुकी है. टीबी के संक्रमण से होने वाले मृत्यु दर में 37 प्रतिशत की कमी हुई है. तमाम उपलब्धियों के बावजूद भारत में टीबी अब भी बहुत बड़ी समस्या है. टीबी से […]

विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोशिशों से वर्ष 2000 से लेकर 2018 तक दुनियाभर में पांच करोड़ तीस लाख मरीजों की जिंदगी बचायी जा चुकी है. टीबी के संक्रमण से होने वाले मृत्यु दर में 37 प्रतिशत की कमी हुई है. तमाम उपलब्धियों के बावजूद भारत में टीबी अब भी बहुत बड़ी समस्या है. टीबी से जुड़े दस अहम तथ्य .

1. देश में लेप्रोसी, पोलियो और टीबी ने महामारी का रूप ले लिया था. इन घातक बीमारियों से गांव – के – गांव प्रभावित हो जाते थे. अब इस पर काफी हद तक काबू पाया जा सका है. लेकिन टीबी की बीमारी भारत के लिए अब भी बड़ी समस्या के रूप में है.
2. ट्यूबरकलोसिस के मामले में भारत की स्थिति दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले और भी ज्यादा संगीन है. दुनिया में टीबी के सबसे ज्यादा मरीज (करीब 28 लाख) भारत में हैं और 2016 में इस रोग से देश में 4.23 लाख रोगियों की मौत हुई
3. संक्रमित बीमारी से होने वाली मौतों में टीबी नंबर वन पर है. अब नये किस्म के ट्यूबरकलोसिस ( मल्टीड्रग – रेसिस्टेंट टीबी ) से मरीजों की तकलीफें बढ़ रही है.
4. टीबी पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका है, लेकिन टीबी के रोगाणुओं में भी एंटीबायोटिक्स दवाओं से लड़ने और उन्हें नाकाम करने की क्षमता (एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस) पैदा हो गयी है.
5. मल्टीड्रग – रेसिस्टेंट टीबी ( एमडीआर – टीबी) सबसे बड़ा हेल्थ क्राइसिस है. WHO के मुताबिक एंटी माइक्रोबियल रेस्सिटेंट टीबी के 6 लाख नये मरीज पाये गये हैं. इनमें आधे से ज्यादा मरीज भारत और चीन के मरीज है.
6. खनन वाले इलाकों में टीबी का संक्रमण ज्यादा है. झारखंड के कई इलाके टीबी से बुरी तरह प्रभावित हैं. वहीं बिहार में टीबी मरीज की संख्या करीब 25 लाख है
7. प्रधानमंत्री ने आज ट्वीट कर कहा कि दुनिया ने जहां 2030 तक टीबी का उन्मूलन करने का लक्ष्य रखा है, हम भारत में 2025 तक टीबी मुक्त होना चाहते हैं. हालिया ‘दिल्ली एंड टीबी समिट’ में मैंने इस विषय के बारे में बात की."
8 टीबी को खत्म करने के लिए हमें रेपिड टेस्ट की जरूरत होती है. मौजूदा दौर में इस बीमारी से लड़ने के लिए जितने पैसे खर्च होने की जरूरत है, वह अपर्याप्त है.
9.टीबी बीमारी से लड़ने के लिए तीन चीजों की जरूरत है. यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, सोशल एक्शन और रिसर्च की जरूरत है. इस बीमारी का सबसे दुखद पहलू यह कि ज्यादातर गरीब तबकों में यह बीमारी है.
10. रॉबर्ट कोच ने 24 मार्च 1882 को टीबी के जीवाणु की खोज करने की घोषणा की थी, जिससे इस बीमारी की इलाज ढूंढ़ने में मदद मिली. इसलिए, 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है
Prabhat Khabar Digital Desk
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