देश की न्यायिक बिरादरी हतप्रभ, सुप्रीम कोर्ट विवाद को लेकर बड़े वकील और न्यायविदों ने क्या कहा

Updated at : 12 Jan 2018 3:49 PM (IST)
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देश की न्यायिक बिरादरी हतप्रभ, सुप्रीम कोर्ट विवाद को लेकर बड़े वकील और न्यायविदों ने क्या कहा

भारत के न्यायिक व्यवस्था में भूचाल मचा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के खिलाफ चार जज उतर आये हैं. चार जजों ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ मनमाने ढंग से कोर्ट के संचालन का आरोप लगाया है. इस घटना के बाद से हड़कंप मच गया है. देश में […]

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भारत के न्यायिक व्यवस्था में भूचाल मचा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के खिलाफ चार जज उतर आये हैं. चार जजों ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ मनमाने ढंग से कोर्ट के संचालन का आरोप लगाया है. इस घटना के बाद से हड़कंप मच गया है. देश में राजनीतिक दल, वकील और बौद्धिक जगत इस फैसले से सकते में हैं. सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मामला बताते हुए इस मुद्दे से पल्ला झाड़ लिया, तो कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया. इस बीच खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वोच्च अदालत के सुप्रीम संकट पर कानून मंत्री रविशंकर से बातचीत की है.

मुकुल मुदगल
न्यायमूर्ति मुद्गल ने कहा कि चार वरिष्ठतम न्यायाधीश मुद्दे को सामने ला रहे थे, जो उनके अनुसार जनता के ध्यानार्थ लाना जरूरी था उन्होंने कहा कि उनके पास जनता के बीच जाने की जरूर ठोस वजहें रही होंगी और ‘‘वे प्रचार के भूखे न्यायाधीश नहीं हैं और अनावश्यक प्रचार के लिये लालायित नहीं रहते हैं.
इंदिरा जयसिंह
‘ संवाददाता सम्मेलन को ‘स्वागत योग्य’ कदम बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने चार न्यायाधीशों को ‘‘साहसिक कदम’ के लिये बधाई दी. उन्होंने कहा, ‘‘जैसा उन्होंने कहा कि वे इतिहास का कर्ज अदा कर रहे हैं, वे देश को बता रहे हैं कि कुछ गलत हो रहा है और उसे ठीक किये जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि संवाददाता सम्मेलन का मकसद ‘‘संस्थान के प्रति फर्ज निभाते हुए आम सहमति बनाना और इस बात को सुनिश्चित करना था कि इस संस्थान का अस्तित्व आपके और मेरे लिये रहे.
सलमान खुर्शीद
कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील सुप्रीम कोर्ट के वकील सलमान खुर्शीद ने पूरे मामले को बेहद दुखद बताया है. उन्होंने कहा कि पूरा घटनाक्रम दुखद है. भारत के सर्वोच्च न्यायिक व्यवस्था के अंदर इस हद तक का रोष है कि लोगों को प्रेस के सामने आना पड़ा.
पीबी सावंत
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पीबी सावंत ने कहा कि जजों का मीडिया के सामने आना अभूतपूर्व कदम है. इसका मतलब यही कि न्यायधीशों के बीच गंभीर विवाद है, यह विवाद या तो मुख्य न्यायधीश के साथ है या फिर न्यायधीशों के बीच है.
उज्जवल निकम
वरिष्ठ वकील व कसाब के केस के बाद उज्जवल निकम ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था के लिए यह काला दिन है. आज के बाद से हर सामान्य व्यक्ति न्यायिक व्यवस्था को शक की नजरों से देखेगा. हर फैसले पर सवाल खड़ा किया जायेगा.
सुब्रमण्यन स्वामी
स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री को पहल करनी चाहिये और पूरे हालात का विचार-विमर्श के जरिये समाधान करने के लिये प्रधान न्यायाधीश और चार न्यायाधीशों से संपर्क करना चाहिए. हालांकि, न्यायमूर्ति सोढी ने मीडिया से संपर्क करने के शीर्ष न्यायाधीशों के कदम पर सवाल उठाये और पूछा कि संवाददाता सम्मेलन के जरिये कैसे उच्चतम न्यायालय को चलाया जा सकता है.
प्रशांत भूषण
‘ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी इस घटनाक्रम को अप्रत्याशित बताया और कहा कि न्यायाधीशों ने यह संवाददाता सम्मेलन करने का अतिवादी फैसला बेहद मजबूर करने वाली परिस्थतियों में किया गया होगा. भूषण ने कहा, ‘‘ये चार न्यायाधीश बेहद जिम्मेदार हैं.
जस्टिस आरएस सोढ़ी
न्यायमूर्ति सोढी ने कहा, ‘‘मैं इन बातों के नतीजों से दुखी हूं. यह डरावना है. संवाददाता सम्मेलन के जरिये आप कैसे उच्चतम न्यायालय को चला सकते हैं. क्या आप जनमत संग्रह करने जा रहे हैं और लोगों से पूछने जा रहे हैं कि क्या सही है और क्या गलत है.’
श्रीहरि एनी, अटार्नी जनरल
पूर्व अटार्नी जनरल वे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज हैं और वरिष्ठता में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के बाद आते हैं. अगर वे इस तरह का कदम उठाते हैं तो बिना सोच – विचार के नहीं किये होंगे. यह सोचने वाली बात है कि चारों जज इस तरह क्यों कर रहे हैं.
जस्टिस एके गांगुली, पूर्व जज, सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस एके गांगुली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा किघटना को लेकर परेशान महसूस कर रहे हैं. यह नहीं होना चाहिए था. लेकिन अगर जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया है तो जरूर कोई बड़ी वजह रहा होगा. अब लोग आशंका की दृष्टि से देखेंगे.
हंसराज भरद्वाज, कानून मंत्री
पूर्व कानून मंत्री हंसराज भरद्वाज ने कहा कि इस घटना के बाद पूरे संस्थान के प्रतिष्ठा को धक्का लगा है. न्यायिक व्यवस्था को लोकतंत्र का स्तंभ होना चाहिए. यह देखना कानून मंत्री का काम है.
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