सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिका के साथ कड़ी कूटनीति की ताकि ईरान में संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोका जा सके. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन चार अरब देशों ने 48 घंटे तक अमेरिका के साथ बातचीत की, जिसके बाद बुधवार को ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्होंने फिलहाल किसी हमले का फैसला नहीं किया है. उन्होंने कहा कि ईरान में हुई हत्याओं की घटनाएं अब कम हो रही हैं.
हमले को लेकर अरब देशों में डर का था माहौल
अरब देशों को डर था कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा. एक गल्फ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इन चार देशों ने वाशिंगटन को स्पष्ट कर दिया कि कोई भी हमला क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा, जिसका असर अंततः अमेरिका पर भी पड़ेगा. उन्होंने ईरान को भी चेताया कि अगर ईरान अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर कोई प्रतिक्रिया करता है, तो इससे उसके अन्य देशों के साथ संबंध प्रभावित होंगे.
रुख नरम करने पर जोर
अधिकारी ने कहा कि इस कूटनीतिक प्रयास का मुख्य उद्देश्य रुख को शांत करना और किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचना था, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता न फैले. साथ ही, यह प्रयास ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बातचीत की संभावनाओं को भी बढ़ा सकता है.
गल्फ देश डरते हैं कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो उनके देश में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान ईरानी प्रतिक्रिया का निशाना बन सकते हैं. इसके अलावा, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ऊर्जा प्रतिष्ठान भी प्रभावित हो सकते हैं.
‘लॉक एंड लोड’ से ‘हत्या रुकी’ तक
2 जनवरी को ईरान में प्रदर्शन शुरू होने के कुछ ही दिन बाद, ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने के लिए ‘लॉक और लोड’ यानी कि पूरी तरह तैयार और तत्पर है. उसके बाद के दिनों में, जब ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई जारी रखी, ट्रंप ने संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी बढ़ा दी. लेकिन इसके बीच खबरें आईं कि इजराइल और अरब देशों ने ट्रंप को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए मनाया क्योंकि ईरानी सरकार अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई थी.
अमेरिकी खून का हिसाब- लिंडसे ग्राहम
अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर और ट्रंप के समर्थक लिंडसे ग्राहम ने अरब देशों के मध्यस्थता प्रयासों की खबरों पर कहा कि यह ‘बेहद परेशान करने वाली’ है. उन्होंने कहा कि सभी हेडलाइन यह दिखा रही हैं कि हमारे तथाकथित अरब सहयोगी ईरान की तरफ से हस्तक्षेप कर रहे हैं ताकि ट्रंप की निर्णायक सैन्य कार्रवाई रोकी जा सके. ईरानी शासन ने अमेरिकी खून बहाया है और लोग सड़कों पर मारे जा रहे हैं. ग्राहम ने आगे कहा कि अगर यह सच है कि अरब देश कह रहे हैं कि ‘ईरान के खिलाफ कोई कार्रवाई जरूरी नहीं’, जबकि निर्दोष लोगों की हत्या जारी है, तो उन्हें अपने भविष्य के सहयोगियों के बारे में फिर से सोचना पड़ेगा.
ईरान में इंटरनेट एक सप्ताह से बंद है
ईरान में इंटरनेट सेवा एक सप्ताह से बंद है, जिससे यह पता लगाना मुश्किल है कि कड़ी कार्रवाई कितनी व्यापक है. ईरान ह्यूमन राइट्स (IHRNGO) के अनुसार, 14 जनवरी तक ईरान में कुल 3,428 लोगों की मौत हुई. बुधवार को ट्रंप ने कहा कि ईरान में हत्याएं और फांसी की घटनाएं अब बंद हो गई हैं. उन्होंने कहा है कि हमें बताया गया है कि ईरान में हत्याएं रुक रही हैं. यह रुक गई हैं और कोई फांसी की योजना नहीं है. मुझे भरोसेमंद स्रोत से यह जानकारी मिली है.
ये भी पढ़ें:
ग्रीनलैंड पर ट्रंप का लक्ष्य साफ, व्हाइट हाउस बोला- यूरोपीय सैनिकों से फैसला नहीं बदलेगा

