ना ''पाक''हरकत: कुलभूषण के सामने शीशे की दीवार, न मां गले लगा सकी, न ही पत्नी दर्द बांट पायी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Dec 2017 8:30 AM

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नयी दिल्ली/इस्लामाबाद: पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की उनकी मां अवंतिका और पत्नी चेतना से इस्लामाबाद में सोमवार को मुलाकात हुई. मानवीय आधार पर हुई इस मुलाकात में जाधव को अपनी मां व पत्नी से सीधे तौर पर नहीं मिलने दिया गया. उनके बीच एक शीशे की दीवार थी और इंटरकॉम […]

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नयी दिल्ली/इस्लामाबाद: पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की उनकी मां अवंतिका और पत्नी चेतना से इस्लामाबाद में सोमवार को मुलाकात हुई. मानवीय आधार पर हुई इस मुलाकात में जाधव को अपनी मां व पत्नी से सीधे तौर पर नहीं मिलने दिया गया. उनके बीच एक शीशे की दीवार थी और इंटरकॉम के जरिये बात करायी गयी.

सवाल उठ रहे हैं कि आखिर मानवीय संवेदनाओं का ख्याल पाक ने क्यों नहीं रखा? आश्चर्य की बात है कि बातचीत में जिस टेलीफोन का उपयोग किया गया, उसका स्पीकर भी ऑन था. वहां मौजूद भारतीय उप उच्चायुक्त जेपी सिंह के सामने भी एक ग्लास की दीवार थी. पिछले साल मार्च में गिरफ्तारी के बाद से जाधव की परिजनों से यह पहली मुलाकात है. करीब 40 मिनट की मुलाकात भारी सुरक्षा वाले विदेश मंत्रालय की इमारत में हुई. भारत के दबाव पर 20 दिसंबर को ही पाकिस्तान ने मां और पत्नी को जाधव से मुलाकात की इजाजत देते हुए वीजा जारी किया था. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस भेंट-मुलाकात के बाद जाधव का एक नया वीडियो संदेश भी जारी किया.

इसमें जाधव को अपनी पत्नी और मां से मुलाकात कराने के लिए पाकिस्तान सरकार का शुक्रिया अदा करते हुए दिखाया गया है. पाकिस्तान ने इस मुलाकात को देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के जन्मदिन के मौके पर मानवीय कदम के तौर पर प्रदर्शित किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने ट्वीट किया कि इस्लामी परंपराओं की रोशनी में यह मुलाकात तय की गयी और पूरी तरह मानवीय थी.

इस मुलाकात की सारी जानकारी पाकिस्तान विदेश मंत्रालय द्वारा जारी ट्वीट और तस्वीरों के माध्यम से दी गयी. इससे पहले जाधव की मां व पत्नी दुबई के रास्ते सोमवार की सुबह इस्लामाबाद पहुंचीं. एयरपोर्ट पर उतरने के बाद दोनों को सख्त सुरक्षा के बीच पहले भारतीय हाइकमिशन ले जाया गया था. फिर विदेश मंत्रालय मिलने ले जाया गया. ‘जियो न्यूज’ के मुताबिक, कुलभूषण की मां और पत्नी शाम चार बजे के आसपास भारत के लिए रवाना हो गयीं.

राजनयिक मदद कह मुकरा पाकिस्तान
इस मुलाकात में कौंसुलर एक्सेस विवाद भी सामने आया. मुलाकात से ठीक पहले पाक के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे ‘राजनयिक पहुंच’ बताया. दावा किया कि जाधव को भारत की ओर से राजनयिक मदद पहुंचाने की इजाजत मिली है. भारत ने इसे तुरंत खारिज किया. इसके बाद पाक विदेश मंत्रालय बयान से पलट गया. कौंसुलर एक्सेस का मतलब है कि पाकिस्तान भारतीय उच्चायुक्त को जाधव से बातचीत की इजाजत दे. इस दौरान कोई दखलंदाजी नहीं हो. मुलाकात की शर्तें पहले से तय हों. भारतीय उच्चायोग सीधी कानूनी मदद दे, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ.

तीन टीवी कैमरों से हुई रिकॉर्डिंग

जाधव परिवार के पहुंचने से पहले ही विदेश मंत्रालय की इमारत में थे. सात वाहनों के काफिले में जाधव के परिवारजनों को विदेश मंत्रालय लाया गया.मंत्रालय में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के दो सौ से ज्यादा जवान तैनात थे, जिनमें शार्पशूटर भी थे. मंत्रालय की ओर जानेवाली सड़कों पर यातायात बंद रखा गया. सड़कों पर भी सीसी टीवी कैमरे लगाये गये थे.

पाक बोला-यह मुलाकात अंतिम नहीं
पाकिस्तान ने जेल में बंद कथित भारतीय जासूस जाधव पर ‘भारतीय आतंकवाद का चेहरा’ होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें राजनयिक पहुंच दिये जाने के बारे में सही समय पर विचार किया जायेगा. यह भी कहा कि जाधव व उनके परिजनों की यह मुलाकात अंतिम नहीं है. मुलाकात के लिए 25 दिसंबर का दिन इसलिए चुना गया, क्योंकि इसी दिन मोहम्मद अली जिन्ना की जयंती है.

बड़ा सवाल

सीधी मुलाकात में क्या हर्ज
जब कई पाकिस्तानी अफसर मौजूद थे, तो शीशे की दीवार की क्या जरूरत आ पड़ी थी? इंटरकॉम की बंदिश क्यों रखी गयी? क्यों एक बेटा अपनी मां के पैर तक नहीं छू सका, एक पत्नी अपना दर्द बांट नहीं सकी? पाकिस्तान क्या मैसेज देना चाहता है? वैसे हर तरफ पाक के इस कदम की निंदा हुई है.

क्या है कुलभूषण मामला

पाक की सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनायी है. इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने 18 मई को फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी. भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था. इंडियन नेवी से रिटायरमेंट के बाद वे ईरान में बिजनेस कर रहे थे. वहीं, पाक का दावा है कि जाधव को जासूसी के आरोप में बलूचिस्तान से मार्च 2016 को अरेस्ट किया गया था.

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