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हज सब्सिडी खत्म करने की तैयारी में सरकार, अब देश के 9 स्थानों पर ही रहेगा प्रस्थान बिंदु

Updated at : 08 Oct 2017 7:51 AM (IST)
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हज सब्सिडी खत्म करने की तैयारी में सरकार, अब देश के 9 स्थानों पर ही रहेगा प्रस्थान बिंदु

मुंबई : केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज कहा कि केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार हज सब्सिडी को धीरे-धीरे खत्म करेगी. नकवी ने कहा, उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने 2012 में हज सब्सिडी खत्म करने का निर्देश दिया था. ऐसे में हमने समिति की अनुशंसा के मुताबिक नयी […]

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मुंबई : केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज कहा कि केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार हज सब्सिडी को धीरे-धीरे खत्म करेगी. नकवी ने कहा, उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने 2012 में हज सब्सिडी खत्म करने का निर्देश दिया था. ऐसे में हमने समिति की अनुशंसा के मुताबिक नयी हज नीति में हज सब्सिडी को धीरे-धीरे खत्म करने का फैसला किया है. सरकार ने आज नई हज नीति पेश कर दी, जिसमें 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना मेहरम के हज पर जाने की इजाजत देने और समुद्री मार्ग से हजयात्रा के विकल्प पर विचार करने सहित कई कदम सुझाए गए हैं. वहीं हज यात्रा के प्रस्थान बिंदु 21 से घटाकर नौ कर दिये जाने की सिफारिश है. समिति ने अपने रिपोर्ट में कहा है किआरोहण स्थल (ईपी) 21 से घटाकर 9 किए जाएं जो (1) दिल्ली (2) लखनऊ (3) कोलकाता (4) अहमदाबाद (5) मुंबई (6) चेन्नई (7) हैदराबाद (8) बैंगलूरू और (9) कोचीन में हों। इन आरोहरण स्थलों पर उपयुक्त हज गृहों का निर्माण किया जाए. राज्य/जिलों को प्रत्येक आरोहण स्थल के साथ उचित रूप से जोड़ा जाए.

गौरतलब है कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने 2013-17 के लिए सरकार की हज नीति की समीक्षा करने तथा हज नीति 2018-22 के लिए रूपरेखा का सुझाव देने के लिए एक समिति गठित की थी. समिति ने आज (7 अक्तूबर, 2017) मुंबई में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. इस अवसर पर सचिव (अल्पसंख्यक कार्य), श्री अमेयसिंग लुइखम, अध्यक्ष, भारतीय हज समिति, श्री चौधरी महबूब अली कैसर, सऊदी अरब में भारत के राजदूत श्री अहमद जावेद, भारतीय हज समिति के अन्य सदस्यों और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थिति थे
क्या है भारतीय हज समिति की सिफारिश
– राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के बीच सीटों का वितरण उनकी मुस्लिम आबादी के अनुपात के साथ-साथ प्राप्त आवेदनों के अनुपात में किया जाए.
– मेहरम के लिए कोटा 200 से बढ़ाकर 500 किया जाए.
– जम्मू एवं कश्मीर के लिए विशेष कोटा 1500 से बढ़ाकर 2000 किया जाए
– 500 से कम आवेदन प्राप्त करने वाले राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को अधिशेष सीटों के वितरण में प्राथमिकता दी जाएगी. इससे अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादर एवं नागर हवेली, दमन एवं दिव तथा पुडूचेरी जैसे संघ राज्य क्षेत्रों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे छोटे राज्यों को लाभ होगा.
– आवेदकों की आरक्षित श्रेणी अर्थात् 70+ तथा चौथी बार वालों को समाप्त किया जाए.
– 45 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मेहरम के बिना हज के लिए चार या इससे अधिक के समूह में जाने की अनुमति दी जाए.
– मक्का, अजीजीया और आस-पास के क्षेत्रों में केवल एक श्रेणी का आवास यात्रियों के लिए परिवहन की सुविधाओं के साथ नई, बहु-मंजिला आधुनिक इमारतों में किराये पर लिया जाए.
– बाद के वर्ष में नई, अच्छी और बड़ी इमारतों में पुनः किराये पर लेने की व्यवस्था की जाए.
– मदीना में सभी आवास केवल मरकजिया में ही किराये पर लिए जाएं.
– भारतीय हाजियों को ठहराना मीना की पारंपरिक सीमाओं के भीतर सुनिश्चित किया जाए.
– प्रत्येक तीर्थ-यात्री के लिए अदाही कूपन अनिवार्य बनाए जाएं.
– ठेकेदारों के संघ को पारदर्शी बोली प्रक्रिया से तोड़ा जाए. बेहतर बातचीत से किराये की दर नीचे लाई जाए.
-बंद कर दिए गए आरोहण स्थलों पर निर्मित सुविधाओं का उपयोग वर्ष भर प्रशिक्षण, तीर्थ-यात्रियों के अभिमुखीकरण और समुदाय के लिए अन्य उत्पादक प्रयोगों के लिए किया जाए
– पोत के द्वारा हज यात्रा करने के बारे में सऊदी सरकार से परामर्श किया जाए और उसके बाद ऐसी यात्रा के लिए बाजार की थाह लेने के लिए रूचि की अभिव्यक्ति का विज्ञापन दिया जाए।
कमिटी में कौन- कौन थे
भारतीय हज नीति की समीक्षा के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने एक समिति गठित की थी. जिसके संयोजक श्री अफजल अमानुल्लाह, आईएएस, सेवानिवृत्त, पूर्व सचिव, भारत सरकार और भूतपूर्व सीजीआई जेद्दा थे तथा जस्टिस एस. एस. पार्कर, सेवानिवृत्त बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, श्री कैसर शमीम, आईआरएस (सेवानिवृत्त), एवं पूर्व अध्यक्ष भारतीय हज समिति, श्री कमल फारूकी, प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट एवं मुस्लिम विद्वान इसके सदस्य थे.
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