क्या नरेंद्र मोदी के इस्त्राइल दौरे का आरएसएस के विचारों से भी है कनेक्शन?

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क्या नरेंद्र मोदी के इस्त्राइल दौरे का आरएसएस के विचारों से भी है कनेक्शन?

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को तीन दिनके इस्त्राइल दौरे पर रवाना हो गये. वे इस्त्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामीन नेतान्याहू के न्यौते पर इस्त्राइलगयेहैं और 25 जून को ट्विटर पर इसका एलान करते हुए नेतान्याहू ने सार्वजनिक खुशीप्रकटकी थी.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केपितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ की बैठकों-कार्यक्रमों में इस्त्राइल हमेशा से एक […]

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को तीन दिनके इस्त्राइल दौरे पर रवाना हो गये. वे इस्त्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामीन नेतान्याहू के न्यौते पर इस्त्राइलगयेहैं और 25 जून को ट्विटर पर इसका एलान करते हुए नेतान्याहू ने सार्वजनिक खुशीप्रकटकी थी.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केपितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ की बैठकों-कार्यक्रमों में इस्त्राइल हमेशा से एक ऐसा उदाहरण रहा है, जिसकी चर्चा बारंबार की जाती है और कहा जाता है कि कैसे 1600 साल तक यहूदी अलग-अलग देशों में रहने के बाद 1948 में वे अपना देश इस्त्राइल की स्थापना करने में कामयाब हुए. 1992 में दोनों देशों के बीच स्थापित हुए कूटनीतिक रिश्तों के 25 साल पूरे होने परप्रधानमंत्री का दौरा हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 70 साल के इतिहास में इस्त्राइल जाने वाले पहले भारतीय पीएम हैं और उनका यह दौरा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मान्यताओं की पुष्टि करता है. संघ की अखंड भारत व हिंदू राष्ट्र की धारणा हमेशा से मजबूत रही है और इस धारणा के साकार होने के लिए वह इस्त्राइल का उदाहरण देकर अपने स्वयंसेवकों का उत्साह बढ़ाता है. अब संघ के प्रचारक रहे और वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस्त्राइल गये हैं तोजाहिरहै इसके दूरगामी संदेश हैं और इसमें वैसे प्रतीक ही चुने जायेंगे जो संघ के विचारों के अनुरूप हों.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीकेइस दौरे में रक्षा,साइबरसुरक्षा, कृषि,सिंचाई प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्र मेंभारत के इस्त्राइल के साथ समझौते होने की उम्मीद है. इसमेंसबसे अहम बात यह कि प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी के फिलीस्तीन के कब्जे वाले रमल्ला शहर जाने की संभावना नहीं है.

हालांकि इस संभावना को देखते हुए भारत में कुछ विपक्षी पार्टियां नरेंद्र मोदी पर पहले से आक्रामक हैं और वे फिलीस्तीन पर भारत के परंपरागत रुख को नहीं बदलने की चेतावनी दे रहे हैं. हालांकि मोदी ने अपने दौरे से पहले हीइस्त्राइल के एक समाचार पत्र इस्त्राइल हायोम को दिये साक्षात्कार में सधे शब्दों में कहा है – भारत दो देशों केसिद्धांतमें भरोसा रखता है, जिसमें आज का इस्त्राइल और भविष्य का फिलिस्तीनशांतिपूर्ण सह अस्तित्व के साथ रहसकें.उन्होंने यह भी कहाकि,इस मामले में अंतिम समझौता सभी संबंधितपक्षों की भावनाओं केमुताबिकहोना चाहिए.

मोदी के भव्य स्वागत की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत की इस्त्राइल में भव्य तैयारी की गयी है. इस्त्राइल के प्रधानमंत्री नेतान्याहू स्वयं हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी की आगवानी करेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व पोप के बाद ऐसा सम्मान पाने वाले मोदी तीसरी शख्सियत होंगे. मोदी के आगमन को लेकर वहां की मीडिया में भी उत्साह है और कहा गया है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री इस्त्राइल के दौरे पर आ रहे हैं. वहां की मीडिया ने मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री बताया है.

रमल्ला नहीं जाने की संभावना और मोशे से मुलाकात

नरेंद्र मोदी को इस्त्राइल मीडिया पहले ही यह सलाह दे चुका है कि वे रमल्ला नहीं जायें. एक न्यूज वेबसाइट अरूट्ज शेवा ने स्पष्ट तौर पर लिखा कि मोदी रामल्ला नहीं जा रहे हैं. रामल्ला फिलीस्तीन ऑथारिटी में आता है, जिसको लेकर दशकों से क्षेत्र में तनाव है.

रमल्लापूर्व में अरब का ईसाई शहर रहा है, जहां अब मुसलिम आबादी अधिक है. ईसाई यहां अल्पसंख्यक हो गये हैं.इस्त्राइल ने 1967 में जार्डन से छह दिन के युद्ध के बाद इस शहर पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद भी इसको लेकर विभिन्न पक्षों में संघर्ष जारी रहा.

फिलीस्तीन से कूटनीतिक रिश्तों को लेकर दुनिया के किसी नेता का रमल्ला जाने का प्रतिकात्मक मायने होता है. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपने दौरे में यहां गये थे. ध्यान रहे कि पिछले ही महीने फिलीस्तीन के प्रधानमंत्री महमूद अब्बास दिल्ली आये थे और राष्ट्रपति मुखर्जी, प्रधानमंत्री मोदी सहितविदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिले थे. इस दौरान उन्हें यह अहसास कराया गया था कि हमारे रिश्तों की बुनियादी पुरानी है.

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के मोशेनामकबालक से मिलने का कार्यक्रम तय है. मोशे वहयहूदीबालक है, जिसके माता-पिता 2008 के मुंबई आतंकी हमले में मारे गये थे. मोदी इस भेंट के जरिये यह स्पष्ट संदेश देंगे कि आतंकवाद न सिर्फ भारत-इस्त्राइल बल्कि पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा एवं चुनौती है. प्रतीक की राजनीति के माहिर मोदी के इस कदम पर दुनिया की नजरें टिकी है. अपने दौरे के क्रम में मोदी बुधवार को इस्त्राइली राष्ट्रपति सिमोन पेरेज से भी मिलेंगे.

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