पाकिस्तान की फिर हो सकती है कूटनीतिक कुटार्इ, कश्मीर विवाद के बहाने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दिया संकेत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Jun 2017 9:27 AM

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नयी दिल्लीः सीमा पार से भारत की नियंत्रण रेखा पर लगातार संघर्ष विराम के नियमों का उल्लंघन करने वाले, भारत में घुसपैठ कराने वाले आैर कुलभूषण जाधव के मामले में अड़ियल रुख अख्तियार करने वाले पाकिस्तान की एक बार फिर कूटनीतिक कुटार्इ हो सकती है. पाकिस्तान की आेर से कश्मीर विवाद को अंतरराष्ट्रीय अदालत (आर्इसीजे) […]

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नयी दिल्लीः सीमा पार से भारत की नियंत्रण रेखा पर लगातार संघर्ष विराम के नियमों का उल्लंघन करने वाले, भारत में घुसपैठ कराने वाले आैर कुलभूषण जाधव के मामले में अड़ियल रुख अख्तियार करने वाले पाकिस्तान की एक बार फिर कूटनीतिक कुटार्इ हो सकती है. पाकिस्तान की आेर से कश्मीर विवाद को अंतरराष्ट्रीय अदालत (आर्इसीजे) में नहीं ले जाने को लेकर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस बात के संकेत दे दिये हैं. इसके साथ ही उन्होंने आगामी 8-9 जून को कजाखस्तान के अस्ताना में शंघार्इ सहयोग संगठन (एससीआे) में होने वाले शिखर सम्मेलन से अलग हटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ से मुलाकात की बात को खारिज करके भी इस बात की आेर इशारा किया है.

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चर्चा इस बात की है कि इसी हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ कजाखिस्तान में होंगे, लेकिन भारत ने उनके बीच किसी मुलाकात की संभावना से इनकार किया है. भारत ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में नहीं ले जा सकता. पाकिस्तान के साथ संबंधों पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते.

विदेश मंत्री ने भारत की रणनीति को किया साफ

पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर तीन स्तंभों पर आधारित भारतीय रणनीति को साफ करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि कि सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत दूसरे देशों के साथ भी संपर्क में है. एक संवाददाता सम्मेलन में सुषमा स्वराज ने कहा कि कोई मुलाकात तय नहीं है, न उनकी तरफ से न हमारी तरफ से. उनसे पूछा गया था कि क्या मोदी और शरीफ के बीच 8-9 जून को कजाखिस्तान के अस्ताना में एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात होगी.

कश्मीर मसले पर लगाये जा रहे कयास पर लगाया विराम

पाकिस्तान के एक कानूनी अधिकारी के इस्लामाबाद द्वारा कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में उठाये जाने संबंधी टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान आईसीजे में कश्मीर मुद्दा नहीं उठा सकता. शिमला समझौता और लाहौर घोषणा-पत्र कश्मीर मुद्दे को लेकर बेहद स्पष्ट हैं कि दोनों पक्षों के द्वारा ही इसे हल किया जा सकता है. दोनों देश इन द्विपक्षीय समझौतों से बंधे हुए हैं. सुषमा ने ब्रिटेन की अदालत में हैदराबाद के निजाम के खजाने का मामला और विश्व बैंक के सामने मौजूद सिंधु जल संधि का मुद्दा जैसे अदालत में लंबित कुछ मामलों का भी हवाला दिया.

पाकिस्तान से निबटने में भारत नहीं अपना रहा ढुलमुल नीति

पाकिस्तान से निपटने में सरकार की ‘ढुलमुल’ नीति होने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि भारत बेहद स्पष्ट है कि बिना किसी तीसरे देश, संगठन या किसी और की मध्यस्थता के भारत सभी मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाना चाहता है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एक ही वक्त में आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. मंत्री ने इस बात पर भी जोर देकर कहा कि सरकार दूसरे देशों से भी कह रही है कि पाकिस्तान की तरफ से होने वाले सीमा पार मुद्दे या वहां से निकलने वाले आतंकवाद को भारतीय नजरिये से ही न देखकर यह देखें कि क्या अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद किसी रूप से उस देश के साथ जुड़ा है. उन्होंने कहा कि आखिर में ओसामा बिन लादेन कहा मिला? पाकिस्तान में.

जाधव मामले में भारत के पास है बेहद मजबूत दलील

सुषमा ने कहा कि समय आ गया है जब संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन हो और आतंकवाद को परिभाषित किया जाये. जाधव मामले के गुण-दोष के आधार पर अधिकार क्षेत्र का मुद्दा उठाने की पाकिस्तान की मंशा पर उन्होंने कहा कि भारत के पास बेहद मजबूत दलील है और वह मामला जीतेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का मामला वियना संधि के पाकिस्तान द्वारा उल्लंघन पर आधारित है, जिसके तहत दूतावास से संपर्क न सिर्फ आवश्यक बल्कि अनिवार्य भी है.

भारत ने जाधव मामले में 16 बार पाकिस्तान से किया है अनुरोध

भारत ने जाधव से मिलने की इजाजत देने के लिए पाकिस्तान से 16 अनुरोध किये, जिसे पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने देश के खिलाफ जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में मौत की सजा सुनायी है. पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने अशांत बलूचिस्तान प्रांत से जाधव को पिछले साल तीन मार्च को गिरफ्तार किया था, जहां वह कथित तौर पर ईरान से दाखिल हुआ था. हालांकि भारत यह कहता रहा है कि उसका ईरान से अपहरण किया गया जहां नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उसके कारोबारी हित थे.

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