Flood in UP: यूपी में गंगा, यमुना, हिंडन सहित अन्य नदियों के तेवर देखकर लोग सहमे, 27 जिलों में अलर्ट

गंगा में तेजी से नरौरा और हरिद्वार से पानी आ रहा है. इसकी वजह से अभी छह दिन गंगा जलस्तर बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है. गंगा के बैराज के सभी गेट एक पखवारे से खुले हुए हैं. इन गेटों को और अधिक ऊपर कर दिया गया है ताकि पानी तेजी से निकल सकें
Lucknow: उत्तर प्रदेश में उमस भरी गर्मी के बीच नदियों के रौद्र तेवर कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. नदियों में उफान का सिलसिला जारी है. यूपी में गंगा-यमुना की लहरें अब डराने लगी है. जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण छह जनपदों के 27 शहर अलर्ट मोड पर हैं.
गंगा, यमुना, सरयू, हिंडन सहित अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोग अभी भी अपने ठिकानों में लौट नहीं पा रहे हैं. इस बीच वाराणसी में गंगा के जलस्तर में बढ़ाव व तेज बहाव के चलते नौका संचालन पर अस्थाई रोक लगा दी गई है.
जल पुलिस प्रभारी मिथिलेश यादव के अनुसार, वाराणसी में हर साल जलस्तर 65.5 मीटर मीटर होने पर पूरी तरह से नौका संचालन पर रोका लगा दी जाती है. वर्तमान में तेज हवा और बहाव को देखते हुए नौका संचालन पर अस्थाई रोक लगाई गई है. जलस्तर पर लगातार निगाह रखी जा रही है. पानी घटने पर ही नावों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा.
गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम लगातार जारी है. हालांकि शनिवार को पानी बढ़ने की रफ्तार में कमी आई है और वह पूर्व की अपेक्षा घट कर आधी हो गई है. शुक्रवार सुबह से जलस्तर में वृद्धि की गति तीन सेमी प्रति घंटा से घटकर 1.6 सेमी प्रति घंटा पर आ गई. इस बीच शनिवार रात तक लगभग सभी घाटों का आपसी संपर्क भंग हो चुका था.
इस वजह से गंगा आरती का स्थल एक बार फिर पीछे करना पड़ा. 12 घंटे में बढ़ा 20 सेमी पानी राजघाट पर सुबह आठ बजे से रात 10 बजे तक 12 घंटे में 20 सेमी पानी बढ़ गया. इससे जलस्तर 65.19 मीटर पर पहुंच गया जो चेतावनी बिंदु से अभी लगभग पांच मीटर नीचे है.
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इस बीच गंगा के रौद्र रूप के कारण मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह अब सीढ़ियों पर किया जा रहा है. वहीं, मीरजापुर में जलस्तर में वृद्धि की दर बढ़ी और यह तीन सेमी प्रति घंटा की जगह 4.75 सेमी प्रति घंटा हो गई है. वहां पानी 70.90 मीटर पर था. इससे माना जा रहा है कि रविवार शाम तक वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर वृद्धि की रफ्तार बढ़ सकती है.
इस बीच जनपद गाजीपुर में जलस्तार में 1.5 सेमी प्रति घंटा की वृद्धि दर्ज की गई और पानी सुबह आठ बजे से रात के 10 बजे तक 12 घंटे में 18 सेमी बढ़कर 58.15 मीटर पर जा पहुंचा था. दूसरी ओर बलिया जनपद में दो सेमी प्रति घंटा की गति से बढ़ता जलस्तर 12 घंटों में 25 सेमी बढ़कर 52.50 मीटर पर आ गया था.
इसके साथ ही गंगा में बाढ़ के पानी के पलट प्रवाह से वरुणा नदी में भी पानी बढ़ने लगा है. पानी धीरे-धीरे बस्तियों की ओर चढ़ने लगा है. इससे तटवासियों में घबराहट बढ़ने लगी है. उन्होंने सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी करना शुरू कर दी है.
इन परिस्थितियों के मद्देनजर गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है. मान मंदिर घाट, शीतला घाट, दशाश्वमेध घाट, राजघाट पर बैरिकेडिंग के बाद रस्सियों से सुरक्षा घेरा बनाया जा रहा है. स्नानार्थियों की अधिक भीड़ के मद्देनजर जल पुलिस, पीएसी व एनडीआरएफ के जवान तैनात किए गए हैं.
कानपुर में भी गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. शुक्लागंज की तरफ गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार कर गया है और खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है. शुक्लागंज में गंगा के किनारे स्थित गांवों में पानी पहुंच गया है. इसको लेकर इरीगेशन डिपार्टमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने कानपुर में गंगा के किनारे बसे गांवों और कटरी में सतर्कता बढ़ा दी है. हालत यह है कि सभी घाटों में गंगा ऊपर तक आ गयी है. सीढ़ियां डूब गई हैं. पुलिस ने पहले ही घाटों में स्नान और बोटिंग पर रोक लगा दी है. साथ ही घाटों के किनारे सतर्कता बढ़ा दी गयी है.
दरअसल गंगा में तेजी से नरौरा और हरिद्वार से पानी आ रहा है. इसकी वजह से अभी छह दिन गंगा जलस्तर बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है. गंगा के बैराज के सभी गेट एक पखवारे से खुले हुए हैं. इन गेटों को और अधिक ऊपर कर दिया गया है ताकि पानी तेजी से निकल सके. वहीं पांडु नदी में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है वरुण विहार, कंचनपुरवा मर्दनपुरवा, मायापुरम बस्ती सहित कई जगहों में भी पानी आ गया है. गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही पांडु नदी में भी जल तेजी से बढ़ने से आसपास के इलाकों को खतरा बढ़ गया है.
इसके अलावा पश्चिमी यूपी में भी बाढ़ के कारण हालात खराब हैं. गाजियाबाद में हिंडन नदी में आई बाढ़ के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. सिटी फॉरेस्ट में हिंडन नदी का पानी भर गया है। इसी वजह से इसे बंद करना पड़ा है. पार्क में पानी देखते हुए गेट पर ताला लगा दिया गया है, ताकि कोई अंदर न आए और हादसे का शिकार न हो जाए.
इसके साथ ही आधा करहेड़ा गांव पानी में डूब गया और कई कॉलोनियों में गले तक पानी पहुंच चुका है. सतर्कता बरतते हुए बिजली विभाग ने यहां की लाइट काट दी. बाढ़ ग्रस्त इलाके में पानी उतरने तक बिजली की सप्लाई बंद रहेगी.
एसडीएम विनय सिंह, विधायक सुनील शर्मा, पूर्व पार्षद विजेंद्र चौहान ने भी इलाके में जाकर लोगों से तुरंत घर खाली करने की अपील की है. एसडीएम विनय सिंह ने बताया कि 24 जुलाई से पानी घटना शुरू होगा. लेकिन, कई लोग अभी भी घर खाली नहीं कर रहे हैं. इन हालातो में उन्हें बाद में बाढ़ से निकालना मुश्किल हो जाएगा.
इस बीच ज्यादातर लोग अपना घर खाली करके प्रशासन की तरफ से तैयार किए गए करहेड़ा कंपोजिट विद्यालय में शरण ले रहे हैं. ट्रैक्टर और ट्रॉली पर सामान लादकर लोगों को सरकारी विद्यालय पहुंचना पड़ा.
स्थानीय पार्षद ने बताया कि प्रभावित लोगों के लिए खाने के पैकेट बंटवाए गए हैं. लोगों के लिए 10 से अधिक ट्रैक्टर लगाए गए हैं, ताकि लोग अपना घर खाली कर सकें. पीने के पानी का भी इंतजाम किया जा रहा है. लेकिन, लोग नहीं मान रहे हैं. अब भी कई परिवार बाढ़ में ही महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ रुके हुए हैं.
गाजियाबाद प्रशासन की तरफ से कंपोजिट विद्यालय में आने वाले बाढ़ पीड़ितों के लिए गद्दे, खाने, हेल्थ चेकअप, शौचालय समेत सभी तरह की व्यवस्था की गई है. इसके बाद भी लोग ट्रैक्टर ट्रॉली में अपनी मूलभूत सुविधाएं जैसे कि पंखे, गद्दे, बर्तन, सिलेंडर, खाना बनाने के लिए चूल्हा आदि लेकर पहुंच रहे हैं. कई छोटे-छोटे बच्चों के साथ महिलाएं विद्यालय पहुंचीं हैं.
चिकित्सा विभाग के मुताबिक एक टीम स्कूल में 24 घंटे ड्यूटी देगी. यहां सभी प्रकार की दवाओं का इंतजाम किया गया है. मलेरिया विभाग की तरफ से स्कूल में स्प्रे भी करवाया गया है, ताकि लोगों को दिक्कत न हो. सहायक मलेरिया अधिकारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि अपने स्तर पर जिन इलाकों में अभी पानी भरना शुरू नहीं हुआ है या फिर कम पानी है, वहां छिड़काव करने के लिए टीम को भेजा गया है.
कन्नौज में गंगा का निशान खतरे की ओर तेजी से बढ़ रहा है. प्रत्येक तीन घंटे में एक सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ रहा है. गंगा का पानी मुहाने पर बसे गांवों में घुसने लगा. इससे कटरी क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका जैसा नजारा कायम हो गया. इससे ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई.
कन्नौज में गंगा का जलस्तर प्रति घंटा तीन सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है. शनिवार दोपहर करीब दो बजे 125.25 सेंटीमीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया. खतरे के निशान 125.97 से अब 72 सेंटीमीटर सिर्फ गंगा का जलस्तर दूर है. महादेवी गंगा घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है. कासिमपुर गांव के अंदर पानी घुस गया. चारों तरफ से गंगा का जलस्तर हिलोरे मार रहा है. गंगा में बढ़े जलस्तर को देखते हुए नाव संचालन पर रोक लगा दी गई है.
रायबरेली में तट बंधों से छोड़े गए पानी से डलमऊ में गंगा का जलस्तर गांवों की ओर रुख करने लगा है. धीमी रफ्तार से जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच रहा है. केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के अनुसार रविवार को गंगा का जलस्तर 98.030 मीटर दर्ज किया गया. जलस्तर चेतावनी बिंदु 98.360 मीटर के सापेक्ष सिर्फ 33 मिली मीटर दूर है. लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण कटान तेज हो गई है. बढ़ रहे जलस्तर ने ग्रामीणों की उलझने बढ़ा दी हैं.
उन्नाव में गंगा नदी का जलस्तर प्रतिदिन बढ़ रहा है. बीते चौबीस घंटे में गंगा का जलस्तर करीब छह सेंटीमीटर और बढ़ कर 112.100 मीटर पहुंच गया है. इस वजह से तटवर्ती इलाकों के लोग सहमे हुए हैं. शुक्लागंज के मोहम्मद नगर व गोताखोर मुहल्ले में चारों तरफ पानी पहुंचने से लोगों को आवागमन नाव से करना पड़ रहा है. प्रशासन ने इसके लिए दो नाव की व्यवस्था की है.
फतेहपुर चौरासी में गंगा के बढ़ते जलस्तर से कटरी क्षेत्र के किसानों की कई बीघे भिंडी, धान, परवल आदि की फसल जलमग्न हो गई. गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है. वहीं नाव का सहारा लेकर ग्रामीण अपनी फसलों को बचाने की जुगत में जुटे हुए हैं. यमुना नदी के किनारे बसे गांव ललौली, दपसौरा, पल्टूपुरवा फिलहाल खतरे से दूर हैं. लेकिन, गंगा और पांडु नदीं में जलस्तर में लगातार हो रहे इजाफे ने खतरे की घंटी बजा दी है.
नायब तहसीलदार अरविंद कुमार ने रामनगर कौहन यमुना घाट से प्रतिदिन बांदा जिले के मर्का कस्बे को आने-जाने वाली नाव को स्थगित करा दिया गया है. जब तक खतरा टल नहीं जाता है तब तक के लिए नाव का संचालन बंद करा दिया गया है. पिछले वर्ष यहां नाव पलटने से 12 लोगों की डूबकर मौत हो गयी थी.
चित्रकूट में यमुना नदी का जल स्तर राजापुर और मऊ में बढ़ रहा है. केद्रीय जल बोर्ड के मुताबिक शनिवार को राजापुर में यमुना नदी का जल स्तर 82.00 मीटर पर रहा. जिले में यमुना का खतरे का निशान 93 मीटर पर है. प्रशासन दूसरे जिलो में बाढ़ को देखते हुए सतर्क है.
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लेखक के बारे में
By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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