सरहुल उत्सव में दिखी आदिवासी परंपरा की झलक
Updated at : 29 Mar 2025 5:02 PM (IST)
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<P><H2>रनिया.</H2> एसएस प्लस टू उच्च विद्यालय में शनिवार को सरहुल उत्सव का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की छात्राओं ने जोहार जोहार हामर पावन धरती के वंदना गीत
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रनिया.
एसएस प्लस टू उच्च विद्यालय में शनिवार को सरहुल उत्सव का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की छात्राओं ने जोहार जोहार हामर पावन धरती के वंदना गीत से की. विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रीता सरोजनी कोनगाड़ी ने कहा कि आज प्रत्येक नागरिक को पेड़ बचाने, रोपने और अपनी संस्कृति को बचाने की आवश्यकता है. शिक्षिका संजू केरकेट्टा ने सरहुल पर्व के प्राकृतिक महत्व, आदिवासियों की प्राकृतिक आस्था और विश्वास के संबंध में विस्तार से जानकारी दी. कहा कि आज हमें पर्यावरण संरक्षण और उसके अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा लेनी चाहिए. विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य और लोकगीत प्रस्तुत किया. चैत महीना आलक, ओको रेको बहा तना, हरियर सरई फूल और महुआ कर खोंच जैसे पारंपारिक आदिवासी जादुर गीत प्रस्तुत किया. इस अवसर पर झारखंड के जनजातियों के दैनिक क्रियाकलापों और संस्कृति पर आधारित रैंपवॉक भी किया गया. मौके पर शिक्षक दाऊद मड़की सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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