ePaper

Siwan News : जिले की 93 पंचायतों को टीबीमुक्त किया गया घोषित

Updated at : 30 Dec 2025 9:05 PM (IST)
विज्ञापन
Siwan News :  जिले की 93 पंचायतों को टीबीमुक्त किया गया घोषित

सीवान. जिले में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम ने 2025 में नयी ऊंचाइयां छुई हैं. इस साल जिले की 93 पंचायतों को टीबीमुक्त घोषित किया गया है और विभाग अगले लक्ष्य के

विज्ञापन

सीवान. जिले में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम ने 2025 में नयी ऊंचाइयां छुई हैं. इस साल जिले की 93 पंचायतों को टीबीमुक्त घोषित किया गया है और विभाग अगले लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है. यक्ष्मा विभाग के अथक प्रयासों से लगभग 50 और पंचायतों को टीबीमुक्त बनाने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है. यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ””टीबीमुक्त भारत”” अभियान की दिशा में बड़ा कदम है, जिसका लक्ष्य 2025 तक देश को टीबी से मुक्त करना है. इस साल सौ दिनों तक चले विशेष टीबी उन्मूलन अभियान ने जिले में जबरदस्त सफलता हासिल की. अभियान के तहत लगभग एक लाख लोगों की बलगम जांच, 70 हजार लोगों की एक्स-रे जांच और तीन लाख से अधिक लोगों की व्यापक स्क्रीनिंग की गयी. इससे जिले में टीबी की पहचान और इलाज में तेजी आयी है. टीबी उन्मूलन को गति देने वाला सबसे बड़ा कदम जुलाई के पहले सप्ताह में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के लिए बीपाल-एम रेजिमेन का शुभारंभ रहा. जिला यक्ष्मा केंद्र में सिविल सर्जन डॉ श्रीनिवास प्रसाद ने खुद एक मरीज को नयी दवा देकर क्रांतिकारी उपचार की शुरुआत की. पहले एमडीआर टीबी का इलाज नौ से 24 महीनों तक चलता था, जिसमें मरीजों को गंभीर दुष्प्रभाव झेलने पड़ते थे. अब बीपाल-एम रेजिमेन से इलाज केवल छह महीनों में पूरा हो सकता है और दुष्प्रभाव भी बहुत कम हैं. बीपाल-एम रेजिमेन टीबी उन्मूलन की दिशा में क्रांतिकारी कदम है, जिससे इलाज की अवधि कम होने के साथ-साथ मरीजों की परेशानी भी घटेगी और सफलता दर बढ़ेगी. यह नयी पद्धति पूरे देश में अपनायी जा रही है और सीवान जैसे जिलों में मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है. परिवारों की सुरक्षा के लिए नयी जांच : सीवाइ-टीबी स्किन टेस्ट : टीबी मरीजों के परिवारों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सीवाइ-टीबी स्किन टेस्ट की शुरुआत की है. फर्स्ट लाइन दवा ले रहे पल्मोनरी टीबी मरीजों के साथ रहने वाले 18 साल से अधिक उम्र के परिजनों की यह जांच की जा रही है. हाथ में 0.1 एमएल इंट्राडर्मल इंजेक्शन लगाया जाता है और 48-72 घंटे बाद 5 एमएम से ज्यादा इंड्यूरेशन होने पर टीबी संक्रमण माना जाता है. संक्रमित पाये जाने पर परिजनों को टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (3 एचपी दवा) दी जाती है, जो आगे बीमारी होने से रोकती है. यह आधुनिक जांच विधि परिवारों को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Jitendra Upadhyay

लेखक के बारे में

By Jitendra Upadhyay

Jitendra Upadhyay is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola