सीवान . शहर की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसी क्रम में जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने नगर परिषद क्षेत्र के लक्ष्मीपुर और सदर प्रखंड अंतर्गत भंटापोखर में प्रस्तावित स्थलों का स्थल निरीक्षण किया.
निरीक्षण के दौरान नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ विपिन कुमार, सिटी मैनेजर बालेश्वर राय, स्वच्छता पदाधिकारी उज्ज्वल कुमार, सदर अंचलाधिकारी आयुष तिवारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे. जिलाधिकारी ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की आवश्यकता और उसके लाभों पर विस्तार से चर्चा की.बिना ट्रीटमेंट दाहा नदी में बहाया जा रहा नालों का पानी
अधिकारियों ने बताया कि एसटीपी के माध्यम से शहर से निकलने वाले गंदे और दूषित पानी को वैज्ञानिक तरीके से शुद्ध किया जाएगा. उपचार के बाद पानी को पुनः उपयोग योग्य बनाया जाएगा, जिससे जल संसाधनों का संरक्षण संभव हो सकेगा. वर्तमान में शहर के विभिन्न इलाकों से निकलने वाले नालों का गंदा पानी सीधे दाहा नदी में गिरता है, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है. एसटीपी के निर्माण के बाद दाहा नदी को प्रदूषण से बचाने में यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी. जिलाधिकारी ने कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट केवल स्वच्छता से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से भी सीधे तौर पर संबंधित है. गंदे पानी का वैज्ञानिक उपचार होने से जलजनित बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा और शहरवासियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा.स्थायी जगह नहीं होने से जैसे-तैसे हो रहा कचरा निस्तारण
इसके साथ ही शहर के 45 वार्डों से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के समुचित निस्तारण के लिए भी जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अधिकारियों ने बताया कि अब तक कचरा निस्तारण के लिए स्थायी भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण कचरे का अव्यवस्थित निस्तारण करना पड़ता था, जिससे दुर्गंध, गंदगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती थीं. कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध हो जाने से नगर परिषद को दोहरा लाभ मिलेगा. एक ओर कचरे का संग्रहण और निस्तारण व्यवस्थित होने से शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार होगा और दुर्गंध व प्रदूषण से लोगों को राहत मिलेगी. दूसरी ओर कचरे से तैयार होने वाली जैविक खाद के उपयोग से नगर परिषद अपनी आय में वृद्धि कर सकेगी. इससे प्राप्त राजस्व को शहर के विकास कार्यों में लगाया जाएगा, जो दीर्घकालीन रूप से नगर के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगा.निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर आवश्यक प्रस्ताव तैयार किए जाएं, ताकि दोनों परियोजनाओं को जल्द धरातल पर उतारा जा सके. उन्होंने कहा कि स्वच्छ, स्वस्थ और विकसित शहर के निर्माण के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
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