कृषि विज्ञान केंद्र में चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण प्रारंभ

Published by : Dipankar Shriwastaw Updated At : 01 Sep 2025 7:03 PM

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कृषि विज्ञान केंद्र में चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण प्रारंभ

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सहरसा . कृषि विज्ञान केंद्र अगुवानपुर में सोमवार से चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. यह प्रशिक्षण एक सितंबर से चार सितंबर तक आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं व महिलाओं को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक से अवगत कराना व उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है. कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ अरविंद कुमार सिन्हा ने किया. अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उद्यम है. जिससे पोषण सुरक्षा व आय वृद्धि दोनों संभव है. प्रशिक्षण के पहले दिन विशेषज्ञ डाॅ सुनीता पासवान ने प्रतिभागियों को मशरूम की उपयोगिता, पोषण मूल्य एवं उत्पादन की प्रारंभिक तकनीक की जानकारी दी. आने वाले दिनों में प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, मशरूम बिस्तर तैयार करने की विधि व प्रसंस्करण व विपणन के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी. इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ सुनीता पासवान ने कहा कि मशरूम उत्पादन ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यह ना केवल अतिरिक्त आय का साधन है. बल्कि पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है. किसान इसे अपनाते हैं तो परिवार के साथ-साथ समाज में भी पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है. इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डाॅ पंकज ने कहा कि मशरूम उत्पादन से ग्रामीण महिलाएं एवं युवा स्वरोजगार के क्षेत्र में नई दिशा पा सकते हैं. वहीं वैज्ञानिक मो नदीम अख्तर ने कहा कि मशरूम उत्पादन तकनीक सीखने के बाद किसान इसे आसानी से अपने घरों में या छोटे स्तर पर शुरू कर सकते हैं. इसमें बहुत अधिक पूंजी निवेश की आवश्यकता नहीं होती. थोड़े से स्थान पर भी इसका उत्पादन संभव है. इससे किसान तेजी से आर्थिक लाभ कमा सकते हैं. साथ ही बीएआईएफ की रिंकी कुमारी एवं शुभाशीष साह ने कहा कि बीएआईएफ लगातार ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास कर रहा है. मशरूम उत्पादन जैसी तकनीकें उन्हें स्वरोजगार के साथ पोषण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा भी प्रदान करती हैं. इससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका में सुधार होगा. 30 की संख्या में डिजिटल सखी, जीविका दीदी एवं महिला प्रतिभागी इस प्रशिक्षण में शामिल हुए.

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