Jamshedpur News : 30 दिनों में 60 गांवों तक पहुंचा रथ, महिलाओं ने ली बाल विवाह कुप्रथा मिटाने की शपथ

Edited by RAJESH SINGH
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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

Jamshedpur News : भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर पूर्वी सिंहभूम जिले में चलाया जा रहा गहन जागरुकता अभियान रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संपन्न हो गया.

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पूर्वी सिंहभूम में 850 किमी का सफर तय कर ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ का समापन

तीन चरणों में चलाया गया जागरुकता महाभियान

Jamshedpur News :

भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर पूर्वी सिंहभूम जिले में चलाया जा रहा गहन जागरुकता अभियान रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संपन्न हो गया. आदर्श सेवा संस्थान द्वारा संचालित ”बाल विवाह मुक्ति रथ” ने अपने 30 दिनों के सफर में जिले के 60 गांवों और कस्बों का भ्रमण कर 850 किलोमीटर की लंबी यात्रा पूरी की. इस दौरान रथ ने हजारों की संख्या में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ इस महाभियान से जोड़ा और ”बाल विवाह मुक्त भारत” के निर्माण का सशक्त संदेश दिया.

सांसद व विधायक का मिला समर्थन

इस बाल विवाह मुक्ति रथ को विधायक सरयू राय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था, जबकि जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने भी इस अभियान को अपना शुभकामना संदेश देकर समाज को जागरूक करने की अपील की थी.

विवाह की आड़ में अपराध है बाल विवाह : प्रभा जायसवाल

संस्था की निदेशक प्रभा जायसवाल ने रथ के समापन के अवसर पर कहा कि यह महज कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी, बल्कि पहियों पर बदलाव का एक बड़ा संदेश था, जिसे आम लोगों ने खुले दिल से स्वीकारा और सराहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह कोई सामान्य सामाजिक कुप्रथा नहीं है, बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों के साथ होने वाला एक गंभीर अपराध है.

तीन चरणों में चला अभियान, धर्मगुरुओं और टेंट वालों से की गयी अपील

जिले में यह महाभियान मुख्य रूप से तीन चरणों में संचालित हुआ. पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ा गया. दूसरे चरण में समाज के धर्मगुरुओं, कैटरर्स, टेंट-सजावट वालों, बैंक्वेट हॉल मालिकों और बैंड-बाजा वालों से सीधा संपर्क किया गया. उनसे अपील की गयी कि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व वर-वधू की उम्र की जांच अवश्य करें. उन्हें बताया गया कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार की सेवाएं देना या सहयोग करना कानूनी अपराध है. वहीं, तीसरे चरण में जिले की विभिन्न पंचायतों में सघन जागरुकता अभियान चलाया गया.

कैंडल मार्च निकालकर लिया गया संकल्प

अभियान के अंतिम दिन आठ मार्च (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस) के अवसर पर महिलाओं और स्थानीय लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर बाल विवाह का पुरजोर विरोध किया. इस मौके पर पूर्वी सिंहभूम को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की शपथ ली.

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