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बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है- डीडीसी

Updated at : 27 Nov 2024 7:45 PM (IST)
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बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है- डीडीसी

प्रतिनिधि, मधेपुरा महिला व बाल विकास निगम व जिलाधिकारी के निदेशानुसार बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को सशक्त बनाने के लिए उप विकास आयुक्त अवधेश कुमार आनंद ने पदाधिकारियों

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प्रतिनिधि, मधेपुरा महिला व बाल विकास निगम व जिलाधिकारी के निदेशानुसार बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को सशक्त बनाने के लिए उप विकास आयुक्त अवधेश कुमार आनंद ने पदाधिकारियों व कर्मियों को शपथ दिलाया. डीडीसी ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई और कानून का उल्लंघन है. जो बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और विकास में बाधा है.जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी रश्मि कुमारी ने कहा कि बाल विवाह जैसे कूरीति को रोकने के लिए सरकार द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 9 के अनुसार यदि 18 वर्ष से कम की आयु की लड़की व 21 वर्ष से कम की आयु का लड़का का विवाह होता है तो वह बाल विवाह माना जाता है. इस अधिनियम के तहत बाल विवाह करने या कराने वाले को कठोर कारावास जिसके अंतर्गत 2 साल की जेल या एक लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है. इसके विशेष प्रचार प्रसार के लिए ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, सभी स्कूलों, कॉलेज के प्रिंसिपलों, शिक्षक, छात्राओं, विधिक सेवा पर प्राधिकार, सेविका, आशा, जीविका दीदी को जागरूक किया जा रहा है. कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अभिषेक कुमार के साथ-साथ कई छात्राएं व कर्मी मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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