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आदेश की अवहेलना व कार्य के प्रति उदासीनता के आरोप में सीओ-आरओ से पूछा स्पष्टीकरण

Updated at : 06 Dec 2024 9:50 PM (IST)
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आदेश की अवहेलना व कार्य के प्रति उदासीनता के आरोप में सीओ-आरओ से पूछा स्पष्टीकरण

<P>प्रतिनिधि, खगड़िया</P>वरीय पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना, अनुशासनहीनता, स्वेच्छारिता व सरकारी कार्य के प्रति उदासीनता के आरोप में परबत्ता के अंचलाधिकारी मोना गुप्ता व सदर अंचल के राजस्व पदाधिकारी

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प्रतिनिधि, खगड़िया

वरीय पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना, अनुशासनहीनता, स्वेच्छारिता व सरकारी कार्य के प्रति उदासीनता के आरोप में परबत्ता के अंचलाधिकारी मोना गुप्ता व सदर अंचल के राजस्व पदाधिकारी शंभू कुमार कार्रवाई के घेरे में आ गये हैं. दोनों अधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा गया है. जानकारी के मुताबिक एडीएम आरती ने राजस्व विभाग के दोनों पदाधिकारियों से जवाब-तलब किया है. एडीएम ने सीओ तथा राजस्व पदाधिकारी को जवाब समर्पित करने के लिए 24 घंटे का मोहलत दिया है. बताया जाता है कि एडीएम ने पूछा है कि वरीय पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना, अनुशासनहीनता, स्वेच्छारिता व सरकारी कार्य के प्रति उदासीन रवैये के कारण क्यों नहीं उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए विभाग को रिपोर्ट भेजी जाय. बता दें कि जवाब नहीं देने पर यह मान लिया जायेगा कि उन्हें ( सीओ व राजस्व पदाधिकारी ) को कुछ नहीं कहना है. इस स्थिति में इनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई आरंभ किये जाने की बातें कही.

बगैर सूचना के सीओ थे मुख्यालय से बाहर

बीते दो दिसंबर को एडीएम ने गूगल मीट के जरिये ऑनलाइन दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, ई-मापी, अभियान बसेरा-टू, आधार सीडिंग आदि की समीक्षा की, जिसमें परबत्ता अंचल के सीओ मोना गुप्ता ने भाग नहीं ली. पूछे जाने पर यह बातें सामने आयी कि वो अवकाश पर हैं. सूत्रों की माने तो अवकाश पर जाने के पूर्व सीओ ने न तो इसकी सूचना जिला गोपनीय शाखा को दी और न ही मुख्यालय छोड़ने की जानकारी एडीएम को दी. बताया जाता है कि डीएम द्वारा सभी सीओ को मुख्यालय छोड़ने से पहले वरीय पदाधिकारी से अनुमोदन प्राप्त करने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन परबत्ता सीओ ने डीएम के आदेश की परवाह किये बगैर बिना अनुमति लिए मुख्यालय छोड़ दिया.

सीओ की झूठ पकड़ी गयी

वरीय पदाधिकारी द्वारा पूछे जाने पर परबत्ता सीओ मोना गुप्ता द्वारा बताया गया कि सीडब्लूजेसी में ओथ के लिए वे हाईकोर्ट आए हुए हैं, लेकिन आशंका होने पर जब एडीएम ने विधि शाखा से इसकी तहकीकात करायी, तो पता चला कि उक्त मामले में हाईकोर्ट जाने के लिए परबत्ता सीओ को प्राधिकृत ही नहीं किया गया है.

म्यूटेशन आवेदन के निष्पादन में लापरवाही आयी सामने

जानकारी के मुताबिक ऑनलाइन जमीन के दाखिल-खारिज के प्राप्त आवेदन की समीक्षा के दौरान यह बातें सामने आयी कि परबत्ता सीओ द्वारा आवेदन निष्पादन में विलंब किया जाता है. एडीएम ने इसे खेदजनक बताते हुए सीओ से स्पष्टीकरण पूछा है. बताया जाता है कि समीक्षा के दौरान दाखिल-खारिज के कई आवेदन सीओ के स्तर पर पेंडिंग पाया गया.

म्यूटेशन के प्रावधानों का आरओ कर रहे उल्लंघन

बिहार दाखिल-खारिज अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के मामले में खगड़िया अंचल के राजस्व पदाधिकारी शंभू भी कार्रवाई के घेरे में आ गये हैं. राजस्व पदाधिकारी के इस लापरवाही पर सख्त रुख अख्तियार करते एडीएम ने इनसे स्पष्टीकरण पूछा है. एडीएम द्वारा समीक्षा के दौरान यह बातें सामने आयी कि राजस्व पदाधिकारी जानबूझ कर दाखिल-खारिज आवेदन के निष्पादन में न सिर्फ लापरवाही बरत रहे हैं, बल्कि वरीय पदाधिकारी द्वारा बार-बार जारी आदेश के बाद भी दाखिल-खारीज तथा परिमार्जन प्लस पर प्राप्त आवेदनों के निष्पादन में अनावश्यक देरी कर रहे हैं. सूत्र बताते हैं कि चार दर्जन से अधिक म्यूटेशन आवेदन पर राजस्व पदाधिकारी कुंडली मार बैठे हैं. एडीएम द्वारा किये गए वर्ष 2024-25 के आधे दर्जन म्यूटेशन वाद क्रमशः 14, 413, 1010, 1011, 1012 तथा 1030 की समीक्षा के दौरान यह बातें प्रमाणित हो गयी कि राजस्व पदाधिकारी द्वारा बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है.

11 सौ पेंडिंग है डिजिटलाइजेशन जमाबंदी से जुड़े आवेदन

ऑनलाइन म्यूटेशन के साथ-साथ राजस्व पदाधिकारी शंभू कुमार के पास बड़ी संख्या में डिजिटलाइज्ड जमाबंदी से जुड़े आवेदन भी पेंडिंग है. जानकारी के मुताबिक बीते दो दिसंबर को एडीएम द्वारा की गयी समीक्षा के दौरान यह बातें सामने आयी कि परिमार्जन प्लस पर डिजिटलाइज्ड जमाबंदी में सुधार के लिए भू-धारियों से प्राप्त 1070 आवेदन पेंडिंग है, जबकि छुटे हुए जमाबंदी के डिजिटलाइज्ड को लेकर प्राप्त 112 आवेदन भी इनके ( राजस्व पदाधिकारी ) पास लंबित है. बताया जाता है कि परिमार्जन प्लस आवेदनों के निष्पादन में लापरवाही बरतने के कारण बीते 19 नवंबर को भी एडीएम द्वारा राजस्व पदाधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा गया था. तब एडीएम को दिये जवाब में इन्होंने अधिकतम दो दिनों में लंबित आवेदनों का निष्पादन करने की बातें कही थी, लेकिन इनकी लापरवाही जारी रही. जिसे गंभीरता से लेते हुए एडीएम ने इनसे स्पष्टीकरण पूछा कि क्यों नहीं उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की रिपोर्ट विभाग को भेजी जाए.

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वरीय पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना, अनुशासनहीनता,स्वेच्छारिता व सरकारी कार्य के प्रति उदासीनता के आरोप में संबंधित लोगों ( सीओ व आरओ ) से स्पष्टीकरण पूछा गया है. जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी.

आरती,एडीएम.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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