सलगी गांव में दुर्गा पूजा की 65 साल पुरानी परंपरा

Updated:
विज्ञापन
सलगी गांव में दुर्गा पूजा की 65 साल पुरानी परंपरा

सलगी गांव में दुर्गा पूजा की 65 साल पुरानी परंपरा

विज्ञापन

कुड़ू़ कुड़ू प्रखंड के सलगी गांव में बीते 65 वर्षों से धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है. प्रारंभिक वर्षों में माता की प्रतिमा गांव के लोग स्वयं किसी तरह तैयार करते थे. बाद में कारीगरों द्वारा भव्य प्रतिमाओं का निर्माण शुरू हुआ. साल 1961 में मंदिर प्रांगण में आयोजित बैठक में तत्कालीन मुखिया स्व जगदीश सिंह, सरपंच स्व मोतीचंद्र यादव सहित अन्य गणमान्यों ने सर्वसम्मति से दुर्गा पूजा मनाने का निर्णय लिया. तय हुआ कि कोई प्रतिमा का खर्च उठायेगा, कोई प्रसाद और कोई पूजा का. उसी वर्ष प्लास्टिक का तिरपाल लगाकर पंडाल बनाया गया और पूजा की शुरुआत की गयी. शाम में ढोलक और मंजीरा के साथ भजन-कीर्तन भी होते थे. साल 1962 में गांव में बड़े पैमाने पर बैठक कर पूजा को और भव्य बनाने का निर्णय लिया गया. आयोजन समिति ने बताया कि प्रारंभिक वर्षों में प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा पालकी पर सवार कर पूरे गांव का भ्रमण करायी जाती थी और फिर दुर्गा बांध में विसर्जन होता था. साल 1985 में पहली बार अष्टमी की रात स्थानीय कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया. इसके बाद बाहर से भी रामलीला मंडलियां आने लगीं. साल 1999 में मथुरा से रामलीला मंडली पहुंची थी. वहीं, 2002 में नागपुरी कार्यक्रम और 2010 में भगवती जागरण का आयोजन किया गया. कुल मिलाकर सलगी की दुर्गा पूजा का इतिहास गौरवशाली रहा है और यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जारी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Shailesh Ambashtha

लेखक के बारे में

By Shailesh Ambashtha

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola